कप्तान पडिक्कल के दोहरे शतक के दम पर कर्नाटक ने 11 सालों बाद की फाइनल में एंट्री, जम्मू-कश्मीर के खिलाफ होगा निर्णायक रण
देवदत्त पडिक्कल के दोहरे शतक के दम पर कर्नाटक ने उत्तराखंड के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में 736 रन बनाए थे। पहली पारी में बढ़त के आधार पर ही कर्नाटक ने ...और पढ़ें

कर्नाटक ने फाइनल में बनाई जगह
HighLights
देवदत्त पडिक्कल ने लगाया दोहरा शतक
कर्नाटक ने 11 सालों बाद फाइनल में बनाई जगह
जम्मू-कश्मीर से होगा फाइनल मैच
जागरण संवाददाता, लखनऊ। कर्नाटक ने एक दशक से अधिक समय के लंबे इंतजार के बाद रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जगह पक्की की है। कप्तान देवदत्त पडिक्कल के नेतृत्व में टीम ने बल्लेबाजी व गेंदबाजी समेत सभी विभागों में जबरदस्त प्रदर्शन किया और उत्तराखंड का सपना तोड़कर खिताबी दौर में प्रवेश किया। 24 फरवरी से होने वाले फाइनल में कर्नाटक की भिड़ंत जम्मू कश्मीर से होगी।
कर्नाटक ने पिछली बार 2015 में रणजी ट्रॉफी का फाइनल खेला था और तमिलनाडु को हराया था। अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में 827 रनों के विशाल लक्ष्य के सामने कुणाल चंदेला की टीम मैच के आखिरी दिन गुरुवार को छह विकेट पर 260 रन बनाए और हार स्वीकार की। इस तरह पहली पारी में बढ़त के आधार पर कर्नाटक को खिताबी मुकाबले का टिकट मिला।
कर्नाटक ने बनाए थे 323 रन
इसके पहले कर्नाटक ने गुरुवार को अपने पुराने स्कोर छह विकेट पर 299 रन से पारी को आगे बढ़ाया, लेकिन कुल 24 रन और जोड़कर 323 पर टीम आउट हो गई। केएल राहुल शतक नहीं पूरा कर पाए 85 रन बनाकर नाबाद लौटे। इस दौरान उन्होंने 103 गेंदें खेली और पांच चौके व पांच छक्के लगाए।
मयंक ने झटके 4 विकेट
सुबह के सत्र में पिच से गेंदबाजों को काफी मदद मिल रही थी। यही वजह है कि आखिरी के चार खिलाड़ी विद्याधर पाटिल (07), शिखर शेट्टी (07), विजय कुमार (00) और प्रसिद्ध कृष्ण (00) क्रीज पर टिक नहीं सके। इनमें से तीन विकेट बाएं हाथ के स्पिनर मयंक मिश्र को मिले। मयंक ने कुल चार विकेट झटके, जबकि अभय नेगी को दो, अवनीश सुधा और जगदीश सुचित को एक-एक सफलता मिली। कर्नाटक टूर्नामेंट में अब तक 14 बार फाइनल खेल चुकी है, जिसमें आठ बार विजेता और छह बार उपविजेता बनी।