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NPS Vs VPF: रिटायरमेंट प्लानिंग से पहले जान लें कौन सा विकल्प है आपके लिए बेस्ट, मुनाफे और टैक्स का पूरा गणित

Updated: Wed, 19 Aug 2026 03:34 PM (IST)

NPS Vs VPF: रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए VPF और NPS दो प्रमुख विकल्प हैं। यह लेख दोनों की विशेषताओं, रिटर्न ...और पढ़ें

एनपीएस या वीपीएस

एनपीएस या वीपीएस

HighLights

  1. VPF: ईपीएफ का विस्तार, 8.25% ब्याज, 100% सरकारी सुरक्षा।

  2. NPS: बाजार से जुड़ा, उच्च रिटर्न, अतिरिक्त टैक्स छूट।

  3. सही विकल्प: जोखिम, रिटर्न, टैक्स लाभ देखकर बुद्धिमानी से चुनें।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: बुढ़ापे को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने और रिटायरमेंट (retirement planning) के बाद एक सुकून भरी जिंदगी जीने के लिए सही जगह निवेश करना बहुत जरूरी है। जब भी रिटायरमेंट सेविंग्स की बात आती है, तो वेतनभोगी लोगों के सामने 2 सबसे बड़े और लोकप्रिय विकल्प होते है- वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)।

वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF)

VPF असल में आपके मौजूदा EPF (Employee Provident Fund) का ही एक विस्तार है। ईपीएफ में आपकी बेसिक सैलरी का 12% कटता है, लेकिन अगर आप चाहें तो अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 100% तक VPF में स्वेच्छा से जमा कर सकते हैं।

1. इसमें आपको EPF वाली ही ब्याज दर मिलती है, जो फिलहाल 8.25% सालाना तया है।
2. यह पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा समर्थित है, इसलिए आपका पैसा 100% सुरक्षित रहता है। इसमें मार्केट का कोई जोखिम नहीं है।
3. इसका फायदा सिर्फ नौकरीपेशा कर्मचारी ही उठा सकते हैं, व्यापारी या सेल्फ एम्प्लॉयड नहीं।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)

NPS (National Pension System) एक सरकार समर्थित लेकिन मार्केट-लिक्ंड पेंशन स्कीम है। इसे PERDA द्वारा रेगुलेट किया जाता है। इसमें आपका पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड और सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है।

1, क्योंकि यह मार्केट से जुड़ा है, इसलिए लॉन्ग-टर्म में यह VPF के मुकाबले ज्यादा रिटर्न दे सकता है।
2. 18 से 70 साल का कोई भी भारतीय नागरिक इसमें निवेश कर सकता है।
3. 60 साल की उम्र होने पर आप 60% पैसा एकमुश्त निकाल सकते हैं। लेकिन बाकी 40% पैसे से आपको जीवन भर की पेंशन के लिए एन्युटी प्लान खरीदना अनिवार्य होता है।

टैक्स बचाने में कौन है आगे?

VPF में किए गए निवेश पर आपको इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। अगर एक वित्तीय वर्ष में आपका EPF और VPF का कुल योगदान 2.5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है, तो उस अतिरिक्त जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज पर आपको अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा।

NPS में निवेश करके आप सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये की छूट तो ले ही सकते हैं। इसे साथ ही NPS आपको सेक्शन 80CCD के तहत 50,000 रुपये का अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन देता है।

आपको क्या चुनना चाहिए?

अगर आप सिर्फ नौकरीपेशा है, शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहना चाहते हैं और आपको रातों को सुकून की नींद के साथ फिक्स्ड गारंटीड रिटर्न चाहिए, तो बिना सोचे VPF को चुनें। वहीं अगर आपकी उम्र कम है, आप थोड़ा जोखिम उठा सकते हैं, महंगाई को मात देने वाला हाई रिटर्न चाहते हैं और हर साल अतिरिक्त 50,000 रुपये का टैक्स बचाना चाहते हैं, तो NPS आपके लिए एक 'ब्रह्मास्त्र' साबित हो सकता है।

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