India US Trade Deal: अमेरिकी अधिकारी ने भारत को बताया 'मुश्किल चुनौती', कृषि बाजार सुरक्षा पर अड़ी नई दिल्ली
India US Trade Deal: अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत में भारत को 'मुश्किल चुनौती' बताया, खासकर कृषि ...और पढ़ें
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ट्रेड डील के मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारी ने भारत को बताया 'मुश्किल चुनौती'
HighLights
अमेरिकी अधिकारी ने भारत को व्यापार वार्ता में 'मुश्किल चुनौती' कहा।
भारत अपने कृषि बाजारों को सुरक्षित रखने पर अड़ा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से व्यापार समझौते की रूपरेखा बदली।
नई दिल्ली। India US Trade Deal: व्यापार समझौते पर बातचीत करने भारत का प्रतिनिधि मंडल 3 दिवसीय यात्रा पर अमेरिका गया है। बुधवार को तीन दिवसीय वार्ता बुधवार को संपन्न हुई। इस दौरान अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि भारत के मुश्किल चुनौती है। भारत को राजी करना बहुत ही कठिन है। दरअसल, अमेरिका और भारत व्यापार समझौते को लेकर अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बन भी गई है। हालांकि, अमेरिकी अदालत ने जब ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था उसके बाद दोनों देशों के बीच हुई सहमति पर फिर से विचार किए जाने की गुंजाइश पनपी थी। यही कारण है कि अब भारत अपनी शर्तों पर इस व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना चाहता है।
भारत अपने बाजार को सुरक्षित रखना चाहता है- जेमिसन ग्रीर
वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन के नेतृत्व वाले 12-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने, दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक USTR ब्रैंडन लिंच के नेतृत्व वाली अमेरिकी टीम के साथ व्यापार समझौते (India US Trade Deal) के बारीक पहलुओं पर बातचीत की।
इस बातचीत को लेकर अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा, "भारत एक बहुत ही मुश्किल चुनौती है... उन्होंने बहुत लंबे समय से अपने कृषि बाजारों को सुरक्षित रखा है। इस डील के तहत, वे इनमें से बहुत सी चीजों को सुरक्षित रखना चाहते हैं। हालांकि, कुछ ऐसी चीजें भी हैं, जिन पर मुझे लगता है कि हम आपसी सहमति बना सकते हैं। DDGs (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स) इसका एक अच्छा उदाहरण है।"
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ग्रीर सांसदों के उन सवालों का जवाब दे रहे थे जो DDGs (जिनका इस्तेमाल ज्यादा प्रोटीन वाले पशु आहार के तौर पर होता है), सोयाबीन मील और इथेनॉल के निर्यात से जुड़े थे।
ग्रीर ने कहा कि भारतीय व्यापार वार्ताकार इस हफ्ते शहर में हैं। इसलिए हम इस हफ्ते इन मुद्दों पर बात कर रहे हैं, जिनमें वे खास चीजें भी शामिल हैं जिनके बारे में आपने बात की थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने बदला गेम
भारत और अमेरिका ने 2 फरवरी को द्विपक्षीय व्यापार समझौते के ढांचे की घोषणा की और 7 फरवरी को इस समझौते का मसौदा जारी किया।
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार इस समझौते के तहत भारत अमेरिकी बाजारों में तरजीही पहुंच चाहता है। दोनों देशों ने 2030 तक 500 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
उस रूपरेखा के अनुसार, अमेरिका भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हो गया था। उसने रूसी तेल खरीदने के लिए भारतीय सामानों पर लगने वाले 25 प्रतिशत टैरिफ को हटा दिया था, और इस समझौते के तहत बाकी बचे 25 प्रतिशत को घटाकर 18 प्रतिशत करना था।
लेकिन 20 फरवरी को, US सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के 'रेसिप्रोकल टैरिफ' (पारस्परिक शुल्क) के खिलाफ फैसला सुनाया, जिन्हें 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत लगाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद, भारत इस समझौते को फिर से व्यवस्थित और तैयार करने की कोशिश कर रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नए वैश्विक टैरिफ ढांचे के तहत उसके हितों की रक्षा हो सके।