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    दिल्ली एम्स का बड़ा शोध: अब खून की जांच से होगी अल्जाइमर की शुरुआती संकेतों की पहचान

    Updated: Sun, 01 Feb 2026 01:31 AM (IST)

    एम्स दिल्ली के वैज्ञानिक खून की जांच से अल्जाइमर के शुरुआती संकेतों का पता लगाने पर शोध कर रहे हैं। वे प्लाज्मा स्मॉल एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल्स में प्र ...और पढ़ें

    खून की जांच से पता किया सकेगा अल्जाइमर जैसी घातक बीमारी के संकेत।

    खून की जांच से पता किया सकेगा अल्जाइमर जैसी घातक बीमारी के संकेत।

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    अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। अब खून की जांच से पता किया सकेगा अल्जाइमर जैसी घातक बीमारी के संकेतों को ऐसा अल्जाइमर की समय पर पहचान को लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के वैज्ञानिक महत्वपूर्ण शोध से संभव होगा। जिसे पांचवें एम्स रिसर्च डे पर प्रस्तुत किया गया।

    एम्स वैज्ञानिकों के इस अध्ययन में खून में मौजूद ‘प्लाज्मा स्माल एक्स्ट्रासेल्युलर वेसिकल्स’ के प्रोटीन पैटर्न का विश्लेषण कर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि अल्जाइमर रोग के शुरुआती संकेत शरीर में कैसे दिखाई देते हैं। शोध के आरंभिक नतीजे उत्साहजनक हैं। एम्स का यह शोध न सिर्फ चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से अहम है, बल्कि उन लाखों परिवारों और लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण है जो अल्जाइमर जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं।

    बायोफिज़िक्स विभाग और जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग का शोध

    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के बायोफिजिक्स विभाग और जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग के संयुक्त सहयोग से किया गया। वरिष्ठ वैज्ञानिक बायोफिजिक्स विभाग के डा. सरोज कुमार शोध को वैज्ञानिक दिशा और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। मुख्य शोधकर्ता डा. रिषभ सिंह हैं, जो बायोफिजिक्स विभाग से जुड़े हैं और अल्जाइमर रोग में प्लाज्मा आधारित स्माल एक्स्ट्रासेल्युलर वेसिकल्स पर काम कर रहे हैं। जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग के एडीशनल प्रोफेसर डा. प्रसुन चटर्जी ने इस शोध में अल्जाइमर और माइल्ड काग्निटिव इम्पेयरमेंट (एमसीआइ) से जुड़े मरीजों के क्लिनिकल और चिकित्सकीय पक्ष को देख रहे हैं।

    शोध का आधार

    शोध में वैज्ञानिकों ने खून में मौजूद बेहद सूक्ष्म कणों ‘एक्स्ट्रासेल्युलर वेसिकल्स’ पर ध्यान केंद्रित किया। ये कण शरीर की कोशिकाओं द्वारा छोड़े जाते हैं और अंदरूनी बदलावों की जानकारी अपने साथ लेकर चलते हैं। रिषभ सिंह के अनुसार ‘अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी में इन वेसिकल्स के भीतर मौजूद प्रोटीन का स्वरूप बदलने लगता है। इन्हीं बदलावों से बीमारी के शुरुआती संकेत मिल सकते हैं।’

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    आम लोगों के लिए अहम

    वर्तमान में अल्जाइमर की पहचान अक्सर तब होती है, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। क्योंक महंगे स्कैन और जटिल जांच प्रक्रियाएं हर मरीज के लिए संभव नहीं होतीं। डा. प्रसुन चटर्जी के मुताबिक ‘अगर खून की जांच से ही बीमारी के शुरुआती लक्षण पकड़ में आ जाएं तो बुजुर्ग मरीजों की समय रहते देखभाल और इलाज की योजना बनाना आसान हो सकता है।’

    भविष्य की राह

    बायोफिजिक्स विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सरोज कुमार ने बताया कि इस शोध का मकसद ऐसे बायोमार्कर की पहचान करना है, जो बिना दर्द और जटिल प्रक्रिया के अल्जाइमर की शुरुआती जानकारी दे सकें। हालांकि यह अध्ययन अभी शोध स्तर पर है, लेकिन उम्मीद है कि आगे चलकर यह तकनीक अल्ज़ाइमर की पहचान और प्रगति को समझने में एक भरोसेमंद साधन बनेगी।

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