सर्च करे
Home
फोकस

Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Tata Sons IPO में आ रहे थे रोड़े, इसलिए अब RBI बदलने जा रहा है सिस्टम, 'न्यू NBFC फ्रेमवर्क' लाने की तैयारी

    Updated: Wed, 08 Apr 2026 05:41 PM (IST)

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की है कि केंद्रीय बैंक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए एक नया ढांचा लाएगा ...और पढ़ें

    News Article Hero Image
    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    भाषा, नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि टाटा संस की सूचीबद्धता के मुद्दे पर बनी अस्पष्टता के बीच मौद्रिक प्राधिकरण गैर-बैंकिंग ऋणदाताओं के लिए एक नया ढांचा लेकर आएगा। मल्होत्रा ने नीतिगत समीक्षा के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से कहा, ‘‘हम एनबीएफसी के लिए एक नया ढांचा ला रहे हैं। बहुत जल्द, हम इसे लाएंगे।’’

    टाटा संस से जुड़े एक सवाल पर मल्होत्रा ने क्या कहा?

    टाटा संस से जुड़े एक सवाल पर मल्होत्रा ने कहा कि नया ढांचा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को श्रेणीबद्ध करेगा। हालांकि, उन्होंने इस मामले पर अधिक विस्तार से जानकारी नहीं दी। इस मुद्दे पर बाजार की गहरी नजर है, क्योंकि आरबीआई को यह तय करना है कि नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाले इस समूह की होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' निजी बनी रहेगी या उसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के लिए मजबूर किया जाएगा।

    यह भी पढ़ें: 'भारत में ऐसी 3-4 कंपनियां खड़ी करो', वेदांता वाले अनिल अग्रवाल की चेतावनी; दिया ₹2.30 लाख करोड़ का तगड़ा फॉर्मूला!

    आरबीआई के मौजूदा नियम क्या हैं?

    आरबीआई के मौजूदा नियमों के अनुसार ‘मुख्य रूप से एक निवेश कंपनी’ होने के नाते टाटा संस को पिछले साल 30 सितंबर तक सूचीबद्ध हो जाना चाहिए था। टाटा संस को छोड़कर अन्य सभी संस्थाओं ने इस प्रावधान का पालन किया है। इससे पहले मल्होत्रा ने कहा था कि कोई भी इकाई तब तक अपना कारोबार जारी रख सकती है, जब तक उसका लाइसेंस रद्द न हो जाए। अनिवार्य सूचीबद्धता की समय सीमा बीत जाने के बावजूद उन्होंने इस पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से टाटा संस पर खुलासे से संबंधित कई अनुपालन बोझ बढ़ जाएंगे। विशेषज्ञों का तर्क है कि इस विविध कॉरपोरेट समूह के लिए इन शर्तों का पालन करना कठिन हो सकता है, क्योंकि इसका कारोबार विभिन्न स्तरों और क्षेत्रों में फैले हुआ है। भाषा पाण्डेय अजयअजय