सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Explained: सुपरहिट IPO का 'डार्क सीक्रेट'! कंपनी अंदर से कमजोर, तो क्या फंस गए आप? जानें ऐसे शेयरों का क्या करें

Updated: Wed, 26 Aug 2026 03:51 PM (IST)

शेयर बाजार में आईपीओ की बंपर सब्सक्रिप्शन हमेशा अच्छे निवेश की गारंटी नहीं होती। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, ...और पढ़ें

IPO को लेकर है कंफ्यूजन? (AI फोटो)

IPO को लेकर है कंफ्यूजन? (AI फोटो)

HighLights

  1. उच्च सब्सक्रिप्शन हमेशा मजबूत कंपनी की निशानी नहीं होती

  2. निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, मुनाफे का आकलन करें

  3. कमजोर वित्तीय स्थिति वाले आईपीओ में निवेश से बचें, तुरंत निकलें

नई दिल्ली। शेयर बाजार में अकसर ऐसा होता है कि जब किसी कंपनी का IPO खुलते ही निवेशक उस पर टूट पड़ते हैं। सब्सक्रिप्शन कई गुना होता है और लिस्टिंग से पहले ही शेयर को लेकर जबरदस्त उत्साह बन जाता है। लेकिन दमदार IPO और मजबूत कारोबार हमेशा एक ही चीज नहीं होते।
अगर कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति कमजोर है, मुनाफा लगातार दबाव में है या कैश फ्लो ठीक नहीं है, तो सिर्फ IPO का सुपरहिट होना निवेश के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता। ऐसे में आपको क्या करना चाहिए, आइए बताते हैं।

सब्सक्रिप्शन डेटा पूरी कहानी नहीं

किसी IPO को कई गुना सब्सक्रिप्शन मिलने का मतलब यह नहीं कि कंपनी मजबूत है। सब्सक्रिप्शन मार्केट में डिमांड और उस समय निवेशकों के उत्साह को दिखाता है। इसमें संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी, कंपनी का सेक्टर, बाजार का माहौल और शेयर की कीमत जैसे कई फैक्टर्स शामिल हो सकते हैं।
इसलिए निवेशक को केवल यह देखकर फैसला नहीं करना चाहिए कि IPO कितना सब्सक्राइब हुआ। असली सवाल यह है कि कंपनी अपने कारोबार से कितना पैसा कमा रही है और फ्यूचर में उस कमाई को बढ़ाने की उसकी क्षमता कितनी है।

कमजोर मुनाफे का मतलब अनिश्चितता

अगर किसी कंपनी का मुनाफा लगातार कम बना हुआ, घट रहा है या कंपनी घाटे में है, तो उसके शेयर का वैल्यूएशन ज्यादा मुश्किल हो जाता है। ऐसी कंपनियों के मामले में निवेशकों की उम्मीदें अक्सर फ्यूचर की तेज ग्रोथ पर टिकी होती हैं।
लेकिन अगर अनुमान के मुताबिक रेवेन्यू या मुनाफा नहीं बढ़ा, तो शेयर दबाव में आ सकता है।

महंगा वैल्यूएशन सबसे बड़ा खतरा

कमाई कम होने के बावजूद अगर IPO बहुत ऊंचे वैल्यूएशन पर आता है, तो निवेशक के लिए जोखिम और बढ़ जाता है। मान लीजिए कंपनी की कमाई अभी कम है, लेकिन बाजार उसे फ्यूचर की शानदार ग्रोथ के आधार पर बहुत हाई वैल्यूएशन पर आंकता है। अब यदि ग्रोथ उम्मीद से धीमी रही, तो वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आ सकती है। ऐसे कई मामले देखे गए हैं।

जरूरी सवाल - IPO का पैसा कहां जाएगा?

निवेशक को यह भी देखना चाहिए कि IPO से जुटाई गई रकम कंपनी किस काम में लगाएगी। अगर पैसा कारोबार बढ़ाने, क्षमता बढ़ाने या कर्ज घटाने में इस्तेमाल होना है, तो उसका संभावित असर अलग होगा। लेकिन केवल पुराने शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचने यानी ऑफर फॉर सेल के जरिए पैसा जुटाया जा रहा है, तो कंपनी को उस हिस्से से सीधे नया पैसा नहीं मिलता।
इसलिए IPO का साइज देखकर ये भी चेक करें कि पैसा किसे मिलेगा।

लिस्टिंग के बाद असली परीक्षा

IPO का सुपरहिट होना शुरुआत है, मगर ये सफलता की गारंटी नहीं। लिस्टिंग के बाद शेयर खुले बाजार में कारोबार करता है और वहां कंपनी के असल प्रदर्शन के साथ निवेशकों की उम्मीदों की भी परीक्षा होती है। अगर तिमाही नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आते, बिक्री की रफ्तार घटती है, मार्जिन कम होता है या कैश फ्लो कमजोर रहता है, तो बाजार का उत्साह तेजी से ठंडा पड़ जाता है।

निवेशक क्या करें?

जानकारों का मानना है कि यदि किसी कंपनी का आईपीओ हिट और फाइनेंशियल कमजोर, तो ऐसे शेयर से बचना बेहतर है। यदि आपको ऐसे आईपीओ में शेयर अलॉट हों, तो उससे निकल जाएं और लॉन्ग टर्म का वेट न करें।

ये भी पढ़ें - इस पेनी स्टॉक में लगा 20 फीसदी का अपर सर्किट, अमेरिका तक एक्सपोर्ट करती है कंपनी; स्टॉक का दाम ₹6

"शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।"

(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)