UPI यूजर्स के लिए ये दो बड़ी खबर! ₹2 हजार से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज? साथ में आएगा नया सिक्योरिटी अलर्ट
UPI News: बैंकों ने UPI धोखाधड़ी रोकने के लिए एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत संदिग्ध लेनदेन पर पिन डालने से पहले 'हां/नहीं' का अलर्ट आएगा। इसके सा ...और पढ़ें
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यूपीआई यूजर्स ध्यान दें!
HighLights
संदिग्ध UPI लेनदेन पर 'हां/नहीं' का अलर्ट।
AI और मशीन लर्निंग से जोखिम की पहचान।
धोखाधड़ी रोकने को मिलेगा सोचने का समय।
नई दिल्ली: भारत में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने लेन-देन को जितना आसान बनाया है, जालसाजों (scammers) ने भी ठगी के उतने ही नए तरीके निकाल लिए हैं। लेकिन अब ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों की खैर नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल पेमेंट फ्रॉड (digital payment fraud) पर नकेल कसने के लिए देश के प्रमुख बैंकों ने एक बेहद अहम और कड़ा प्रस्ताव तैयार किया है।
इस प्रपोजल के तहत, अब 'हाई-रिस्क' (High-Risk) यानी संदिग्ध UPI ट्रांजैक्शन करते समय ग्राहकों की स्क्रीन पर सीधे पिन (PIN) डालने का ऑप्शन नहीं आएगा, बल्कि उससे पहले एक 'Yes/No' (हां या ना) का अलर्ट प्रॉम्प्ट स्क्रीन पर फ्लैश होगा।
क्या है बैंकों का 'Yes/No' प्रपोजल?
अभी जब आप UPI से पेमेंट करते हैं, तो अमाउंट डालते ही सीधे UPI PIN डालने का पेज खुल जाता है। जालसाज इसी जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं।
नए प्रस्ताव के मुताबिक, अगर बैंक के सिस्टम को कोई भी ट्रांजैक्शन 'संदिग्ध' (Suspicious) लगता है, तो पैसा कटने से ठीक पहले यूजर की स्क्रीन पर एक अलर्ट मैसेज पॉप-अप होगा। इस मैसेज में पूछा जाएगा "क्या आप वाकई इस व्यक्ति को यह अमाउंट भेजना चाहते हैं?" इसके नीचे Yes और No के दो बड़े ऑप्शन होंगे।
2 हजार रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 4 अगस्त को संसद में 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल' पेश किया। इस बिल का मकसद बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड के लिए MDR लगाने पर लगी मौजूदा रोक को हटाना है।
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इसके तहत ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक की मामूली फीस लग सकती है। जबकि व्यक्ति-से-व्यक्ति (person-to-person) ट्रांजैक्शन को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी अभी भी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि यह शुल्क कैसे लागू किया जा सकता है और इसकी दर या किन ट्रांजैक्शन पर यह लागू होगा, इस बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
कैसे तय होगा कि ट्रांजैक्शन 'हाई-रिस्क' है?
हर पेमेंट पर यह प्रॉम्प्ट नहीं आएगा, ताकि UPI की स्पीड और सहूलियत खत्म न हो। बैंक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके रिस्क की पहचान करेंगे। एक ट्रांजैक्शन इन स्थितियों में हाई-रिस्क माना जाएगा:
1. अगर आप पहली बार किसी ऐसे खाते में बड़ी रकम भेज रहे हैं, जिसकी हिस्ट्री संदिग्ध रही हो।
2. अगर आप आमतौर पर 500-1000 रुपये का पेमेंट करते हैं और अचानक आपके फोन से 50,000 रुपये का ट्रांजैक्शन हो रहा हो।
3. रात के 2 बजे या किसी ऐसे समय पर पेमेंट होना जो आपके सामान्य लेन-देन के पैटर्न से बिल्कुल अलग हो।
4. अगर आपका फोन अचानक किसी दूसरी लोकेशन या शहर से बड़े पेमेंट का कमांड दे रहा हो।
यह नियम क्यों जरूरी था?
आजकल स्कैमर्स स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स, ओएलएक्स (OLX) फ्रॉड, लॉटरी के लालच या 'पैसे रिसीव करने के लिए पिन डालें' जैसी ट्रिक्स का इस्तेमाल करके लोगों के खाते खाली कर रहे हैं। कई बार लोग जल्दबाजी में बिना नाम पढ़े पिन डाल देते हैं। यह 'Yes/No' प्रॉम्प्ट एक तरह का 'स्पीड ब्रेकर' या 'कूलिंग पीरियड' का काम करेगा, जो यूजर को एक सेकंड रुककर सोचने और सामने वाले का नाम (Payee Name) दोबारा चेक करने का मौका देगा।
बैंकों ने इस प्रस्ताव को भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सामने विचार के लिए रखा है। अगर इसे हरी झंडी मिल जाती है, तो Google Pay, PhonePe, Paytm और बैंकों के खुद के ऐप्स पर यह फीचर जल्द ही रोलआउट कर दिया जाएगा।