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    पिता ने छिपाई बीमारी और एक खत लिखकर बदल दी जिंदगी, भारतीय टीम में चुने गए सारांश जैन की कहानी आपको देगी बड़ी सीख

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 07:52 PM (IST)

    इंदौर के क्रिकेटर सारांश जैन को भारतीय टेस्ट टीम में चुना गया है। उनके चयन के पीछे पिता की कैंसर बीमारी और एक प्रेरणादायक पत्र की मार्मिक कहानी है, जि ...और पढ़ें

    सारांश जैन

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    संक्षेप में पढ़ें

    कपीश दुबे, इंदौर। एक क्रिकेटर का चयन प्रदेश की टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए हुआ, लेकिन तभी पिता को मुंह के कैंसर बीमारी का पता चला। पिता की सलाह पर परिवार ने बेटे से बीमारी छिपाए रखी। जब बेटा विदेश दौरे से लौटा तो पिता की हालत देखकर रोने लगा, क्रिकेट मैदान जाना छोड़ दिया।

    पिता ने बेटे को चिट्ठी लिखी, ‘तू जितना अच्छा क्रिकेट खेलेगा मैं उतनी जल्दी ठीक हो जाऊंगा।’ इसके बाद से खिलाड़ी ने दिन-रात मेहनत की। यह कहानी कोई फिल्मी नहीं, बल्कि भारतीय टेस्ट टीम में शामिल इंदौर के सारांश जैन के जीवन का हिस्सा है। बीसीसीआई ने श्रीलंका दौरे के लिए चुनी गई टेस्ट टीम में आफ स्पिन ऑलराउंडर सारांश को भी मौका दिया है।

    सारांश जैन ने घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन से बनाई जगह

    33 साल के सारांश जैन 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 2223 रन बनाने के साथ 188 विकेट भी ले चुके हैं। देश को पहला टेस्ट कप्तान कर्नल सीके नायडू देने वाले इंदौर से लगातार क्रिकेट की पौध लहलहा रही है। आरसीबी को लगातार दो बार आईपीएल चैंपियन बनाने वाले रजत पाटीदार के बाद अब सारांश भारतीय टेस्ट टीम तक पहुंचे हैं। सारांश हाल ही में श्रीलंका दौरे पर भारत-ए टीम में शामिल थे। यहां दो मैचों में कुल पांच विकेट हासिल किए थे। वहीं एक मैच में नाबाद 70 रनों की पारी खेली थी।

    कैंसर से जूझ रहे पिता ने जताई खुशी

    सारांश के चयन पर पिता सुबोध जैन की खुशी चेहरे पर नजर आती है। सुबोध भी मध्य प्रदेश के लिए ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते थे। कैंसर की बीमारी के चलते ठीक से बोल नहीं पाते। फिर भी अपने शब्दों को जोड़ते हुए कहते हैं, मुझे याद है शायद साल 2014 की बात है जब मप्र टीम के साथ सारांश को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाना था। मुझे कैंसर का पता चला। हमने उससे बात छिपाई। मैं तीन महीने बाद मुंबई से इलाज कराकर लौटा तो हालत खराब थी।

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    वह मुझे देखकर फूट-फूटकर रोने लगा। मैदान भी नहीं जाता था। मुझे लगा कि कहीं मेरी वजह से वह क्रिकेट खेलना न छोड़ दे क्योंकि उसे भारत के लिए खेलते देखना मेरा सपना था। वह कहता था कि पापा आपकी हालत देखकर मेरा मन नहीं होता। फिर मैंने उसे चिट्ठी लिखकर प्रेरित किया। मुझे खुशी है कि उसने मेहनत जारी रखी और आज मेरा सपना पूरा कर रहा है।

    सारांश लगातार कर रहे थे अच्छा प्रदर्शन

    सारांश ने दलीप ट्रॉफी में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। लंबे समय से भारतीय टीम में दस्तक दे रहे थे, लेकिन मौका अब मिला है। सारांश अपने करियर में मार्गदर्शन के लिए पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह को बड़ा श्रेय देते है।

    हरभजन सिंह ने दी बड़ी सीख

    उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर सारांश ने हरभजन के साथ कई फोटो शेयर करते हुए लिखा है, कुछ पाने के लिए कुछ खोना नहीं, कुछ करना पड़ता है। हरभजन सिंह का कहा यह वाक्य मेरे लिए सिर्फ शब्द नहीं बल्कि जीवन की बड़ी सीख है। श्रीलंका के विकेट और मौसम पारंपरिक रूप से स्पिन गेंदबाजों को मदद करते हैं। ऐसे में सारांश के पास करियर को नया मोड़ देने का अच्छा अवसर है।

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