दोस्त IPL में चमकते रहे, सारांश जैन ग्राउंड पर घिसते रहे! 26 साल की मेहनत के बाद पूरा हुआ पिता का सपना
इंदौर के सारांश जैन ने 33 साल की उम्र में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया, जो 28 साल में ...और पढ़ें

सारांश जैन

समय कम है?
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कपीश दुबे, इंदौर। बीते 26 साल से हर दिन सुबह घर से निकलकर मैदान जाना, गेंदबाजी करना और लौट आना। उम्र हाथों से रेत की तरह फिसलती जा रही थी। फिर क्रिकेट की चकाचौंध वाले आईपीएल में भी मौके नहीं मिल रहे थे। ऐसे हालात किसी भी क्रिकेटर को हताश कर सकते हैं, लेकिन इंदौर के सारांश डटे रहे।
आंखों में खुद से ज्यादा पिता का सपना घूम रहा था। कैंसर से लड़ रहे पिता का संघर्ष देखकर लगा कि उनका संघर्ष बहुत छोटा है। आखिरकार वह दिन आया जिसका इंतजार था। इंदौर के आफ स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को श्रीलंका के खिलाफ एसएससी मैदान में रविवार से प्रारंभ हुए दूसरे टेस्ट के लिए भारतीय एकादश में शामिल किया गया। वे भारत के 320वें नंबर के टेस्ट क्रिकेटर बने।
सारांश जैन ने 33 साल की उम्र में किया डेब्यू
सारांश ने 33 साल और 145 दिन की उम्र में भारतीय टेस्ट टीम में पदार्पण करते हुए दर्शा दिया की मेहनत व्यर्थ नहीं जाती। वे भारत के लिए टेस्ट पदार्पण करने वाले 28 साल में सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं। उनसे पहले वर्ष 1998 रॉबिन सिंह ने 35 साल और 23 दिन की उम्र में पदार्पण किया था। सारांश से पहले मध्य प्रदेश के ही स्पिनर जलज सक्सेना घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन रिकॉर्ड के बावजूद कभी भारत के लिए नहीं खेले।
जलज के नाम प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 7224 रन और 512 विकेट दर्ज हैं। सारांश प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 2223 रन और 188 विकेट ले चुके हैं। वे मुरली विजय (वर्ष 2008) और मोहम्मद शमी (वर्ष 2013) के बाद पहले ऐसे क्रिकेटर हैं जिसने आईपीएल अनुबंध से पहले भारत के लिए पदार्पण किया है। सारांश के साथ ही क्लब क्रिकेट खेलने वाले रजत पाटीदार आईपीएल में आरसीबी के कप्तान बन चुके थे।
साथी खिलाड़ी आईपीएल में खेल रहे थे
बचपन के दोस्त वेंकटेश अय्यर और आवेश खान आईपीएल में नाम कमा रहे थे। कई जूनियर भी आईपीएल में स्थापित होने लगे थे। मगर सारांश ने हिम्मत नहीं हारी। भारत-ए टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर सारांश ने नाबाद 70 रन और छह विकेट लेते हुए अपनी क्षमता दिखाई थी। तभी से भारत के लिए खेलने की उम्मीद बढ़ गई थी।
सारांश के डेब्यू से पिता हुए खुश
पिता सुबोध जैन बताते हैं, सारांश 26 साल से क्रिकेट खेल रहा है। हमेशा कहता था कि पापा भारत के लिए खेलकर दिखाऊंगा। आज उसने मेरा सपना पूरा कर दिया। हम परिवार के साथ जैन मंदिर गए थे। लौटे तो टीवी पर देखा भी उसे टीम में शामिल किया गया है। हमारे लिए इससे खुशी का पल कोई दूसरा नहीं हो सकता।
सारांश के कोच ने दी प्रतिक्रिया
सारांश के कोच रहे अमय खुरासिया कहते हैं, सारांश की कहानी स्वयं पर विश्वास और स्व अनुशासन की है। उन्हें हर स्तर पर कई सालों तक नजरअंदाज किया गया। मगर उन्होंने कभी हार नहीं मानी। सारांश को यकीन था कि वे प्रदर्शन करेंगे तो टीम में जरूर आएंगे। सारांश मन से नहीं टूटे। मुझे लगता है उन्हें आज से तीन-चार साल पहले ही भारतीय टीम में पदार्पण का मौका मिल जाना चाहिए था।
