FD vs RD: कहां मिलता है ज्यादा रिटर्न, कैसे होता है कैलकुलेट? 5 प्वाइंट में समझें पूरा गणित
FD & RD Return Calculator: यह लेख फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) के बीच तुलना करता है, यह ...और पढ़ें

FD vs RD: कहां मिलता है ज्यादा रिटर्न, कैसे होता है कैलकुलेट? 5 प्वाइंट में समझें पूरा गणित
HighLights
FD में एकमुश्त निवेश पर पहले दिन से ब्याज मिलता है।
RD में हर महीने निवेश होता है, ब्याज धीरे-धीरे बढ़ता है।
5 साल में FD से RD की तुलना में अधिक रिटर्न।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। बैंकों में निवेश करने का तरीका काफी लोकप्रिय है, और कई सालों से चलता आ रहा है। लोग या तो FD में निवेश करते हैं या फिर RD में। FD यानी कि फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit), जहां बैंक या पोस्ट ऑफिस में एक साथ एकमुश्त रकम कुछ समय के लिए लॉक कर दी जाती है और उसपर ब्याज मिलता है। वहीं RD (Recurring Deposit) में हर महीने थोड़ा-थोड़ा निवेश किया जाता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब दोनों की एवरेज ब्याज दरें एक सी होती हैं, तो फिर दोनों के रिटर्न में अंतर क्यों आता है? अगर हां, तो ये खबर आपके लिए है। चलिए आपको दोनों निवेश के तरीकों (Types of Investment) के बारे में विस्तार से बताएंगे और कैलकुलेशन के जरिए समझेंगे कि कहां ज्यादा रिटर्न मिलता है।
1. FD-RD में कैसे जमा होता है पैसा?
FD में एक साथ बड़ी रकम तय समय के लिए निवेश की जाती है, जिसपर पहले दिन से ही ब्याज (Interest on FD & RD) मिलना शुरू हो जाता है। वहीं आप कम से कम 7 दिन की एफडी करवा सकते हैं और ज्यादा से ज्यादा 30 साल की। वहीं RD में आप हर महीने थोड़ी रकम निवेश करते हैं और फिर उसपर ब्याज मिलना शुरू होता है।
2. ब्याज कैसे कैलकुलेट होता है?
FD में ब्याज पहले दिन से मिलने लगता है, इसलिए यहां रिटर्न ज्यादा मिलता है। वहीं RD में हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम जमा होती है, इसलिए यहां रिटर्न कम मिलता है।
3. 5 साल में कितना मिलेगा रिटर्न?
मान लीजिए, सालाना ब्याज दर 6.5% है। और आप FD में एक लाख रुपए 5 साल के लिए रखते हैं तो आपको करीब ₹1,38,042 मिलेंगे। जबकि RD में हर महीने ₹1,666 (कुल 1 लाख) 5 साल तक जमा करने पर लगभग ₹1,18,270 बनेंगे। यानी FD में करीब ₹19,772 ज्यादा का फायदा होगा।
4. आपके लिए कौन बेहतर?
निवेश के दोनों ही तरीके अच्छे हैं। लेकिन आपको अपनी जरूरतों के हिसाब से निवेश करना चाहिए। अगर आपके पास एकमुश्त रकम है और आगे कुछ समय आपको उसकी जरूरत नहीं है, तो उसे एफडी में निवेश कर सकते हैं। वहीं अगर आपके पास ज्यादा पैसे नहीं हैं, तो आप RD में निवेश कर सकते हैं, इससे हर महीने आपकी बचत होगी और कुछ साल में बड़ी रकम भी जमा हो जाएगी।
5. टैक्स के मोर्चे पर कहां राहत?
वैसे देखा जाए तो दोनों तरीकों से होने वाला फायदा टैक्स के दायरे में आता है। वहीं अगर ब्याज तय लिमिट से ज्यादा हो जाए, तो बैंक TDS भी काट सकता है।
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