Vedanta वाले अनिल अग्रवाल को चाहिए LOAN! 'मास्टरस्ट्रोक' के एलान के बाद ये है प्लान
अरबपति अनिल अग्रवाल की वेदांता एल्युमीनियम मेटल तीन बैंकों से ₹13,500 करोड़ का कर्ज जुटा रही है, जिसका उपयोग मौजूदा ऋणों के पुनर्वित्त के लिए किया जाए ...और पढ़ें

वेदांता ग्रुप की इस कंपनी को चाहिए लोन
HighLights
वेदांता एल्युमीनियम ने ₹13,500 करोड़ का कर्ज जुटाया
एक्सिस, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक दे रहे हैं लोन
मौजूदा कर्ज के रिफाइनेंस के लिए होगा उपयोग
नई दिल्ली। अरबपति अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप की एक यूनिट कम से कम तीन बैंकों से लगभग ₹13,500 करोड़ जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के अलग-अलग फर्मों में बंटने के बाद यह लोकल-करेंसी में लिया गया पहला बड़ा लोन है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक्सिस बैंक ने वेदांता एल्युमीनियम मेटल के साथ ₹5,500 करोड़ के लोन एग्रीमेंट पर साइन किए हैं। वहीं HDFC बैंक लिमिटेड और ICICI बैंक लिमिटेड मिलकर इस नई इंडिपेंडेंट कंपनी को लगभग ₹8,000 करोड़ का लोन देंगे। कर्जदाता लोन के एक हिस्से को सिंडिकेट करेंगे और एक्सिस बैंक इसे लॉन्च करेगा।
कितनी होगी लोन की अवधि?
लोन की अवधि 6.5 साल से 7 साल के बीच हो सकती है और इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल मौजूदा कर्ज को रीफाइनेंस करने में किया जाएगा, जो वेदांता एल्युमीनियम को पहले के इंटीग्रेटेड कंपनी स्ट्रक्चर से मिला था। बैंक 7.9% से 8% की रेंज में ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं।
फंड जुटाने का यह फैसला दिखाता है कि वेदांता स्वतंत्र रूप से फंडेड बिजनेस बनाना चाहती है, ताकि इन्हें ज्यादा फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मिल सके और कर्ज कम हो सके। इस नए स्ट्रक्चर को दिसंबर में भारतीय अदालत ने मंजूरी दी थी।
5 कंपनियों में हुआ विभाजन
वेदांता ने अपने बिजनेस को पाँच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बाँट दिया है। इनमें से चार कंपनियाँ—एल्युमीनियम, पावर, ऑयल एंड गैस और आयरन ओर—जून में स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड करने लगीं। पिछले महीने, S&P ग्लोबल की लोकल यूनिट 'क्रिसिल रेटिंग्स' ने वेदांता की कई कंपनियों की रेटिंग बढ़ाई।
वेदांता एल्युमीनियम की रेटिंग को 'स्टेबल आउटलुक' के साथ AA+ कर दिया और बताया गया कि ग्रुप की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर हुई है।
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'मास्टरस्ट्रोक' का किया था एलान
11 जुलाई को अनिल अग्रवाल की वेदांता ने एनर्जी से जुड़ा एक बड़ा एलान किया था, जिसके तहत वेदांता ने हर रोज 5,00,000 बैरल ऑयल इक्विवेलेंट (boepd) तेल और गैस का उत्पादन करने के अपने लक्ष्य को फिर से दोहराया था। वेदांता के अनुसार इससे भारत की एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में कंपनी की भूमिका बहुत अहम हो जाएगी।
भारत तेल और गैस की जरूरतों का लगभग 90% हिस्सा आयात करता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था ग्लोबल सप्लाई में रुकावट और कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम के दायरे में रहती है। वेदांता ने बताया कि देश में लगभग 300 अरब बैरल के बराबर हाइड्रोकार्बन संसाधन मौजूद हैं।