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नेत्रहीनों के लिए नई 'आंखें' बना AI: अब रोशनी से नहीं, बल्कि 'आवाज' से दुनिया दिखाएगा यह स्मार्ट चश्मा

Published: Thu, 07 May 2026 12:21 AM (GMT+05:30)

एआई-आधारित स्मार्ट विजन चश्मा नेत्र दिव्यांगों को आवाज के माध्यम से दुनिया दिखाता है, जिससे उन्हें चलने-फिरने, पढ़ने और समझने में मदद मिलती है।

एआई-आधारित स्मार्ट विजन चश्मा नेत्र दिव्यांगों को आवाज के माध्यम से दुनिया दिखाता है। जागरण

एआई-आधारित स्मार्ट विजन चश्मा नेत्र दिव्यांगों को आवाज के माध्यम से दुनिया दिखाता है। जागरण

HighLights

  1. एआई चश्मा नेत्र दिव्यांगों को आवाज से दुनिया दिखाता है।

  2. चलने-फिरने, पढ़ने, समझने में यह तकनीक सहायक है।

  3. शिक्षा, रोजगार, आत्मनिर्भरता के लिए नए अवसर खोलता है।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एआइ आधारित स्मार्ट विजन चश्मा नेत्र दिव्यांगों के लिए नई उम्मीद बन कर आया है। यह उन्हें आंख नहीं, आवाज से दुनिया दिखा रहा है। एआइ, कैमरा और रियल टाइम आडियो गाइडेंस से इसने उनके लिए चलने-फिरने के साथ पढ़ना और समझना आसान कर दिया है।

कैमरे व एआइ की मदद से सामने के दृश्य को पहचान उसे तुरंत आवाज में बदल देता है जैसे ‘सामने सीढ़ी है’, ‘दरवाजा बाईं ओर है’ या ‘कोई व्यक्ति पास खड़ा है।’ इसमें टेक्स्ट पढ़कर सुनाने, चेहरा और वस्तु पहचाननें, रास्ता बताने और आपात स्थिति में सहायता की मांग करने की भी व्यवस्था है। इसलिए यह चश्मा नेत्र दिव्यांगों के लिए ‘देखने’ का नया तरीका बन गया है।

स्मार्ट विजन कुछ चश्मों की डंडी में कान के पीछे की हड्डी में हल्के कंपन (ध्वनि तरंगों) के माध्यम से मस्तिष्क तक आवाज पहुंचाने की तकनीक होती है, इस तकनीक में कान के पर्दे को बाईपास कर दिया जाता है। इससे कान खुले रहते हैं और रियल टाइम में आसपास की आवाज भी सुनाई देती रहती हैं।

इससे पढ़ना, पहचानना और सुरक्षित चलना आसान हो जाता है, देश में 50 लाख से अधिक लोग स्थायी दृष्टिबाधिता से जूझ रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई, रोजगार और दैनिक जीवन प्रभावित होता है। ऐसे में यह तकनीक ‘देखने, सुनने और समझने’ का नया तरीका है।

एम्स चिकित्सकों के अनुसार, यह तकनीक न केवल दैनिक जीवन को सरल बनाती है, बल्कि शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी खोलती है। चश्मे की कीमत करीब 35 हजार प्रति चश्मा बताई गई। एम्स आरपी सेंटर की प्रमुख प्रो. राधिका टंडन के अनुसार एआइ आधारित यह तकनीक लोगों की निर्भरता कम कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है।

एम्स नई दिल्ली के अध्ययनों के अनुसार दिल्ली में 60 लाख लोग दृष्टि संबंधी किसी न किसी समस्या से ग्रसित हैं, जबकि 12 लाख के करीब गंभीर दृष्टिबाधिता से प्रभावित हैं। राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टिबाधिता सर्वे के अनुसार देश में 3.5 करोड़ लोग मध्यम से गंभीर दृष्टिबाधिता से जूझ रहे हैं।

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