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    IPL: 18 साल में कितनी बदल गई दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग, कमाई में हुआ गजब का इजाफा

    Updated: Mon, 23 Mar 2026 05:12 PM (IST)

    आईपीएल ने 18 साल में अपनी आलोचनाओं को पीछे छोड़ते हुए जबरदस्त सफलता हासिल की है। 2008 में 4600 करोड़ रुपये से शुरू होकर अब इसका मूल्यांकन 82 हजार करोड ...और पढ़ें

    दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग है आईपीएल

    दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग है आईपीएल

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    स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने जब साल 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शुरुआत की थी तब कई लोगों ने इसकी आलोचना की थी। तब टी20 फॉर्मेट को क्रिकेट के लिए सही नहीं बताया जा रहा था। आईपीएल भी इसी फॉर्मेट में खेला जाता है। इसके अलावा जिस तरह का इसका फॉर्मेट था उसके चलते कई लोगों ने इसे तमाशा तक कह डाला था।

    आलोचनाओं को पीछे छोड़ते हुए इस लीग ने 18 साल का सफर तय कर लिया है और आज दूसरे देश भी इसी के रास्त पर चल रहे हैं। कई देशों ने आईपीएल की तर्ज पर ही अपने यहां लीग की शुरुआत की, लेकिन जो सफलता आईपीएल को मिली वो किसी और लीग के हिस्से नहीं आई। इस लीग का लोकप्रियता कितनी बढ़ी है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2008 में जब ये लीग शुरू हुई थी तो इसका वैल्यू 4600 करोड़ थी जो आज 82 हजार करोड़ तक पहुंच गई है। यानी कुल 18 गुना इजाफा।

    सिर्फ खिलाड़ी नहीं करते कमाई

    आज इस लीग में हर कोई खेलना चाहता है। हर क्रिकेटर का सपना होता है कि वह आईपीएल में खेले। इसके दो कारण है। पहला ये कि इस लीग में जमकर पैसा बरसता है। दूसरा ये कि अगर इस लीग में चमक गए तो फिर पूरा विश्व आपको जान जाता है और राष्ट्रीय टीम में जाने का रास्ता आसान हो जाता है।

    लेकिन इस लीग से सिर्फ खिलाड़ी कमाई नहीं करते। इस लीग से फ्रेंचाइजियां, ब्रॉडकास्टर्स, स्पॉन्सर्स, वेन्यू, राज्य संघ, इवेंट फर्म, ट्रैवल कंपनी, ग्राउंड स्टाफ और कई सारे लोग अपनी जेब भरते हैं। इसलिए इसे सिर्फ एक लीग नहीं कहा जाता बल्कि पैसे का ऐसा इकोसिस्टम कहा जाता है जहां हर किसी की जेब भरती है।

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    दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2030 तक इसका एक सीजन 2.5 से 3 महीने का हो सकता है। वहीं इसकी वैल्युएशन करीब 30 बिलियन डॉलर (करीब 2.80 लाख करोड़) तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। ।

    यूनिकॉर्न से डेकाकॉर्न तक का सफर

    ये लीग एक तरह से स्टार्टअप थी। स्टार्टअप की दुनिया में यूनिकॉर्न (1 बिलियन डॉलर) से डेकाकॉर्न (10 बिलियन डॉलर) तक का सफर आसान नहीं होता है, लेकिन आईपीएल ने ये कर दिखाया है। जब ये लीग शुरू हुई थी तब इस लीग का ब्रांड वैल्यू 1.1 बिलियन डॉलर आंकी गई थी। साल 2024 तक ये डेकाकॉर्न में बदल गई और 12 बिलियन पार कर गई

    साल 2008 में खेले गए पहले सीजन में आईपीएल की वैल्यू 4600 करोड़ रुपए से थोड़ी सी ज्यादा थी। 18 साल बाद इसकी वैल्यू तकरीबन 18 गुना बढ़कर 82 हजार 500 करोड़ तक पहुंच गई।

