मिस्बाह उल हक ने उड़ाई PCB के नियमों की धज्जियां, सरफराज अहमद और वहाब रियाज की तरह क्या बोर्ड लेगा एक्शन?
पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मिस्बाह उल हक इस समय सवालों के घेरे में हैं। वे पीसीबी के साथ जुड़े हुए हैं और पीएसएल में भी फ्रेंचाइजी के साथ काम कर रहे है ...और पढ़ें

मिस्बाह उल हक
HighLights
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के नियमों की अनदेखी
मिस्बाह उल हक पीएसएल में भी कर रहे हैं काम
सरफराज अहमद और वहाब रियाज के खिलाफ हो चुका है एक्शन
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) में एक नया विवाद सामने आया है। इसकी वजह से पीसीबी चर्चा के केंद्र में है। पूर्व पाकिस्तानी बल्लेबाज मिस्बाह-उल-हक बोर्ड के साथ भी जुड़े हुए हैं और पाकिस्तान सुपर लीग (PSL 2026) में भी काम कर रहे हैं। इसको लेकर जब आलोचना हुई तो उन्होंने अपना बचाव किया है। पीएसएल में काम करने की वजह से उनके ऊपर नियमों को तार-तार करने का आरोप लगा है।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सरफराज अहमद और वहाब रियाज को क्वेटा ग्लेडिएटर्स के साथ काम करने से मना कर दिया था। हालांकि, मिस्बाह अभी भी फ्रेंचाइजी के साथ जुड़े हुए हैं। बता दें कि पीसीबी की नीति है कि उनके साथ जुड़ा हुआ व्यक्ति को पीएसएल में किसी भी भूमिका को निभाने की अनुमति नहीं है। हालांकि, पूर्व पाक कप्तान पेशावर जल्मी के साथ जुड़े हैं और सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे हैं।
मिस्बाह-उल-हक ने किया अपना बचाव
पीसीबी और पीएसएल में साथ काम करने के बाद मिस्बाह की आलोचना हुई, तो उन्होंने अपना बचाव किया। उन्होंने कहा, "नेशनल सेलेक्टर बनने से पहले मैंने पेशावर जल्मी के साथ करार किया था। मैं उनके साथ कुछ निश्चित दिनों के लिए सलाहकार के रूप में काम कर रहा हूं।"
पूर्व बल्लेबाज से सवाल किया गया कि पीसीब ने उन्हें जल्मी के साथ काम करने की अनुमति कैसी दी? दूसरी तरफ बोर्ड ने वहाब रियाज और सरफराज अहमद पर रोक लगा दी थी। इस पर उन्होंने कहा, "ये मामला उससे अलग है। इसको लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ही बेहतर स्पष्टीकरण दे सकता है।"
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पाकिस्तान के साथ जुड़े रहे हैं मिस्बाह
मिस्बाह पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के साथ साल 2019 से लगातार जुड़े रहे हैं। वे टीम के मुख्य चयनकर्ता और मुख्य कोच भी रहे हैं। हालांकि, उनका बोर्ड और फ्रेंचाइजी के साथ जुड़ा होना सवालों के घेरे में है। पीसीबी का कहना है कि अगर कोई खिलाड़ी बोर्ड और फ्रेंचाइजी के साथ जुड़ा रहता है, तो ये हितों का टकराव हो सकता है। हालांकि, मिस्बाह इसकी अलग ही परिभाषा देते हैं।
पूर्व पाकिस्तानी कप्तान ने पीएसएल में अपने रोल को सही ठहराया और इसे मददगार बताया। उन्होंने कहा, आप जब युवा खिलाड़ियों को करीब से देखते हैं, तो उन्हें समझना आसान होता है। आप ये देख पाते हैं कि किसी विशेष परिस्थिति में किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं। इससे राष्ट्रीय चयनकर्ता के रूप में काम करना आसान हो जाता है।