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    Ola के फाउंडर भाविश अग्रवाल को मिली बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत, नहीं होगी गिरफ्तारी; शेयर में लौटी चमक

    Updated: Wed, 18 Feb 2026 09:19 AM (IST)

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric Share Price) के सीईओ भाविश अग्रवाल के खिलाफ साउथ गोवा कंज्यूमर कमीशन द्वारा जारी डिटेंशन ऑर्डर और वार ...और पढ़ें

    ओला के फाउंडर को मिली हाई कोर्ट से राहत

    ओला के फाउंडर को मिली हाई कोर्ट से राहत

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (Ola Share Price) के फाउंडर और CEO भाविश अग्रवाल (Bhavish Aggarwal) के खिलाफ साउथ गोवा कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन द्वारा जारी डिटेंशन ऑर्डर और वारंट पर रोक लगा दी। बता दें कि कंज्यूमर कमीशन ने अग्रवाल के खिलाफ बेलेबल वारंट जारी किया था। कमीनशन ने कहा था कि पहले से नोटिस दिए जाने के बावजूद अग्रवाल पेश नहीं हुए। जब मामला बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने आया, तो कोर्ट ने कमीशन को नोटिस जारी किया और कहा कि पहली नजर में लगता है कि ऐसा वारंट जारी करके उसने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है।

    हाई कोर्ट ने क्या कहा?

    हाई कोर्ट ने कहा, “कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट की स्कीम को देखने पर, जब मुआवजा देने का ऑर्डर पास हो जाता है और उसे एक्ट के सेक्शन 71 के तहत लागू करने की कोशिश की जाती है, तभी स्टेट कमीशन को एक्ट के सेक्शन 71 के तहत सिविल कोर्ट की तरह अपने ऑर्डर को लागू करने के लिए डिटेंशन वारंट जारी करने की पावर मिलती है।”
    कोर्ट ने आगे कहा, “कंज्यूमर फोरम या कमीशन के सामने किसी विवाद में किसी भी पार्टी को शिकायत की सुनवाई के दौरान ऐसा वारंट जारी करने की कोई पावर नहीं है”।

    ओला ने जारी किया बयान

    कोर्ट से राहत मिलने के बाद, ओला ने एक बयान जारी किया और कहा कि हाई कोर्ट ने नोटिस किया कि डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन ने वारंट जारी करते समय कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत अपनी शक्तियों से बाहर जाकर काम किया।
    कंपनी ने कहा, “माननीय हाई कोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन, साउथ गोवा द्वारा जारी वारंट पर रोक लगा दी है। इसके अलावा, माननीय कोर्ट ने पाया कि कमीशन ने वारंट जारी करके कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया है”।

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला प्रीतेश चंद्रकांत घाडी की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने ओला S1 प्रो सेकंड जेन स्कूटर में रिपेयर के बाद भी दिक्कतों के बारे में शिकायत की थी। शिकायतकर्ता ने ₹1.47 लाख के रिफंड के साथ-साथ परेशानी और मानसिक परेशानी के लिए ₹50,000 मांगे हैं।

    खबरें और भी

    शेयर में लगातार गिरावट

    • इधर Ola के शेयर में लगातार गिरावट जारी है। हालांकि बुधवार को प्री-ओपनिंग में भी ये 2 फीसदी ऊपर है
    • बीते एक हफ्ते में ये 11 फीसदी से अधिक फिसला है
    • एक महीने में शेयर का निगेटिव रिटर्न 24.25 फीसदी रहा है
    • 3 महीनों में ये शेयर 34 फीसदी से अधिक नीचे आया है
    • 6 महीनों में शेयर 35 फीसदी फिसला है

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    (डिस्क्लेमर: यहां शेयर की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)