    IPL Value

    मीडिया राइट्स की ने मचाया धमाल

    इसके एक मैच से ब्रॉडकास्टर जमकर कमाई करते हैं। साल 2008 में सोनी नेटवर्क ने इसके ब्रॉकास्टिंग अधिकार 8200 करोड़ रुपये में खरीदे थे। 2018 में डिज्नी स्टार ने पांच साल के लिए 16,347 करोड़ रुपये अदा किए। 2023-27 की साइकल के लिए रिलायंस और डिज्नी स्टार ने मीडिया राइट्स के लिए 48,390 करोड़ की कीमत चुकाई है। अगर इसे प्रति मैच के हिसाब से विभाजित किया जाए तो आईपीएल का एक मैच 107.5 करोड़ रुपये का होता है। पूरी दुनिया में अगर किसी लीग के एक मैच की कीमत आईपीएल से ज्यादा है तो वो अमेरिका की एनएफएल है जिसके एक मैच की कीमत 133 करोड़ रुपये है।

    IPL per Match

    टीमों ने की जमकर कमाई

    पहले ही साल आईपीएल ने जमकर कमाई की। 2008 में इस लीग ने 15 करोड़ का मुनाफा कामाया। साल 2013 तक ये 385 करोड़ रुपये और 2023 तक 5120 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आईपीएल में पैसा स्पान्सरशिप से आता है जो दो हिस्सों में बंटी है। एक सेंट्रल स्पांसर है जिसका पैसा सभी टीमों में बांटा जाता है। दूसरा होता है टीम स्पान्सर। इसे फ्रेंचाइजी खुद हैंडल करती है।


    इसके अलावा बीसीसीआई मीडिया राइट्स और टाइटल स्पान्सरशिप से भी पैसा कमाती है जिसका 45 प्रतिशत हिस्सा सभी टीमों में बराबर बंटता है। रिपोर्ट के अनुसार हर टीम को इससे ही 400-500 करोड़ रुपये मिलना तय होता है। इसके अलावा कई अलग तरह के स्पांसर होते हैं जिससे 100 से 150 करोड़ रुपये की कमाई होती है। वहीं टिकट और हॉस्पिटैलिटी से भी टीम को कमाई होती है।

    डिजिटल ने बदला खेल

    आईपीएल टीवी पर लोगों के लिए मनोरंजन का साधन था, लेकिन जैसे ही डिजिटल की दुनिया बनी और उसमें लाइव स्ट्रीमिंग जैसा सुविधा आई तो सारा खेल बदल गया। रिलायंस ने इस लीग को फ्री स्ट्रीम करना शुरू किया। मोबाइल पर लोग अब आसानी से मैच देख पा रहे थे। एक समय पर तकरीबन 3.2 करोड़ से ज्यादा लोग (कन्करेंट व्यूअर्स) मैच देख रहे थे। एक अनुमान के मुताबिक, आईपीएल के दौरान भारत में हर साल डेटा की खपत में 30% का उछाल आता है। दर्शकों को देखते हुए अब लगभग हर प्लेफॉर्म में अलग-अलग भाषाओं में कमेंट्री चालू कर दी है।

    आईपीएल से मिलती हैं नौकरियां

    आईपीएल जब आता है तो इसके कई लोगों को नौकरी मिलती है। इसमें कई लोग शामिल होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीएल के दौरान तीन लाख से ज्यादा लोग अस्थाई या स्थाई रूप से जुड़ते हैं। इसमें लॉजिस्टिक्स, सिक्योरिटी, वेंडर्स, इवेंट मैनेजर तक शामिल हैं।

    दूसरे देशों की लीग में एंट्री

    आईपीएल की कई फ्रेंचाइजियां इस समय दूसरे देशों की लीगों में एंट्री कर चुकी हैं। इसमें अफ्रीका की (एसए20), यूएई (आईएलटी20), वेस्ट इंडीज (सीपीएल) और अमेरिका (मेजर लीग क्रिकेट) में अधिकथर टीमें आईपीएल फ्रेंचाइजियों की टीमें है। (जैसे रिलायंस, केकेआर, सनराइजर्स) ने खरीदी हैं

    खिलाड़ी बने ब्रांड

    आईपीएल जैसी लीग ने खिलाड़ियों को सिर्फ खिलाड़ी नहीं रहने दिया बल्कि एक ब्रांड में तब्दील कर दिया। खिलाड़ियों को सोशल मीडिया पर लाखों लोग फॉलो करने लगे हैं और इसमें 200 से 500 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है।

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