IPL 2026 में छोटी बाउंड्री को लेकर बुरी तरह भड़के सुनील गावस्कर, BCCI को जमकर लगाई फटकार
सुनील गावस्कर ने अपने कॉलम में आईपीएल की छोटी बाउंड्री पर चिंता जताई है, जिससे गेंदबाजों को परेशानी हो रही है। उन्होंने हारने वाले कप्तान के तुरंत बाद ...और पढ़ें

सुनील गावस्कर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
सुनील गावस्कर कॉलम। यह कॉलम आईपीएल के 68वें मैच की सुबह लिखा जा रहा है, जो लखनऊ में पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच खेला जाना है। फिलहाल लखनऊ अंक तालिका में सबसे नीचे है। इसलिए वह बिना किसी दबाव के खेल सकती है, क्योंकि इस मैच के नतीजे से उसके लिए ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। हां, वह जीत जरूर चाहेगी और उम्मीद करेगी कि मुंबई अपना आखिरी मैच हार जाए ताकि वह पांच बार की चैंपियन टीम से ऊपर अंक तालिका में खत्म कर सके।
पंजाब के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा है, क्योंकि अगर वे हारते हैं तो प्लेआफ की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। दूसरी ओर, राजस्थान जो वानखेड़े में मुंबई के विरुद्ध लीग का दूसरा आखिरी मैच खेलेगी। जानती है कि अगर वह यह मुकाबला जीत जाती है तो प्लेआफ में चौथे स्थान के लिए क्वालीफाई कर जाएगी।
इसके बाद ईडन गार्डेंस में होने वाला लीग का आखिरी मैच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगा, क्योंकि कोलकाता जीतकर भी राजस्थान से ऊपर नहीं जा सकेगी। लेकिन अगर पंजाब हार जाती है और राजस्थान भी हारता है, तब लीग का अंतिम मैच यह तय कर सकता है कि प्लेऑफ में चौथी टीम कौन होगी। प्लेऑफ की आखिरी जगह की लड़ाई का लीग के अंतिम दिन तक पहुंचना इस बात का सबूत है कि वर्षों में टीमों का स्तर कितना बेहतर हुआ है और अब टीमों के बीच ज्यादा अंतर नहीं रह गया है।
गेंदबाजों के लिए निराशाजनक
हां, टी-20 प्रारूप बेहद अनिश्चित होता है और मैच एक-दो ओवर में पलट सकते हैं। कई मैच तो सिर्फ छक्कों की बरसात बनकर रह गए, जिसकी बड़ी वजह बल्लेबाजी के लिए अनुकूल पिचें हैं। गेंद बल्ले पर बहुत अच्छी तरह आ रही है, जिससे बल्लेबाज आसानी से लाइन में खेल पा रहे हैं और गेंद को हवा में उठाकर लंबे छक्के लगा रहे हैं। हालांकि कुछ छक्के ऐसे भी रहे हैं जो मुश्किल से बाउंड्री लाइन पार कर पाए। भारत के ज्यादातर मैदान छोटे हैं, इसलिए गेंदबाजों के लिए यह बेहद निराशाजनक होता है कि जो गेंद कैच हो सकती थी, वह छक्का बन जाती है।
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बाउंड्री का आकार क्यों नहीं बढ़ाया जाता, यह आज तक समझ नहीं आया। हर मैदान पर बाउंड्री रोप और एलईडी विज्ञापन बोर्ड के बीच काफी जगह होती है और एलईडी बोर्ड के बाद भी दर्शकों को घेरने वाली तारों तक अच्छी-खासी दूरी होती है। अगर बाउंड्री को कुछ फीट पीछे खिसका दिया जाए तो कई बार छक्के और कैच के बीच फर्क पड़ सकता है।
स्टैंड्स में गिरने वाले होते हैं असली छक्के
दर्शकों को शायद बाउंड्री के ऊपर से निकलते छक्के पसंद आते हों, लेकिन खेल को समझने वाले जानते हैं कि असली छक्का वही होता है जो सीधे स्टैंड में जाकर गिरे। हालांकि हमने कुछ बेहद लंबे छक्के भी देखे हैं, जो यह दिखाते हैं कि आज के बल्ले कितने ताकतवर हो चुके हैं।
अगर बाउंड्री इसलिए नहीं बढ़ाई जा रही क्योंकि कुछ अतिरिक्त एलईडी बोर्ड लगाने में ज्यादा खर्च आएगा तो उस खर्च की भरपाई उन अतिरिक्त विज्ञापनों से होने वाली कमाई से आसानी से की जा सकती है। ऋषभ पंत का मैच के बाद इंटरव्यू में ‘एफ’ शब्द का इस्तेमाल करना यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हारने वाली टीम के कप्तान का इंटरव्यू मैच खत्म होते ही लेना जरूरी है।
ऋषभ पंत खुशमिजाज खिलाड़ी
खासकर अगर मैच आखिरी ओवर तक गया हो तो कप्तान की निराशा और भी ज्यादा होती है। बेहतर होगा कि पहले जीतने वाली टीम के ‘प्लेयर आफ द मैच’ से बात की जाए और हारने वाली टीम के कप्तान को थोड़ा समय दिया जाए ताकि वह खुद को संभाल सके, चेहरे पर पानी मार सके और फिर इंटरव्यू के लिए आए। वैसे भी प्रेजेंटेशन सेरेमनी तैयार होने में थोड़ा समय लगता है। इसलिए हारने वाले कप्तान को कुछ अतिरिक्त मिनट देना शायद ऐसे घटनाक्रमों को रोक सकता है।
ऋषभ पंत क्रिकेट के सबसे खुशमिजाज खिलाड़ियों में से एक हैं, जो अपने अलग अंदाज में खेल का आनंद लेते हैं और अगर वह भी अपना आपा खो बैठे, तो यह बात और मजबूत हो जाती है कि हारने वाली टीम के कप्तान को अपने विचार समेटने के लिए थोड़ा समय दिया जाना चाहिए, बजाय इसके कि सांस संभालने से पहले ही उनके सामने माइक्रोफोन कर दिया जाए। क्या यह बहुत बड़ी मांग है?