भारतीय टीम का 'इंजरी वार्ड' बना COE, बुमराह से हार्दिक तक लंबी है चोटिल खिलाड़ियों की लिस्ट
भारतीय टीम इस समय श्रीलंका दौरे पर है, जहां 15 अगस्त से दो टेस्ट मैचों की सीरीज शुरू होगी। ...और पढ़ें
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जसप्रीत बुमराह

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अभिषेक त्रिपाठी, जागरण नई दिल्ली। भारतीय टीम इस समय श्रीलंका दौरे पर है, जहां 15 अगस्त से दो टेस्ट मैचों की सीरीज शुरू होगी। उससे पहले शुक्रवार से भारत और श्रीलंका क्रिकेट एकादश के बीच तीन दिवसीय अभ्यास मैच खेला जा रहा है, जिसमें कप्तान शुभमन गिल अंगुली की चोट के कारण खेलने नहीं उतरे।
केवल गिल ही नहीं इस समय भारतीय टीम के अधिकतर खिलाड़ी चोट से जूझ रहे हैं। जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, नीतीश कुमार रेड्डी तो दौरे से बाहर हो चुके हैं, वहीं वॉशिंगटन सुंदर के दूसरे और साई सुदर्शन के पहले टेस्ट में खेलने की चर्चा है, लेकिन अब तक उनकी फिटनेस पर कोई स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
दशकों से बीसीसीआई ने खिलाड़ियों का जो पूल बनाया था, वह पिछले कुछ वर्षों से 'चोट के स्विमिंग पूल' में तब्दील हो गया है, जहां चारों तरफ चोट ही तैरती दिखाई देती हैं। जब भी कोई सीरीज शुरू होने वाली होती है, खिलाड़ियों के चोटिल होकर बाहर होने का सिलसिला शुरू हो जाता है या कोई न कोई सीरीज के बीच में ही चोटिल होकर बाहर हो जाता है। इनमें से विशेषरूप से गेंदबाज और ऑलराउंडरों की संख्या अधिक है।
हाल ही में इंग्लैंड दौरे पर जसप्रीत बुमराह बीच दौरे में चोटिल हो गए थे और अब वह श्रीलंका दौरे से भी बाहर हैं। कई खिलाड़ी तो ऐसे हैं, जिनकी चोट बार-बार उभर जाती है। पहले माना जाता था कि भारतीय टीम का पूल इतना बड़ा और मजबूत है कि आप एक समय पर तीन टीमें भी खिला सकते हो, लेकिन अब ये हालत है कि किसी एक खिलाड़ी का विकल्प चुनने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
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इस समय भारतीय टीम के मौजूदा सेटअप या भविष्य की योजनाओं में शामिल 13 खिलाड़ी ऐसे हैं, जो चोटिल हैं और बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में रिहैबलिटेशन प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। इसका असर निश्चित रूप से भारतीय टीम के प्रदर्शन पर भी पड़ा है। चाहे टेस्ट हो या वनडे हो या फिर टी-20 इन सभी प्रारूप में भारतीय टीम चोटों से जूझती रही है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो कैसे भारतीय टीम का भला होगा, भगवान ही जाने।
खिलाड़ियों की चोट और प्रगति
जसप्रीत बुमराह : बाएं घुटने में सिनोवाइटिस
इंग्लैंड के विरुद्ध तीसरे वनडे से बाहर होने के बाद जसप्रीत बुमराह 30 जुलाई को COE पहुंचे थे। उनके बाएं घुटने के जोड़ में तरल पदार्थ जमा होने की समस्या सामने आई थी। 20 जुलाई को घुटने से तरल पदार्थ निकालने के साथ जोड़ में लुब्रिकेंट इंजेक्शन दिया गया था। चिकित्सक की सलाह के अनुसार, आराम करने के बाद वह COE पहुंचे। यहां विस्तृत जांच के दौरान मैदान पर जागिंग करते समय उन्हें परेशानी महसूस हुई।
एक पैर से किए जाने वाले मूवमेंट की जांच में भी समस्या सामने आई। इसी आधार पर उन्हें श्रीलंका के विरुद्ध टेस्ट सीरीज से बाहर कर दिया गया। COE की रिपोर्ट के मुताबिक बुमराह को मैच फिटनेस हासिल करने से पहले धीरे-धीरे अपनी ताकत और कंडीशनिंग बढ़ानी होगी। इसके बाद कौशल आधारित अभ्यास का भार बढ़ाया जाएगा। उनकी वापसी की कोई निश्चित तिथि फिलहाल नहीं दी गई है।
