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    'SEBI ने की है गलती, हमने नहीं'...राजेश एक्सपोर्ट्स के फाउंडर ने दी सफाई; शेयर के फिर से चढ़ने का जताया भरोसा!

    By Jagran BusinessEdited By: Kashid Hussain
    Updated: Mon, 08 Jun 2026 10:04 AM (IST)

    राजेश एक्सपोर्ट्स ने सेबी के राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप को 'अकाउंटिंग एरर' बताया है, कहा कि सेबी ने EBITDA को राजस्व मान लिया। कंपनी ने 300-400 ...और पढ़ें

    राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर में लगा अपर सर्किट

    राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर में लगा अपर सर्किट

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    भाषा, नई दिल्ली। सोना रिफाइनिंग और ज्वैलरी बनाने वाली कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स ने रविवार को कहा कि वह बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को पहले ही 300 से 400 गीगाबाइट (जीबी) के दस्तावेज सौंप चुकी है। कंपनी का मानना है कि सेबी सही फाइलों को ढूंढ नहीं पाया है। कंपनी ने कहा कि वह इस मामले को सुलझाने के लिए मांगे गए सभी दस्तावेज 15 दिनों के भीतर फिर से जमा करेगी। कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन राजेश मेहता ने कहा कि सेबी का तीन जून का अंतरिम आदेश, जिसमें वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू ग्रोथ का आरोप लगाया गया है, एक बुनियादी अकाउंटिंग एरर पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सेबी ने कंपनी की टैक्स से पहले की कमाई (ईबीआईटीडीए) को रेवेन्यू मान लिया है।

    कहां हो गई चूक?

    राजेश ने कहा, “हमने उन्हें 300-400 जीबी के दस्तावेज दिए थे, जो लाखों पन्नों में हैं। मुझे लगता है कि वे सही दस्तावेज ढूंढ़ नहीं पाए। पूरी गड़बड़ी वहीं हुई है।” उन्होंने कहा, “उन्होंने EBITDA को रेवेन्यू मान लिया है। EBITDA यानी ग्रॉस प्रॉफिट होता है। उन्होंने EBITDA को रेवेन्यू मान लिया है। इस संख्या (15.15 लाख करोड़ रुपये) को देखते हुए उन्होंने एक बड़ी गलती की है।”

    उदाहरण से समझाई बात

    मेहता ने कथित गलती को समझाने के लिए आभूषण दुकान का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि राजेश एक्सपोर्ट्स जैसे बड़े और कम मुनाफे वाले सोने के कारोबार में अगर कोई ग्राहक दो ग्राम सोना 30,000 रुपये में खरीदता है, तो वह 30,000 रुपये ही कंपनी का राजस्व (बिक्री आय) होता है। उस लेन-देन पर 1,000 रुपये का सकल लाभ (ग्रॉस प्रॉफिट) होता है, जबकि शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) 500 रुपये होता है।
    उन्होंने आरोप लगाया कि सेबी ने 30,000 रुपये के वास्तविक रेवेन्यू के बजाय 1,000 रुपये के ग्रॉस प्रॉफिट को रेवेन्यू के रूप में दर्ज कर लिया। उन्होंने कहा, “सेबी ने 500 रुपये के नेट प्रॉफिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है, वह इसे स्वीकार करते हैं। लेकिन वह 1,000 रुपये के EBITDA को रेवेन्यू मानकर उसे गलत तरीके से दिखा रहा है।”

    'पूरी तरह से गलतफहमी का मामला'

    राजेश ने कहा, “यह पूरी तरह से गलतफहमी का मामला है।” उन्होंने यह भी कहा कि सेबी के अपने अंतरिम आदेश में सावधानीपूर्ण भाषा का उपयोग किया गया है। उन्होंने बताया, “उसने (सेबी ने) खुद कहा है कि हम मानते हैं, हमें संदेह है कि यह उनका व्यवसाय है। इसलिए इसे स्पष्ट करने की जरूरत है। मूल रूप से यह उतना कठोर मामला नहीं है, जितना इसे प्रस्तुत किया गया है।”
    राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप पर मेहता ने कहा कि ऐसी हेरफेर का किसी भी कंपनी के लिए कोई फायदा नहीं होता। उन्होंने कहा, “कोई भी कंपनी अपने रेवेन्यू को नहीं बढ़ाएगी। अगर कोई कुछ बढ़ाना चाहता है तो वह अपने मुनाफे (बॉटम लाइन) को बढ़ाएगा, ताकि उसे फायदा मिल सके। अगर टॉप लाइन यानी रेवेन्यू को बढ़ाने का आरोप लगाया गया है, तो उसका किसी को कोई लाभ नहीं होता।”

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    मेहता ने कहा कि कंपनी ने कोई गलत काम नहीं किया है। उन्होंने कहा कि कंपनी के सभी खाते पूरी तरह साफ और पारदर्शी हैं। मेहता ने भरोसा जताया कि यदि अभी नहीं तो बहुत जल्द ही कंपनी के शेयर फिर से अपनी पुरानी ऊंचाई पर पहुंच जाएंगे।

    आज फिर लगा लोअर सर्किट

    हालांकि राजेश मेहता की सफाई के बावजूद राजेश एक्स्पोर्ट्स के शेयर में आज फिर से लोअर सर्किट लग गया है। कंपनी का शेयर BSE पर 99.45 रुपये के पिछले क्लोजिंग लेवल के मुकाबले सीधे 4.98 फीसदी टूटकर 94.50 रुपये पर खुला है।

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    (डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)