युवराज सिंह की साइन वाली इंडिया की जर्सी डस्टबिन में फेंकी थी, इस घमंडी गेंदबाज की हरकत का अब हुआ खुलासा
टी20 विश्व कप 2007 में युवराज सिंह के 6 छक्के सभी को याद हैं। इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले में युवराज ने इतिहास रचते हुए 12 गेंदों पर अर्धशतक जड़ दिया ...और पढ़ें
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आज तक अमर है युवराज का रिकॉर्ड।
HighLights
युवराज ने 6 गेंदों पर जड़े थे 6 छक्के
12 गेंदों पर ठोक दिया था अर्धशतक
युवराज सिंह ने कैंसर से लड़ाई की
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2007 में युवराज सिंह के 6 छक्के सभी को याद हैं। इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले में युवराज ने इतिहास रचते हुए 12 गेंदों पर अर्धशतक जड़ दिया था। उनका यह रिकॉर्ड आज तक नहीं टूटा है। युवराज सिंह ने स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में यह कारनामा किया था। हालांकि, ब्रॉड के लिए हालात आसान नहीं थे। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज के लिए इस झटके से उबरना आसान नहीं था। हालांकि, बाद में वह एक महान गेंदबाज बने।
युवराज ने किया खुलासा
हाल ही में एक इंटरव्यू में युवराज ने बताया कि स्टुअर्ट के पिता क्रिस ब्रॉड ने उनसे अपने बेटे के लिए एक जर्सी पर ऑटोग्राफ देने को कहा था। हालांकि, बाद में उन्हें पता चला कि इंग्लैंड के क्रिकेटर ने जर्सी को कूड़ेदान में फेंक दिया था।
महान तेज गेंदबाज बने
युवराज ने माइकल वॉन के साथ 'द ओवरलैप क्रिकेट' पर बातचीत के दौरान कहा, "मैंने बस यही सोचा था कि टी20 में उन्हें अनुभव नहीं है, जो कि स्वाभाविक है। वहीं से वे एक महान तेज गेंदबाज बने और 600 से अधिक टेस्ट विकेट लिए। उन्होंने उस पल को अपनी ताकत में बदल दिया। किसी और के लिए उनका करियर शायद खत्म हो गया होता।"
कूड़ेदान में फेंक दी जर्सी
युवराज ने कहा, "स्टुअर्ट के पिता क्रिस ब्रॉड भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच में रेफरी थे। वे आए और मुझसे कहा, 'आपने लगभग मेरे बेटे का करियर खत्म कर दिया था।' मैंने उनसे कहा, 'सर, मुझे भी पांच छक्के लगे हैं। मैं समझता हूं कैसा लगता है।' उन्होंने कहा, 'आपको स्टुअर्ट के लिए एक जर्सी पर साइन करने चाहिए।' मैंने अपनी इंडिया की शर्ट पर लिखा: मुझे भी पांच छक्के लगे हैं। मैं समझता हूं कैसा लगता है। मुझे उम्मीद है कि तुम बेस्ट बनोगे। मैंने हाल ही में पढ़ा कि जब क्रिस ने उन्हें वह जर्सी दी तो उन्होंने उसे कूड़ेदान में फेंक दिया। वे बहुत गुस्से में थे और यह बिल्कुल स्वाभाविक है।"
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कैंसर पर खुलकर बात की
युवराज ने कैंसर से अपनी लड़ाई और डॉक्टर ने उन्हें जो बताया उसके बारे में भी खुलकर बात की। भारतीय स्टार ने कहा, "इसे स्वीकार करना मुश्किल था। अपने करियर के शिखर पर आप पहाड़ की चोटी पर होते हैं और फिर खाई में गिर जाते हैं। मैं दिल्ली में था। हम वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के दौरे पर जा रहे थे। गांगुली रिटायर हो चुके थे और टेस्ट टीम में जगह खाली हो गई थी। मैं उस जगह के लिए सात साल से इंतजार कर रहा था। मैंने कहा, 'मुझे मरने की परवाह नहीं, मुझे वह जगह चाहिए।' लेकिन मेरी तबीयत दिन-ब-दिन बिगड़ती गई।"
डॉक्टर ने चेताया था
युवराज ने बताया, "डॉक्टर नितेश रोहतगी ने मुझसे कहा, 'ट्यूमर आपके दिल और फेफड़े के बीच में है। या तो आप क्रिकेट खेलने जाइए या आपको दिल का दौरा पड़ सकता है। अगर आप कीमोथेरेपी नहीं करवाते हैं तो आपके पास जीने के लिए तीन से छह महीने बचे हैं।' तभी मुझे एहसास हुआ कि मुझे सोचना होगा।"