हार्दिक पांड्या : बाईं जांघ की क्वाड्रिसेप्स चोट
हार्दिक पांड्या ने पुनर्वास के दौरान कौशल आधारित अभ्यास, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग में अच्छी प्रगति दिखाई है। वह 80 से 90 प्रतिशत तीव्रता के साथ गेंदबाजी तक पहुंच गए थे और एक सप्ताह में 12 से 15 ओवर डाल रहे थे। इसी दौरान उनकी दाईं पिंडली में दर्द उभरा। जांच में किसी गंभीर चोट या अन्य बड़ी समस्या के संकेत नहीं मिले। एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए उनकी दौड़ और गेंदबाजी रोक दी गई, जिससे दर्द कम हो सके।
स्थिति में सुधार के बाद हार्दिक ने दोबारा रनिंग कार्यक्रम शुरू कर दिया है और बढ़ते कार्यभार के साथ उनका शरीर अच्छी प्रतिक्रिया दे रहा है। सीओई ने 10 अगस्त से उनका ‘रिटर्न टू बालिंग’ कार्यक्रम दोबारा शुरू करने की योजना बनाई है। इसके बाद धीरे-धीरे गेंदबाजी का कार्यभार बढ़ाया जाएगा।
नीतीश कुमार रेड्डी : बाईं जांघ की क्वाड्रिसेप्स चोट
नीतीश कुमार रेड्डी पुनर्वास कार्यक्रम पर अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और उन्होंने सफलतापूर्वक ‘रिटर्न टू स्किल्स’ चरण में प्रवेश कर लिया है। पिछले सप्ताह उन्होंने 60 से 70 प्रतिशत तीव्रता से गेंदबाजी की और पूरे सप्ताह में कुल 16 ओवर का गेंदबाजी कार्यभार पूरा किया।
अधिक तीव्रता वाली गेंदबाजी की तरफ बढ़ने की तैयारी के तहत वह तेज गति से दौड़ने का अभ्यास भी कर रहे हैं। इसके साथ ही उनका प्रगतिशील स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कार्यक्रम जारी है। अगले चरण में उनकी गेंदबाजी की तीव्रता और कार्यभार धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। सीओई की रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक नीतीश की रिकवरी सही दिशा में है।
साई सुदर्शन : दाएं पैर में स्ट्रेस रिएक्शन
साई सुदर्शन ने अपनी रिकवरी में अच्छी प्रगति की है और बल्लेबाजी तथा क्षेत्ररक्षण का अभ्यास शुरू कर चुके हैं। वह नेट्स में 75 मिनट तक बल्लेबाजी करने में सफल रहे हैं और कंडीशनिंग अभ्यास के दौरान 24 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ भी चुके हैं। हालांकि रिपोर्ट में एक चिंता भी सामने आई है। उनके प्रभावित पैर के अंगूठे में अब भी दर्द महसूस हो रहा है।
कौशल अभ्यास या दौड़ के बाद दर्द कितने समय तक रहता है, इसमें भी अंतर देखा गया है। इसी कारण सीओई उन्हें पूरी तरह फिट घोषित करने से पहले उनकी प्रतिक्रिया को और परखना चाहता है। योजना के मुताबिक लगातार दो दिनों तक लंबे बल्लेबाजी, रनिंग और फील्डिंग सत्र कराने के बाद एमआरआइ स्कैन के आधार पर उनकी आगे की प्रगति तय की जाएगी।
हर्षित राणा : दाईं हैमस्ट्रिंग
हर्षित राणा 20 जुलाई को सीओई पहुंचे थे और उसके बाद से उनकी रिकवरी में अच्छी प्रगति हुई है। रिपोर्ट में विशेष रूप से कहा गया है कि हर्षित ने अपनी रिकवरी रणनीतियों और शरीर के वजन के मामले में सुधार किया है। वह कंडीशनिंग अभ्यास के साथ भी अच्छी तरह तालमेल बैठा रहे हैं।
अब सीओई का लक्ष्य उनकी ताकत, फुर्ती और शरीर की चोट सहने की क्षमता को और बेहतर करना है। इसके साथ निर्धारित समयसीमा के भीतर अपेक्षित बाडी कंपोजिशन हासिल करने पर भी काम किया जा रहा है। पुनर्वास के साथ उनका कौशल आधारित अभ्यास शुरू कर धीरे-धीरे उसका कार्यभार भी बढ़ाया जाएगा।
