टी-20 विश्व कप में भारत के खिलाफ पाकिस्तान के बहिष्कार पर बर्नी का बयान
आईसीसी के पूर्व संचार प्रमुख समी-उल-हसन बर्नी ने कहा कि टी-20 विश्व कप में भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार करना पाकिस्तान के लिए एक कठिन निर्णय रहा होगा ...और पढ़ें

समी-उल-हसन बर्नी का बयान
HighLights
पाकिस्तान का भारत मैच बहिष्कार कठिन फैसला था।
पीसीबी ने परिणामों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया।
बर्नी ने बीसीसीआई के मुस्ताफिजुर मामले पर सवाल उठाए।
पीटीआई, नई दिल्ली। आइसीसी के पूर्व संचार प्रमुख समी-उल-हसन बर्नी ने सोमवार को कहा कि टी-20 विश्व कप में भारत के खिलाफ बड़े मैच का बहिष्कार करना पाकिस्तान के लिए एक मुश्किल फैसला रहा होगा और इसके लिए कई विशेषज्ञों से सलाह ली गई होगी।
बर्नी से पूछा गया कि क्या बांग्लादेश का भारत के साथ विवाद पाकिस्तान की लड़ाई थी तो उन्होंने जवाब दिया, हम इस फैसले से सहमत हो सकते हैं, असहमत हो सकते हैं, बहस कर सकते हैं, लेकिन जब सरकार कोई फैसला लेती है तो वे कुछ ऐसा देख रहे होते हैं जो आप और मैं नहीं देख रहे होते। मेरा मतलब है कि ये फैसले लेना आसान नहीं होता। उन्होंने बहुत से लोगों से बात की होगी, विशेषज्ञों से सलाह ली होगी, कानूनी पहलू देखे होंगे। बर्नी ने कहा, मुझे यकीन है कि पाकिस्तान सरकार ने यह फैसला करने से पहले काफी सोच-विचार किया होगा।
पाकिस्तान ने नतीजों को ध्यान में रखा होगा
आइसीसी ने संकेत दिया कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) को अपने इस फैसले के लिए वित्तीय जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है और राजस्व का नुकसान भी हो सकता है जो लाखों डालर तक हो सकता है, लेकिन बर्नी का मानना है कि पाकिस्तान ने इसके नतीजों को ध्यान में रखकर ही यह फैसला किया होगा। बर्नी ने बीसीसीआई द्वारा बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान को आईपीएल से बाहर करने के तरीके की भी आलोचना की।
मुस्तफिजुर रहमान विवाद पर टिप्पणी
बर्नी ने कहा कि बीसीसीआइ मुस्ताफिजुर को बाहर करने की घोषणा करते हुए बिना असल कारण बताए सार्वजनिक बयान देने से बच सकता था। बीसीसीआई को यह बात सार्वजनिक तौर पर कहने की जरूरत नहीं थी। वे आसानी से निजी तौर पर कोलकाता नाइटराइडर्स से खिलाड़ी को रिलीज करने के लिए कह सकते थे और किसी को पता नहीं चलता कि क्या हुआ और चीजें आगे बढ़ जाती। कभी-कभी आप फैसले करने में गलती करते हैं और ऐसा बयान देते हैं जिसके नतीजे झेलने होते हैं। तो तीन जनवरी की घोषणा ने उकसा दिया।