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    राघव चड्ढा ही नहीं एक और नेता भी है AAP की सबसे बड़ी टूट का मास्टरमाइंड, पंजाब जीत में निभाई थी अहम भूमिका

    Updated: Fri, 24 Apr 2026 10:44 PM (IST)

    आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है, जिसमें राघव चड्ढा और संदीप पाठक सहित 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी। यह AAP के इतिहास की सबसे बड़ी टूट है, ज ...और पढ़ें

    भाजपा अध्यक्ष आप नेताओं को पार्टी में शामिल कराने के बाद मुंह मीठा कराते हुए। जागरण

    भाजपा अध्यक्ष आप नेताओं को पार्टी में शामिल कराने के बाद मुंह मीठा कराते हुए। जागरण

    HighLights

    1. राघव चड्ढा सहित 7 राज्यसभा सांसदों ने AAP छोड़ी

    2. संदीप पाठक के छोड़ने ने AAP को सबसे ज्यादा चौंकाया

    3. यह AAP के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी टूट है

    वीके शुक्ला, नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के लिए शुक्रवार का दिन राजनीतिक भूचाल लेकर आया जब पार्टी के प्रमुख चेहरे राघव चड्ढा सहित कुल 7 राज्यसभा सदस्यों ने एक साथ पार्टी छोड़ दी। आप में यह अभी तक की सबसे बड़ी टूट है।

    आप की उतार-चढ़ाव भरी राजनीतिक यात्रा की बात करें ताे आप के गठन से लेकर अब तक का सफर बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने और आंतरिक कलह के कारण भी चर्चा में रहा है।

    यहां एक कमी शुरू से ही महसूस की गई है कि यह राजनीतिक दल असंतोष को संभाल पाने में हर समय असफल रहा है। शायद यही कारण है कि प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास सहित एक-एक कर पार्टी के अधिकांश संस्थापक सदस्यों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया।

    कुछ दिनों पहले राघव चड्ढ़ा के खुलकर विरोध करने के बाद भी पार्टी नेतृत्व सचेत नहीं हुआ, नेता चड्ढा के साथ बयानबाजी में उलझे रहे। वहीं, चड्ढा के साथ ही 10 में से सात और राज्यसभा सदस्य पार्टी छोड़ गए। इससे पार्टी संकट में आ गई है।

    sandeep pathak

    संदीप पाठक को गुलदस्ता भेंट करते भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन। जागरण 

    संदीप पांडे के जाने से जाने आप को सबसे ज्यादा चौंकाया

    इसमें पार्टी के संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संदीप पाठक के पार्टी छोड़ने के फैसले ने आप काे सबसे अधिक चौंकाया है। पाठक आप के बडे़ रणनीतिकार रहे हैं और संकट के समय केजरीवाल के लिए सबसे आगे रहने वाले लोगों में रहे हैं।

    संगठन से जुड़े सूत्रे विश्वस्त सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को आप के सात सांसदों द्वारा पार्टी छोड़ने के घटनाक्रम में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले पाठक ही माने जा रहे हैं। किसी को कानों कान भनक तक नहीं लगी और पूरे मामले में पाठक ने माहौल को तैयार कर दिया।

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    जिसके पंजाब से आप के चार और राज्यसभा सदस्य भाजपा में जाने को तैयार हो गए। जबकि स्वाति मालीवाल मई 2024 में केजरीवाल के आवास पर मारपीट किए जाने के मामले में मुकदमा दर्ज कराने के बाद खुलकर आप के विराेध में आ चुकी थीं।

    raghav chadha

    राघव चड्ढा को गुलदस्ता भेंट करते भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन। जागरण 

    चड्ढा के 'भूचाल' की बात समझ नहीं सकी आप 

    दिल्ली से राज्यसभा सदस्य मालीवाल इसी इंतजार में थीं कि आप काे कैसे और कब अलविदा कहा जाए। पिछले एक माह से चड्ढा भी राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए जाने पर बयान दे देने के बाद से निशाने पर थे। हालांकि चड्ढा ने अपने बयान में किसी बूचाल आने के संकेत दे दिए थे, मगर आप इसे समझ नहीं पाई।

    राजनीतिक विष्लेषक चड्ढा, मालीवाल, पाठक समेत आप के सात राज्यसभा सदस्सों का भाजपा में शामिल हो जाने को अभी तक का सबसे बडा झटका मान रहे हैं।

    चड्ढा और मालीवाल दोनों की राजनीतिक जड़ें पार्टी के शुरुआती दौर से जुड़ी हैं और उन्हें लंबे समय तक पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों में से एक माना जाता था।

    पार्टी बनने से पहले ही पड़ गई थी दरार 

    पार्टी का इतिहास कुछ ऐसा रहा है कि पिछले 13 सालों में आप के कई खास लोग या तो बाहर चले गए या उन्हें बाहर कर दिया गया। आप की शुरुआत 2011-12 के एंटी-करप्शन आंदोलन से हुई, जहां केजरीवाल ने अन्ना हजारे की लीडरशिप में किरण बेदी, प्रशांत भूषण और दूसरों के साथ काम किया।

    पहली दरार पार्टी बनने से पहले ही आ गई थी, जब बेदी और हजारे ने चुनावी राजनीति में आने के फैसले का विरोध किया था। बेदी 2015 में भाजपा में शामिल हो गईं।

    इसके बाद योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास और शाजिया इल्मी के बाद 2017 में मंत्री पद से हटाए जाने के बाद कपिल मिश्रा, 2018 में कवि कुमार विश्वास, और पत्रकार आशुतोष व आशीष खेतान ने भी आप से दूरी बना ली।

    2019 में अल्का लांबा ने आप छोड़ दी। मई 2025 में 13 निगम पार्षदों ने इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी नामक नया मोर्चा बनाया, यह दावा करते हुए कि वे एमसीडी में सत्ता में होने के बावजूद काम नहीं कर पा रहे थे। वहीं, जनवरी 2025 में टिकट न मिलने पर 7 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी।

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