वॉशिंगटन सुंदर : दाईं हैमस्ट्रिंग
वॉशिंगटन सुंदर भी 20 जुलाई को सीओई पहुंचे थे और पुनर्वास शुरू होने के बाद उनकी स्थिति में लगातार सुधार हुआ है। उन्होंने जागिंग शुरू कर दी है और वर्तमान में 17 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से कंडीशनिंग अभ्यास कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उनकी ताकत, संतुलन और शरीर की स्थिति तथा मूवमेंट को नियंत्रित करने की क्षमता में अच्छा सुधार हुआ है।
आने वाले सप्ताहों में उनके कंडीशनिंग और स्ट्रेंथ प्रशिक्षण का भार धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। इसके बाद एजिलिटी और तेजी से दिशा बदलने वाले अभ्यास भी जोड़े जाएंगे। इसी दौरान कौशल आधारित प्रशिक्षण भी शुरू किया जाएगा। उनकी वापसी को लेकर फिलहाल कोई निश्चित तिथि नहीं दी गई है।
वरुण चक्रवर्ती : बाईं हैमस्ट्रिंग
वरुण चक्रवर्ती ने 20 जुलाई को सीओई में रिपोर्ट किया था और पुनर्वास शुरू होने के बाद उन्होंने अच्छी प्रगति की है। वह वर्तमान में छह ओवर तक स्पाट गेंदबाजी कर रहे हैं। अगले सत्र से उन्हें बल्लेबाजों के सामने आठ ओवर गेंदबाजी कराने की योजना है। कंडीशनिंग सत्र में भी वरुण की स्थिति बेहतर हुई है और उन्होंने मैदान पर किए जाने वाले अभ्यासों का अच्छी तरह पालन किया है।
अगले कुछ सप्ताह उनके लिए महत्वपूर्ण होंगे। इस दौरान उन्हें तेज रफ्तार से दौड़ने, अचानक दिशा बदलने और बढ़ते भार के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से गुजरना होगा। इन चरणों पर शरीर की प्रतिक्रिया के आधार पर पूर्ण गेंदबाजी की ओर उनकी वापसी आगे बढ़ाई जाएगी।
आकाशदीप : कमर के निचले हिस्से में स्ट्रेस फ्रैक्चर
आकाशदीप पुनर्वास के साथ स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कार्यक्रम के अनुरूप अच्छी तरह आगे बढ़ रहे हैं। ‘रिटर्न टू प्ले’ कार्यक्रम पर उनकी प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है। वह फिलहाल 70 से 80 प्रतिशत तीव्रता से गेंदबाजी कर रहे हैं और उनका साप्ताहिक गेंदबाजी कार्यभार 19 ओवर तक पहुंच चुका है।
आने वाले सप्ताह में गेंदबाजी का भार चरणबद्ध तरीके से और बढ़ाया जाएगा। इसके साथ उनकी फील्डिंग और बल्लेबाजी गतिविधियों को भी क्रमवार बढ़ाने की योजना है। यह संकेत है कि आकाशदीप अब पुनर्वास के शुरुआती चरण से आगे निकलकर क्रिकेट से जुड़े वास्तविक कार्यभार की तरफ बढ़ रहे हैं।
हिमांशु सिंह : दाएं घुटने में चोट
मुंबई के गेंदबाज हिमांशु सिंह की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार वह मौजूदा पुनर्वास से और प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ-साथ गेंदबाजी के कार्यभार पर भी काफी अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उन्होंने 28 जुलाई से 50 से 60 प्रतिशत तीव्रता से स्पाट गेंदबाजी शुरू कर दी थी और इस दौरान किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हुई।
अब आने वाले सप्ताहों में उनकी गेंदबाजी की तीव्रता और कुल प्रशिक्षण भार को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। यदि घुटना बढ़ते कार्यभार पर इसी तरह प्रतिक्रिया देता रहा तो वह चरणबद्ध तरीके से पूर्ण गेंदबाजी की ओर बढ़ सकते हैं।
अशोक शर्मा : कमर में स्ट्रेस फ्रैक्चर और 11वीं पसली में फ्रैक्चर
