ईरान में अब भी फंसे हैं 1200 भारतीय छात्र, इंटरनेट बंद होने से रुपये और खाने-पीने का संकट; दूतावास कर रहा मदद
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान में लगभग 1200 भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। हालांकि, वे सुरक्षित हैं और भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। अधिकां ...और पढ़ें

पश्चिम एशिया में महासंग्राम के बीच ईरान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे करीब 1200 भारतीय छात्र अभी भी फंसे हुए हैं।

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अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में महासंग्राम के बीच ईरान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे करीब 1200 भारतीय छात्र अभी भी फंसे हुए हैं। हालांकि राहत की बात है कि सभी सुरक्षित हैं और भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। इंटरनेशनल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ईरान के प्रमुख डाॅ. सैयद हादी शाह के अनुसार सभी छात्र ईरान में मौजूद हैं। हवाई मार्ग खुलते ही इन छात्रों की भारत वापसी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अधिकांश को तेहरान से ईरान के अपेक्षाकृत सुरक्षित शहर कोम पहुंचा दिया गया है। चार छात्राएं जो तेहरान में फंसी हुई हैं, उन्हें भी कोम शहर पहुंचाया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी डाॅ. सैयद हादी शाह ने बताया कि पिछले 12 दिनों में बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। 2800 से अधिक भारतीय छात्र ईरान के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं, इनमें मेडिकल और इस्लामिक स्टडीज के छात्र शामिल हैं। उन्होंने आगे बताया कि इस्फहान, तेहरान, काशान, शिराज और खुजेस्तान सहित कई प्रांतों में पढ़ रहे छात्रों को सुरक्षा के मद्देनजर एकत्रित कर सुरक्षित शहरों में पहुंचाया गया है।
स्टूडेंट्स एसोसिएशन ईरान के प्रमुख ने बताया कि वह इस्फहान विश्वविद्यालय के स्नातक और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के समन्वय में आधिकारिक रूप से जुड़े रहे हैं। भारतीय दूतावास के साथ मिलकर सभी छात्रों की सूची और निकासी की योजना तैयार है, लेकिन अंतिम आदेश हवाई क्षेत्र खुलने के बाद ही संभव होगा।
इधर, ईरान में पढ़ रहे सैयद मेहदी शाह, मोहम्मद राहिल, सैयद अब्बास और हैदर सैयद के कश्मीर निवासी परिजनों ने चिंता जताते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों से बच्चों से ठीक से बात नहीं हो पा रही है। परिजनों के मुताबिक ‘हमें बताया गया है कि बच्चे सुरक्षित हैं और दूतावास के संपर्क में हैं, लेकिन फोन पर बात न हो पाने से चिंता कम नहीं हो रही। हम हर समय खबर का इंतजार कर रहे हैं और बस यही चाहते हैं कि जल्द से जल्द उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाया जाए।’
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परिजनों ने भारत सरकार से अपील की है कि उड़ानें शुरू होते ही सभी छात्रों को प्राथमिकता के आधार पर वापस लाया जाए, क्योंकि मौजूदा हालात में परिवारों के लिए इंतजार करना सबसे मुश्किल हो रहा है। वहीं, ईरान में मेडिकल की पढ़ाई करने गए अफरोज के भाई निजामुद्दीन के रहने वाले शाहिद ने बताया कि ईरान में स्थिति बहुत खराब हो गई है। उसके भाई समेत अन्य लोग बंकरों और घरों में कैद है। केवल धमाके और सायरन की अवाजें सुनाई दे रही है।
वहां इंटरनेट बंद होने के कारण यहां के लोग अपने लोगों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। कुछ दिन पूर्व किसी तरह हुए संपर्क में वहां के विकट स्थिति की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि वहां हजारों प्रवासी भारतीय छात्र और मजदूर है जो कई रातों से सो भी नहीं पाए है। शाहिद ने बताया कि वहां फंसे लोगों को नहीं पता कि कब तक यह युद्ध चलेगा। ऐसे में भारत की सरकार से मांग है कि वह उन लोगों को वहां से सुरक्षित निकालें।