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HDFC Bank ने 3 टॉप एक्जीक्यूटिव्स को नौकरी से निकाला, इस वजह से गिरी गाज; बाजार खुलते ही शेयरों पर दिखेगा असर?

Updated: Fri, 20 Mar 2026 04:58 PM (IST)

HDFC बैंक ने क्रेडिट सुइस के एडिशनल टियर-1 (AT1) बॉन्ड की गलत बिक्री में कथित संलिप्तता के आरोप में ब्रांच ...और पढ़ें

HDFC Bank ने 3 टॉप एक्जीक्यूटिव्स को नौकरी से निकाला, इस वजह से गिरी गाज; बाजार खुलते ही शेयरों पर दिखेगा असर?

HDFC Bank ने 3 टॉप एक्जीक्यूटिव्स को नौकरी से निकाला, इस वजह से गिरी गाज; बाजार खुलते ही शेयरों पर दिखेगा असर?

HighLights

  1. HDFC बैंक ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को नौकरी से निकाला।

  2. क्रेडिट सुइस AT1 बॉन्ड की गलत बिक्री का आरोप लगा।

  3. बैंक के शेयरों पर 2.15% की गिरावट दर्ज की गई।

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक ने ब्रांच बैंकिंग के ग्रुप हेड संपत कुमार और दो अन्य सीनियर एग्जीक्यूटिव को Credit Suisse के एडिशनल टियर-1 (AT1) बॉन्ड की गलत बिक्री में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया है। इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो लोगों ने यह बात बताई।

इस खबर का असर सोमवार को बाजार खुलने पर एचडीएफसी बैंक के शेयरों पर दिख सकता है। आज यानी 20 मार्च को एचडीएफसी बैंक के शेयर (HDFC Bank Share) 2.15 % गिरकर 781 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था।

HDFC Bank ने जिन दो अन्य अधिकारियों को सेवामुक्त किया गया है, उनमें हर्ष गुप्ता (एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, मध्य पूर्व, अफ्रीका और NRI ऑनशोर बिजनेस) और पायल मंध्यान (सीनियर वाइस प्रेसिडेंट) शामिल हैं।

पिछले साल सस्पेंड हुए थे दो अधिकार

हर्ष गुप्ता और पायल मंध्यान को पिछले साल जनवरी में बैंक से सस्पेंड कर दिया गया था, जब तक कि दुबई ब्रांच में डेट इन्वेस्टमेंट की कथित मिस-सेलिंग की जांच के नतीजे नहीं आ जाते।

बैंक के AT-1 खरीदारों  जिनमें से ज्यादातर NRI (अनिवासी भारतीय) मूल के थे ने आरोप लगाया था कि बैंक के अधिकारियों ने उन्हें धोखा देकर उनके FCNR (विदेशी मुद्रा अनिवासी) डिपॉजिट को भारत से बहरीन में ट्रांसफर करवा लिया।

एक AT-1 बॉन्डहोल्डर ने कहा, "बहरीन ब्रांच में, उन्होंने हमें यकीन दिलाया कि वे फिक्स्ड-मैच्योरिटी वाले, पक्का रिटर्न देने वाले बॉन्ड बेच रहे हैं। उन्होंने मुझसे एक कोरे कागज पर दस्तखत करवा लिए।"

बैंक के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने Credit Suisse के AT-1 बॉन्ड जो असल में हमेशा के लिए होते हैं को गलत तरीके से फिक्स्ड-मैच्योरिटी वाले बॉन्ड बताकर बेच दिया।

$20 अरब के इन AT-1 बॉन्ड को शुरू में Credit Suisse के बेलआउट पैकेज के हिस्से के तौर पर बट्टे खाते में डाल दिया गया था। हालाँकि, स्विस फ़ेडरल एडमिनिस्ट्रेटिव कोर्ट ने इस फैसले को "गैर-कानूनी" करार दिया; इस फ़ैसले के खिलाफ़ FINMA और UBS अभी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रहे हैं।

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(डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट और एक्सपर्ट की राय पर आधारित है, यह किसी भी तरह से निवेश की सलाह नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)