अशोक शर्मा की चोट 13 खिलाड़ियों में गंभीर मामलों में शामिल है। जिंबाब्वे के विरुद्ध 26 जुलाई को तीसरे टी-20 के बाद उनकी कमर के बाएं हिस्से में अचानक तेज ऐंठन हुई थी। शुरुआती उपचार में दवाएं देने के साथ चार दिन आराम कराया गया, लेकिन परेशानी बनी रही। 31 जुलाई को सीओई पहुंचने के बाद उनकी कमर और वक्षीय रीढ़ की एमआरआइ और सीटी स्कैन कराया गया।
तस्वीरें विशेषज्ञ राय के लिए न्यूजीलैंड के स्पाइन विशेषज्ञ डा. रोवन को भेजी गईं। जांच में बाएं एल1 पार्स इंटरआर्टिकुलरिस में एक्यूट स्ट्रेस फ्रैक्चर और बाईं 11वीं पसली में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। अभी वह चोट के शुरुआती चरण में हैं और फ्रैक्चर भरने के लिए चार सप्ताह पूर्ण आराम की जरूरत होगी। इसके बाद सीओई में चरणबद्ध स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कार्यक्रम शुरू होगा।
सुयश शर्मा : घुटने में चोट
सुयश शर्मा लगातार दाएं घुटने में दर्द की शिकायत के बाद छह जुलाई को जांच के लिए सीओई पहुंचे थे। पिछले आइपीएल के बाद उन्होंने गेंदबाजी दोबारा शुरू नहीं की थी। एमआरआइ में दोनों घुटनों में पटेलर इंसर्शनल टेंडिनोपैथी सामने आई।
शुरुआती चरण में तेजी से गेंदबाजी की ओर लौटाने वाला कार्यक्रम अपनाया गया, लेकिन लक्षणों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
इसके बाद 28 जुलाई को पीआरपी इंजेक्शन दिया गया। फिलहाल वह व्यवस्थित पुनर्वास कार्यक्रम से गुजर रहे हैं, जिसमें मुख्य जोर धीरे-धीरे ताकत बढ़ाने पर है। आने वाले सप्ताहों में पहले घुटने की ताकत बढ़ाई जाएगी, उसके बाद प्रभाव वाले अभ्यास शुरू होंगे और अंत में उन्हें गेंदबाजी की तरफ बढ़ाया जाएगा।
युद्धवीर सिंह : दाएं कंधे में चोट
युद्धवीर सिंह के दाएं कंधे की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। सीओई की रिपोर्ट के अनुसार कंधे में होने वाली परेशानी अब काफी कम हो चुकी है। वह कंधे के विशेष पुनर्वास अभ्यास के साथ पूरे शरीर की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कर रहे हैं। मौजूदा कार्यक्रम का उद्देश्य कंधे को मजबूत करने के साथ शरीर की समग्र ताकत और कुल कार्यक्षमता बढ़ाना है।
आने वाले सप्ताहों में कंधे के जोड़ की सहनशीलता और बढ़ते भार के प्रति उसकी प्रतिक्रिया को देखते हुए पुनर्वास और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का स्तर धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। अभी कौशल अभ्यास या पूर्ण गेंदबाजी की वापसी की कोई समयसीमा नहीं बताई गई है।
रियान पराग : दाएं कंधे की सर्जरी के बाद पुनर्वास
दाएं कंधे की सर्जरी के बाद रियान पराग की रिकवरी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार उनके कंधे की गति और ताकत दोनों में सुधार हुआ है। सबसे महत्वपूर्ण प्रगति यह है कि अब उन्हें स्लिंग की जरूरत नहीं है और उसका इस्तेमाल बंद करा दिया गया है। कंधे की गतिशीलता और ताकत में संतोषजनक सुधार के बाद रियान ने अब व्यवस्थित स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कार्यक्रम शुरू कर दिया है।
हालांकि, रिपोर्ट में बल्लेबाजी, गेंदबाजी या थ्रोइंग शुरू करने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। अगले चरण में कंधे की ताकत और गति को सामान्य स्तर तक पहुंचाने पर ध्यान रहेगा और उसके बाद ही क्रिकेट कौशल से जुड़े अभ्यास की दिशा में बढ़ा जाएगा।