सुभाष चंद्रा के दिवालिया मामले में नया मोड़, NCLT के 6.5 करोड़ वाले 'रीपेमेंट प्लान' को चुनौती देंगे प्रमुख बैंक
सार्वजनिक क्षेत्र के एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के ...और पढ़ें

सुभाष चंद्रा के दिवालिया मामले में नया मोड़
HighLights
सार्वजनिक बैंक सुभाष चंद्रा की दिवालियापन योजना को चुनौती देंगे
एनसीएलटी ने 22,000 करोड़ के दावों पर 6.5 करोड़ की मंजूरी दी
एलआईसी हाउसिंग, केनरा, यूनियन बैंक एनसीएलएटी जाएंगे
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के कर्ज देने वाले प्रमुख संस्थानों एलआइसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक आफ इंडिया ने शनिवार को कहा कि वे एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा मंजूर 6.5 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना को चुनौती देंगे। इसके लिए वे नेशनल कंपनी ला अपीलेंट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) का रुख करेंगे।
किया था रीपेमेंट प्लान का विरोध
इन तीनों पीएसयू (पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग) के पास चंद्रा की दिवालियापन कार्यवाही में कुल 8.45 प्रतिशत मतदान हिस्सेदारी थी। उन्होंने पुनर्भुगतान योजना (रीपेमेंट प्लान) का विरोध किया था और इसके खिलाफ मतदान किया।
हालांकि, अन्य वित्तीय लेनदारों के समर्थन में पड़े वोटों के कारण योजना को मंजूरी मिल गई। इन लेनदारों की संयुक्त मतदान हिस्सेदारी 80.81 प्रतिशत थी।
एनसीएलटी के आदेश को चुनौती की तैयारी
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने कहा कि वह अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के साथ तुरंत एनसीएलएटी में अपील दाखिल करेगी। वहीं, केनरा बैंक ने बताया कि उसने 6.25 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना का विरोध किया था और अब एनसीएलटी के आदेश को चुनौती देगा।
केनरा बैंक के पास 1.60 प्रतिशत मतदान हिस्सेदारी थी जबकि यूनियन बैंक आफ इंडिया और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के पास क्रमशः 0.76 प्रतिशत और 6.09 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।
फारेंसिक ऑडिट की मांग
केनरा बैंक ने मामले में फारेंसिक ऑडिट की मांग भी की थी, लेकिन कम मतदान हिस्सेदारी के कारण उसका प्रस्ताव मंजूर नहीं हो सका।एनसीएलटी ने चंद्रा को 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के स्वीकृत दावों के निपटारे के लिए केवल 6.50 करोड़ रुपये का भुगतान करने की अनुमति दी है।
इस बीच, निजी क्षेत्र का एचडीएफसी बैंक भी एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहा है। बैंक ने कहा है कि उसके कुल दावे में से केवल 3.2 प्रतिशत राशि ही एनसीएलटी के आदेश के तहत स्वीकार की गई है।
