एम्स दिल्ली में 'अहम की लड़ाई' से बंद हुई कीमोथेरेपी सेवा, कैंसर मरीज परेशान
एम्स दिल्ली में फरवरी 2023 से रेडिएशन आंकोलाजी विभाग में कीमोथेरेपी सेवा बंद कर दी गई है, जिससे कैंसर रोगियों को भारी परेशानी हो रही है। यह व्यवस्था 1 ...और पढ़ें

HighLights
1956 से दिल्ली एम्स में चल रही थी यह व्यवस्था, 2023 में इसे अचानक से कर दिया गया बंद
देश के अन्य एम्स, पीजीआई, मेडिकल कॉलेज व प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में है यह व्यवस्था
हर साल करीब छह हजार कीमोथेरेपी प्रभावित, लंबी वेटिंग से मरीज निजी केंद्रों की ओर मजबूर
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। मानव संसाधन की कमी और व्यवस्थागत चुनौतियों से जूझ रहे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली (एम्स) में रेडिएशन आंकोलाजी में कीमोथेरेपी बंद करने से कैंसर के गंभीर रोगियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
दरअसल ऐसा फरवरी 2023 में एम्स प्रबंधन ने कार्यालय आदेश से 1956 से कैंसर रोगियों के हित में निर्बाध चली आ रही रेडिएशन आंकोलाजी में कीमोथेरेपी को बिना कोई ठोस कारण बताए अचानक से बंद कर यह जिम्मेदारी पूरी तरह मेडिकल आंकोलाजी विभाग को सौंप दी थी और रेडिएशन आंकोलाजी के डॉक्टरों, रेजिडेंट और नर्सिंग स्टाफ को यह सेवा देने से रोक दिया गया, उल्लंघन की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया।
हर साल करीब छह हजार कीमोथेरेपी प्रभावित
इस बदलाव के पीछे कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया पर, एम्स सूत्रों के अनुसार यह फैसला दोनों विभागों के बीच चल रहे कार्यक्षेत्र विवाद और एम्स के एक पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारी की जिद का परिणाम था। इस फैसले से एम्स रेडिएशन आंकोलाजी में हर वर्ष होने वाली करीब छह हजार कीमोथेरेपी सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
अब रेडिएशन आंकोलाजी के मरीजों को कीमोथेरेपी के लिए मेडिकल आंकोलाजी में भेजा जाता है, जहां पहले से ही मरीजों का भारी दबाव है। अब लंबी प्रतीक्षा सूची के कारण कई मामलों में उपचार आरंभ होने में देरी हो रही है। यह स्थिति कैंसर योगियों के उपचार के लिए घातक है।
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एम्स प्रबंधन के इस फैसले पर कैंसर उपचार करा रहे मरीजों ने पेश आ रही दिक्कतों का हवाला देते हुए रेडिएशन आंकोलाजी में कीमोथेरेपी पुन: आरंभ कराने की कई बार मांग की, परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई। एम्स के चिकित्सकों का कहना है कि एक ही विभाग में दोनों उपचार उपलब्ध होने से समन्वय बेहतर रहता था और मरीजों को बार-बार अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते थे।
देश में कहां-कहां है यह व्यवस्था?
विशेष यह कि देश के अन्य एम्स सहित पीजीआई, मेडिकल कॉलेज और सभी प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में रेडिएशन आंकोलाजी में कीमोथेरेपी की व्यवस्था है। विशेषज्ञों का कहना है कि एम्स नई दिल्ली को छोड़कर देश के अधिकांश बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में रेडिएशन आंकोलाजी विभाग में ही कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है, ताकि मरीजों को समन्वित उपचार मिल सके।
पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआइएमइआर) चंडीगढ़, संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) लखनऊ जैसे संस्थानों सहित देश भर के एम्स व मेडिकल कॉलेज में यह व्यवस्था लागू है।
ऐसे में एम्स नई दिल्ली में इसे बंद किया जाना सवाल खड़े करता है। इस संबंध में एम्स के निदेशक से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन न उठने से उनसे बात नहीं हो सकी। इस पर उन्हें संदेश भेजा गया है। उनका पक्ष प्राप्त होते ही उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।