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    राखी से पहले उजड़ गए दो घर, कश्मीर में आतंकियों की गोलियों ने छीन लिए दो भाइयों के हाथ

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 10:21 PM (IST)

    जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों, दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना, की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना से उनके परिवार उजड़ ग ...और पढ़ें

    कुलगाम आतंकी हमला।

    कुलगाम आतंकी हमला।

    HighLights

    1. कुलगाम में आतंकियों ने छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों को मारा।

    2. दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना के परिवार हुए बेसहारा।

    3. सरकार ने मृतकों के परिजनों को 36-36 लाख रुपये की सहायता दी।

    डिजिटल डेस्क, रायपुर। रक्षाबंधन से कुछ दिन पहले दो बहनों की राखियां सूनी हो गईं। दो मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। जिन हाथों में परिवार के लिए रोटी कमाने का सपना था, वे जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गए।

    छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के दीपक रात्रे और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के भूपेंद्र भैना की कहानी केवल दो मजदूरों की मौत नहीं, बल्कि उन हजारों प्रवासी श्रमिकों के संघर्ष की दास्तान है, जो रोजी-रोटी की तलाश में घर से दूर जाते हैं और कई बार लौटकर नहीं आ पाते।

    सारंगढ़-बिलाईगढ़ के एक घर का बुझ गया चिराग

    सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुईहा गांव में भी एक घर का चिराग बुझ गया। 27 वर्षीय भूपेंद्र भैना तीन माह पहले ही कश्मीर गया था। वह अपने दो वर्षीय बेटे को दादी के पास छोड़ गया था। माता-पिता भी मजदूरी के लिए दूसरे राज्य में हैं। घर पर अविवाहित बहन अन्नू भाई की राह देख रही थी। उसने फोन पर कहा था, भैया, राखी में जरूर आना। जवाब मिला था, इस बार जरूर आऊंगा।

    लेकिन राखी से पहले पहुंची खबर ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। अब बहन की राखी थाली में सजी है, मगर उसकी कलाई सूनी रह जाएगी। इधर, सक्ती जिले के बुंदेली गांव का यह 24 वर्षीय युवक पिछले चार-पांच वर्षों से हर सर्दी में जम्मू-कश्मीर के ईंट-भट्ठों पर मजदूरी करने जाता था।

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    दो साल पहले हुआ था बेटे का जन्म

    तीन वर्ष पहले शादी हुई और दो साल पहले बेटे का जन्म हुआ तो जिम्मेदारियां और बढ़ गईं। बेहतर भविष्य की उम्मीद में इस बार वह मां, भाई और पत्नी सुमन के साथ फिर कश्मीर पहुंचा था। किसी ने नहीं सोचा था कि कमाई के लिए गया दीपक तिरंगे में लिपटकर लौटेगा। इन दोनों परिवारों की पीड़ा सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उस कठोर सच्चाई का आईना है, जिसमें छत्तीसगढ़ के हजारों श्रमिक रोजगार के अभाव में सैकड़ों किलोमीटर दूर पलायन करने को मजबूर हैं।

    नाम और पहचान पूछी चलाई फिर गोली

    शुक्रवार शाम कुलगाम के ईंट-भट्ठे पर आतंकियों ने पहले मजदूरों से नाम और पहचान पूछी, फिर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। दीपक वहीं ढेर हो गया। उसके दो वर्षीय बेटे के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। हरदीडीह और बुंदेली गांव में खबर पहुंची तो पूरे इलाके में मातम छा गया।

    36-36 लाख रुपये की सहायता

    छत्तीसगढ़ के दोनों श्रमिकों के स्वजन को कुल 36-36 लाख रुपये मिलेंगे। इसमें 20 लाख रुपये छत्तीसगढ़ सरकार, 10 लाख रुपये जम्मू-कश्मीर सरकार तथा छह लाख रुपये कुलगाम जिला प्रशासन की ओर से सहायता राशि के रूप में प्रदान किए जाएंगे।