RBI ECL Rule: देश के 62% लोगों को नहीं मिलेगा लोन? सिबिल स्कोर पर RBI का ये नियम जान लें, वरना होगी दिक्कत
भारतीय रिजर्व बैंक का नया 'ईसीएल डायरेक्शन-2026' नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा, जिससे बैंकों द्वारा लोन देने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। यह नियम कम ...और पढ़ें

RBI ECL Rule 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा RBI का नया नियम, लोन लेने के लिए अब चाहिए होगा कितना सिबिल स्कोर? (AI Generated Image)
HighLights
RBI का नया ECL नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू।
कम सिबिल स्कोर वालों को लोन मिलना होगा मुश्किल।
बैंक अब जोखिम का पहले से करेंगे आकलन।
नई दिल्ली। यदि आप आने वाले समय में नया घर (Home Loan), गाड़ी (Auto Loan) या बच्चों की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लेने की सोच रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए सबसे जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकों के लिए एक नया नियम लेकर आ रहा है, जिसका नाम है ‘ईसीएल डायरेक्शन-2026’ (Expected Credit Loss)।
ये नियम 1 अप्रैल 2027 से पूरे देश में लागू होने जा रहा है। इस नियम के आते ही बैंकिंग सेक्टर में लोन देने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि ये नियम क्या है और आम जनता पर इसका क्या असर होने वाला है।
क्या है RBI का नया ECL नियम?
अभी की व्यवस्था देखी जाए तो बैंक तब जागते हैं जब कोई लोन पूरी तरह डूब जाता है या ग्राहक लगातार 90 दिनों तक किश्त (EMI) नहीं चुकाता। इसे एनपीए (NPA - Non-Performing Asset) कहा जाता है, जिसके बाद बैंक उस नुकसान की भरपाई के लिए अपनी जेब से कुछ पैसा अलग रखते हैं। लेकिन नए नियम के आने के बाद सबकुछ बदल जाएगा।
नए नियम में क्या बदलेगा?
नया ECL नियम कहता है कि बैंकों को लोन डूबने का इंतजार नहीं करना है। उन्हें पहले से ही अंदाजा लगाना होगा कि भविष्य में कौन सा लोन डूब सकता है और जोखिम के हिसाब से पहले ही अपनी जेब से बड़ी रकम अलग रखनी होगी। दो किश्तें चूकने पर बैंकों को पहले के मुकाबले 12 गुना तक ज्यादा रकम अलग रखनी पड़ सकती है। अलग रखने का मतलब है कि ये पैसा बैंकों के मुख्य बिजनेस से बाहर हो जाएगा, जिससे देश के बैंकों का मुनाफा करीब 42,000 करोड़ रुपये कम हो सकता है।
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आरबीआई ने सभी तरह की अवधि के लिए नियम बदले हैं, जिससे बैंकों के साथ-साथ अब लोन लेने वाले पर भी असर पड़ेगा।
| किस्त कितने दिन लेट हुई | अभी बैंक कितना पैसा अलग रखते हैं | नए नियम के बाद कितना रखना होगा |
| 1 से 30 दिन लेट होने पर | ₹10,000 | ₹25,000 |
| 31 से 60 दिन लेट होने पर | ₹10,000 | ₹1.25 लाख (सीधे 12 गुना ज्यादा!) |
| 91 दिन से ज्यादा (NPA) होने पर | ₹3.75 लाख (15%) | ₹5.00 लाख |
730 से कम सिबिल स्कोर वालों पर क्या असर होगा?
चिंता की बात ये है कि हमारे देश में लोन के लिए अप्लाई करने वाले करीब 62% लोगों का सिबिल स्कोर 730 से कम है। नए नियमों के बाद इन लोगों के लिए लोन लेना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा, क्योंकि नए नियम के लागू होने के बाद से बैंक सिर्फ 730 से ऊपर सिबिल स्कोर वालों को प्राथमिकता देंगे, और कम सिबिल वालों को ज्यादा ब्याज दर पर लोन देंगे या फिर उनसे ज्यादा कोलेट्रल यानी कि गारंटी मागेंगे।
जब कभी बैंक को लगेगा कि ग्राहक का सिबिल स्कोर कम है और डिफॉल्ट होने का खतरा है बैंक कुछ कमद उठा सकते हैं , जैसे कि-
- बैंक कमजोर प्रोफाइल वाले लोगों के लोन एप्लिकेशन को सीधे रिजेक्ट कर सकते हैं।
- अगर बैंक लोन पास भी करेंगे, तो रिस्क कवर करने के लिए ब्याज दरें (Interest Rates) काफी बढ़ा देंगे।
- बैंक आपसे ज्यादा कोलेट्रल (जैसे कोई प्रॉपर्टी, सोना या गारंटर) की मांग कर सकते हैं।
बैंक कैसे लगाएंगे जोखिम का अनुमान?
लोन देने से पहले बैंक केवल आपकी मौजूदा सैलरी नहीं देखेंगे, बल्कि ECL फ्रेमवर्क के तहत इन 6 कड़े पैमानों पर आपको परखेंगे:
- भुगतान का रिकॉर्ड: क्या आपने पहले कभी कोई बिल या ईएमआई लेट की है?
- CIBIL स्कोर का उतार-चढ़ाव: पिछले कुछ महीनों में आपका स्कोर घटा है या बढ़ा है?
- आय में अस्थिरता: आपकी कमाई पक्की है या इसमें उतार-चढ़ाव रहता है?
- नौकरी जाने का खतरा: आप जिस सेक्टर या कंपनी में काम करते हैं, वो कितनी सुरक्षित है?
- लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो: आप जो संपत्ति खरीद रहे हैं, उसकी कीमत के मुकाबले कितना लोन मांग रहे हैं।
- मौजूदा कर्ज: आप पर पहले से कितने लोन या क्रेडिट कार्ड के बिल चल रहे हैं।
बैंक अब देश के उन 38% प्रीमियम ग्राहकों को लुभाने में जुटेंगे जिनका सिबिल स्कोर 730 या उससे ज्यादा है। देश में ऐसे करीब 7 करोड़ ग्राहक हैं। जिन लोगों का स्कोर अच्छा होगा, बैंक उन्हें सस्ती ब्याज दरों पर और बहुत आसान शर्तों पर लोन ऑफर करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ये नियम भारतीय बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए बहुत अच्छा है, लेकिन आम ग्राहकों के लिए अब सतर्क होने का समय आ गया है।