ITR-3 और ITR-4 फॉर्म भरने की आ गई आखिरी तारीख, जान लें ये जरूरी नियम नहीं तो टैक्स भरना पड़ेगा भारी!
ITR Filing Alert: यह लेख ITR-3 और ITR-4 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 पर प्रकाश डालता है, ...और पढ़ें

31 अगस्त से पहले किसे भरना चाहिए ITR?
HighLights
ITR-3 और ITR-4 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त।
छोटे कारोबारियों, फ्रीलांसरों के लिए प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम।
सही ITR फॉर्म चुनें और ई-वेरिफाई करना न भूलें।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की डेडलाइन सभी टैक्सपेयर्स के लिए एक समान नहीं होती है। अगर आपकी कमाई वेतन (salary) के बजाय बिजनेस, फ्रीलांसिंग या किसी प्रोफेशन (कंसल्टेंसी) से होती है, तो आपको तुरंत अलर्ट हो जाने की जरूरत है। आपको याद दिला दें कि असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए दाखिल ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 है।
31 अगस्त की डेडलाइन किनके लिए है?
आयकर विभाग के अनुसार, यह डेडलाइन (ITR Deadline) उन टैक्सपेयर्स के लिए है जिन्हें ITR-3, ITR-4, ITR-5 और ITR-7 फॉर्म दाखिल करना है और जिनके खातों (Accounts) का टैक्स ऑडिट होना जरूरी नहीं है। इसमें मुख्य रूप से छोटे कारोबारी, फ्रीलांसर, प्रोफेशनल और कंसल्टेंट शामिल होते हैं। अगर आपके खातों का ऑडिट अनिवार्य है, तो आपके लिए अलग वैधानिक डेडलाइन लागू होगी।
ITR-3 और ITR-4 में क्या है अंतर?
सही फॉर्म का चुनाव करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह मान लेना गलत होगा कि नौकरीपेशा लोगों और फ्रीलांसरों की डेडलाइन हमेशा एक जैसी होती है।
1. यह फॉर्म वे टैक्सपेयर्स भर सकते हैं जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन में आय हो। छोटे कारोबारी/ प्रोफेशनल जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम का लाभ ले रहे हों।
2. प्रॉपर अकाउंट बुक्स (प्रॉफिट-लॉस, बैलेंस शीट आदि) मेंटेन करना जरूरी है। विस्तृत बुक्स रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।
3. इस फॉर्म पर प्रिजम्प्टिव नियम लागू नहीं होते। धारा 44AD, 44ADA, और 44AE के तहत प्रिजम्प्टिव आय घोषित की जाती है।
प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन रूल्स क्या हैं?
प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम (Presumptive taxation scheme) छोटे टैक्सपेयर्स को भारी-भरकम अकाउंट बुक्स मेंटेन करने से राहत देती है। यदि आपका बिजनेस टर्नओवर एक तय सीमा के अंदर है, तो आप अपने कुल टर्नओवर का 6% या 8% अपनी आय मानकर उस पर टैक्स दे सकते हैं। फ्रीलांसर और प्रोफेशनल (डॉक्टर, वकील, आदि) अपनी कुल ग्रॉस रिसीट्स (Gross Receipts) का 50% हिस्सा सीधे अपनी आय घोषित कर सकते हैं।
वेरिफिकेशन और फाइलिंग चेकलिस्ट
रिटर्न फाइल करने से पहले और बाद में किसी भी तकनीकी समस्या या गलती से बचने के लिए, इन महत्वपूर्ण बातों की जांच जरूर कर लें:
1. अपनी आय की प्रकृति के अनुसार जांच लें कि आप पर ITR-3 या ITR-4 में से कौन सा फॉर्म लागू होता है।
2. सबसे पहले ये चेक करें कि आपके टर्नओवर के आधार पर आपके खातों का ऑडिट अनिवार्य है या नहीं।
3. अपनी आय और काटे गए टीडीएस (TDS) का मिलान अपने टैक्स फॉर्म्स से जरूर करें।
4. अपनी सुविधा और टैक्स बचत के अनुसार Old tax regime या New tax regime का चुनाव ध्यान से करें।
5. चुकाए गए एडवांस टैक्स (Advance Tax) और सेल्फ-असेसमेंट टैक्स का फॉर्म में सही उल्लेख करें।
6. ITR सबमिट करने के 30 दिनों के भीतर उसे ई-वेरिफाई जरूर करें, अन्यथा रिटर्न अमान्य हो जाएगा।
