Tata Steel vs JSW Steel: कौन बनेगा स्टील सेक्टर का अगला सुपरस्टार? किसके फंडामेंटल दमदार
टाटा स्टील और JSW स्टील ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें JSW स्टील बेहतर मुनाफा, कम कर्ज और मजबूत बैलेंस शीट के साथ अधिक मजबूत दिख रही है। ...और पढ़ें

Tata Steel vs JSW Steel
HighLights
JSW स्टील का नेट प्रॉफिट टाटा स्टील से लगभग दोगुना।
JSW स्टील ने अपना कर्ज काफी कम किया है।
टाटा स्टील के यूरोपीय कारोबार में चुनौतियां बरकरार हैं।
नई दिल्ली| तिमाही नतीजों का सीजन जारी है और इस बार सबसे ज्यादा नजर देश की दो बड़ी स्टील कंपनियों टाटा स्टील और JSW स्टील पर रही। दोनों कंपनियों ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। ऐसे समय में जब भारत में स्टील की मांग मजबूत बनी हुई है और अलग-अलग देशों में स्टील की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले स्टील साइकल का सबसे ज्यादा फायदा किस कंपनी को मिल सकता है।
एक तरफ टाटा स्टील के पास बड़ा कारोबार, मजबूत घरेलू बिजनेस और विस्तार की बड़ी योजना है। वहीं दूसरी तरफ JSW स्टील बेहतर मुनाफा, कम कर्ज और ज्यादा क्षमता के साथ आगे बढ़ती दिख रही है। दोनों कंपनियां लगातार अपनी क्षमता बढ़ाने में लगी हैं। आइए समझते हैं कि जून तिमाही के नतीजों के आधार पर फिलहाल कौन सी कंपनी ज्यादा मजबूत नजर आ रही है।
रेवेन्यू और मुनाफे में किसने मारी बाजी
30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में टाटा स्टील का कुल रेवेन्यू 60,794 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का EBITDA 9,370 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा है। वहीं कंपनी का नेट प्रॉफिट 2,385 करोड़ रुपये रहा।
दूसरी ओर JSW स्टील का रेवेन्यू 47,364 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का EBITDA 9,383 करोड़ रुपये रहा। यह टाटा स्टील के लगभग बराबर है। जबकि उसका कारोबार आकार में छोटा है। सबसे बड़ी बात यह रही कि JSW स्टील का नेट प्रॉफिट 4,696 करोड़ रुपये रहा। यह टाटा स्टील के मुकाबले लगभग दोगुना है।
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| Criteria | टाटा स्टील (Q1 FY27) | JSW स्टील (Q1 FY27) |
|---|---|---|
| रेवेन्यू | ₹60,794 करोड़ | ₹47,364 करोड़ |
| EBITDA | ₹9,370 करोड़ | ₹9,383 करोड़ |
| EBITDA ग्रोथ (YoY) | 25% | लगभग टाटा स्टील के बराबर EBITDA |
| नेट प्रॉफिट | ₹2,385 करोड़ | ₹4,696 करोड़ |
मार्जिन और कारोबार में कौन आगे
टाटा स्टील के भारत वाले कारोबार का EBITDA मार्जिन 27 फीसदी रहा। प्रति टन EBITDA 3,255 रुपये बढ़कर 19,162 रुपये पहुंच गया। इससे साफ है कि भारत में कंपनी का कारोबार मजबूत बना हुआ है। लेकिन कंपनी के यूरोप बिजनेस ने प्रदर्शन कमजोर किया। नीदरलैंड यूनिट का EBITDA सिर्फ 4 मिलियन यूरो रहा। वहीं यूके यूनिट अभी भी घाटे में है। हालांकि पहले के मुकाबले नुकसान कम हुआ है।
वहीं JSW स्टील पर विदेशी कारोबार का ऐसा दबाव नहीं है। कंपनी ने भारत में 94 फीसदी क्षमता का इस्तेमाल किया, जबकि पिछले साल यह 88 फीसदी था। इसके अलावा कंपनी की कुल बिक्री में 61 फीसदी हिस्सा वैल्यू एडेड और स्पेशल स्टील प्रोडक्ट्स का रहा। इससे आगे भी बेहतर मार्जिन मिलने की उम्मीद है।
कर्ज और बैलेंस शीट में बड़ा अंतर
टाटा स्टील का नेट कर्ज बढ़कर 84,173 करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी का नेट डेट टू EBITDA अनुपात 2.3 गुना है। वहीं JSW स्टील लगातार अपना कर्ज घटा रही है। 30 जून 2026 तक कंपनी का नेट कर्ज घटकर 46,157 करोड़ रुपये रह गया। यह मार्च में 53,870 करोड़ रुपये था।
इसमें JFE Steel की 7,875 करोड़ रुपये की इक्विटी निवेश की दूसरी किस्त का भी योगदान रहा। JSW स्टील का नेट डेट टू EBITDA अनुपात 1.46 गुना और नेट डेट टू इक्विटी 0.42 गुना है। इसी वजह से Fitch और CARE Ratings ने भी कंपनी की क्रेडिट रेटिंग में सुधार किया है।
| मापदंड | टाटा स्टील | JSW स्टील |
|---|---|---|
| नेट कर्ज (30 जून 2026) | ₹84,173 करोड़ | ₹46,157 करोड़ |
| कर्ज का रुझान | नेट कर्ज बढ़ा | नेट कर्ज घटा |
| नेट डेट टू EBITDA | 2.3 गुना | 1.46 गुना |
किसके पास ज्यादा मौका
टाटा स्टील ने नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड में 4.8 मिलियन टन सालाना क्षमता बढ़ाने को मंजूरी दी है। इस पर 33,873 करोड़ रुपये का निवेश होगा। कंपनी का लक्ष्य भारत में अपनी कुल क्षमता 40 मिलियन टन सालाना से ज्यादा करना है।
वहीं JSW स्टील भी तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी FY32 तक अपनी कुल क्षमता बढ़ाकर करीब 62 मिलियन टन सालाना करना चाहती है. कंपनी ने विजयनगर प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 4.5 मिलियन टन सालाना कर दी है. इसके अलावा कडप्पा में नया इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस लगाया जा रहा है. ओडिशा में POSCO के साथ 6 मिलियन टन क्षमता वाले नए प्लांट का जॉइंट वेंचर भी कंपनी की बड़ी योजना का हिस्सा है.
क्या कहते हैं आंकड़े
अगर भारत में स्टील की मांग इसी तरह मजबूत रहती है, तो दोनों कंपनियों को फायदा मिल सकता है. लेकिन फिलहाल आंकड़े बताते हैं कि JSW स्टील कम कर्ज, बेहतर मुनाफा, ज्यादा क्षमता इस्तेमाल और मजबूत बैलेंस शीट की वजह से बेहतर स्थिति में नजर आ रही है.
वहीं टाटा स्टील के लिए भारत का कारोबार मजबूत है, लेकिन यूरोप का कारोबार अभी भी चुनौती बना हुआ है. आने वाले समय में सबसे बड़ी नजर इस बात पर रहेगी कि टाटा स्टील यूरोप में कितना सुधार करती है और JSW स्टील अपनी विस्तार योजना को कितनी तेजी से पूरा करती है.
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(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)