चीनी की कीमतों में उछाल ने बढ़ाई शुगर स्टॉक्स की मिठास, 13% तक उछले भाव; कौन बना बाजार का बादशाह?
चीनी की रिकॉर्ड कीमतों और सरकार द्वारा डीलरों के लिए इन्वेंट्री सीमा सख्त करने के बाद आज चीनी कंपनियों के शेयरों में 13% तक की तेजी देखी गई। त्योहारी ...और पढ़ें

चीनी शेयरों में तेज उछाल
HighLights
चीनी की रिकॉर्ड कीमतों से शुगर स्टॉक्स में 13% तक उछाल
सरकार ने डीलरों के लिए इन्वेंट्री सीमाएं सख्त की, मांग बढ़ी
एथेनॉल उत्पादन और आपूर्ति चिंता से कीमतें तीन माह तक ऊंची रह सकती हैं
नई दिल्ली। चीनी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सरकार ने डीलरों के लिए इन्वेंट्री लिमिट सख्त कर दी। इससे आज फिर से चीनी कंपनियों के शेयरों (Sugar Stocks Today) में 13% तक की तेजी आई। इसमें बजाज हिंदुस्तान शुगर सबसे आगे है, जबकि बलरामपुर चीनी और अन्य शेयरों में भी बढ़त देखी गई।
घरेलू और ब्राजील से सप्लाई को लेकर चिंता, त्योहारों के सीजन से पहले बढ़ती मांग और इंपोर्ट ड्यूटी में संभावित कटौती ने भी कीमतों को सहारा दिया है। नतीजे में शुगर स्टॉक्स उछले हैं।
क्या है सरकार का नया नियम?
सरकार ने इन्वेंट्री की सीमाएं सख्त कर दी हैं, जिसके तहत हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का कारोबार करने वाले डीलरों को 15 दिनों से अधिक समय तक स्टॉक रखने से रोक दिया गया है। भारत में अगस्त और नवंबर के बीच चीनी की मांग आम तौर पर बढ़ जाती है क्योंकि इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार मनाए जाते हैं, जिससे मिठाइयों, बिस्कुट और दूसरी कन्फेक्शनरी चीजों की मांग बढ़ती है।
इन चीजों को बनाने वाली कंपनियाँ त्योहारी सीजन से पहले ही स्टॉक जमा कर लेती हैं, जिससे चीनी की मांग और बढ़ जाती है।
3 महीनों तक ऊंची रहेंगी कीमतें
पिछले महीने, सरकार ने सप्लाई बढ़ाने के लिए डीलरों को 30 दिन से ज्यादा समय तक चीनी का स्टॉक न रखने का निर्देश दिया था। इस कदम के बावजूद, पिछले महीने चीनी की कीमतें 10% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं।
जानकारों का मानना है कि कीमतें कम से कम अगले तीन महीनों तक ऊँची बनी रहेंगी। इस बीच, अनियमित बारिश और सूखे मौसम की वजह से गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ा है, जो चीनी की कीमतों के लिए सकारात्मक हैं।
किस शेयर में कितनी तेजी?
- बलरामपुर चीनी मिल्स : 13.5 फीसदी
- द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड : 12.2 फीसदी
- बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड : 8.2 फीसदी
- धामपुर चीनी मिलें : 7.6 फीसदी
- श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड : 6.6 फीसदी
- ई आई डी-पैरी (इंडिया) लिमिटेड : 1.3 फीसदी
एथेनॉल फैक्टर भी?
एथेनॉल की ओर झुकाव से चीनी की संभावित कमी को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। जून में, ब्राजील के 58% गन्ने के रस का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में किया गया, जिससे चीनी की तुलना में ज्यादा मुनाफा होने की उम्मीद है। ब्राजील ने जुलाई में एथेनॉल मिलाने का अनिवार्य लक्ष्य भी 30% से बढ़ाकर 32% कर दिया, जो कुछ महीने पहले के 25-27% के स्तर से काफी ज्यादा है।
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(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
