20% बेड खाली फिर भी AIIMS से लौटाए जाते हैं मरीज, सभी OT चलें तो 25% सर्जरी तुरंत; रिपोर्ट में खुलासा
एम्स में 20% बेड खाली और कई ऑपरेशन थिएटर अप्रयुक्त होने के बावजूद मरीजों को लौटाया जा रहा है, जिससे सर्जरी की प्रतीक्षा सूची लंबी हो रही है। ...और पढ़ें
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दिल्ली एम्स। जागरण आर्काइव

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (Delhi AIIMS) में 20 प्रतिशत बेड खाली हैं फिर भी मरीजों को लौटाया जा रहा है। सर्जरी के मरीजों की लंबी प्रतीक्षा सूची लगातार बनी हुई है, बावजूद इसके 26 बड़े ऑपरेशन थियेटरों से काम ही नहीं लिया जाता।
अगर सभी ओटी चलें तो एम्स में 25 प्रतिशत सर्जरी तुरंत संभव हो सकेगीख मरीजों की प्रतीक्षा सूची में भी काफी कमी आ जाएगी। यह स्थिति बताती है कि संसाधनों की उपलब्धता और उनके उपयोग के बीच यह का अंतर का सीधा असर एम्स की सेवा व व्यवस्था पर पड़ रहा है, जिसका खमियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ा रहा है।
जब इलाज एम्स में तो भर्ती किसी और अस्पताल में क्यों?
संसदीय समिति मार्च 2026 की रिपोर्ट व बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर सामने आया वीडियो दिल्ली एम्स की बिगड़ती हालत की पुष्टि करने को काफी हैं। संसदीय समिति की मार्च 2026 की रिपोर्ट बताती है कि एम्स में 20 प्रतिशत बेड खाली हैं। बावजूद इसके इमरजेंसी में मरीजों को लौटाया जा रहा है, उनका उपचार करने के उन्हें सफदरगंज व अन्य अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है।
इनमें बड़ी संख्या वह मरीज भी शामिल होते हैं, जिनका उपचार एम्स में ही चल रहा होता है। प्रश्न यह उठता है कि जब उपचार एम्स में चल रहा है तो भर्ती किसी अन्य अस्पताल में क्यों हों। मार्च 2026 में पेश संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार एम्स में करीब 20 प्रतिशत बेड उपयोग में ही नहीं हैं, इसके बावजूद इमरजेंसी में मरीजों को बेड न होने का हवाला देकर लौटाए जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
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संसदीय समिति की रिपोर्ट में और क्या खुलासा हुआ?
रिपोर्ट के मुताबिक, एम्स के कुल 4178 बेड में से लगभग 843 बेड खाली पड़े हैं। 433 आइसीयू बेड में से 81 उपयोग में नहीं हैं। समिति ने इसे संसाधनों के अपूर्ण उपयोग का गंभीर मामला बताया है, जिससे अस्पताल की क्षमता का पूरा लाभ आम मरीजों को नहीं मिल पा रहा।
मरीजों का दबाव इस स्थिति को और गंभीर बना देता है। एम्स में हर साल 35 से 40 लाख से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं, इनमें से तीन से साढ़े तीन लाख मरीज भर्ती होते हैं। 15 से 20 लाख मरीज इमरजेंसी सेवाओं का सहारा लेते हैं। इसके अलावा 40 से 50 लाख लैब जांच और 10 से 15 लाख रेडियोलाजी जांच प्रतिवर्ष की जाती हैं।
एम्स के बाहर लंबी कतारों के वीडियो आए सामने
संसाधन और उसके उपयोग के बीच का अंतर का जमीनी स्तर पर असर सीधे मरीजों पर दिख रहा है। इमरजेंसी में पहुंचे कई मरीजों को बेड उपलब्ध न होने के कारण लौटाया जाता है या अन्य अस्पतालों में भेजा जाता है। गाजियाबाद के एक मरीज सुभाष यादव के परिजनों के अनुसार, घंटों इंतजार के बाद भी भर्ती नहीं मिल सकी। इसी तरह कई मरीजों को सर्जरी के लिए महीनों बाद की तारीख दी जा रही है।
बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भी एम्स के बाहर लंबी कतारें, स्ट्रेचर पर इंतजार करते मरीज और परेशान परिजन नजर आए हैं। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है, दैनिक जागरण इसकी पुष्टि नहीं करता। लेकिन यह सब एम्स की जमीनी हालात की ओर संकेत जरूर करते हैं।
एम्स में फैकल्टी के कितने पद खाली?
संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार एम्स में फैकल्टी के 1306 स्वीकृत पदों में से 35 से 39 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जबकि नान फैकल्टी के 13,911 पदों में भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं। एम्स में उपलब्ध बेड, आइसीयू और ऑपरेशन थिएटर का पूरा उपयोग नहीं हो पाने की एक बड़ी वजह इसे भी माना जा रहा है।
एम्स में नई भर्तियों और कई वर्षों से लंबित कैडर रिव्यू की मांग को एम्स आफिसर्स एसोसिएशन मार्च माह में प्रदर्शन भी किया था। एसोसिएशन ने कैडर रिव्यू लंबित होने और भर्ती प्रक्रिया धीमी रहने पर चिंता जताई है। संसदीय समिति ने भी व्यवस्था में सुधार को खाली पदों को जल्द भरे जाने की सिफारिश की है ताकि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
संसदीय समिति की रिपोर्ट पर क्या बोला एम्स प्रबंधन?
एम्स प्रबंधन ने संसदीय समिति की रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों को पुराना बताया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) प्रबंधन के अनुसार पिछले वर्ष में करीब 900 बेड बढ़ाए गए और कुछ विभाग मस्जिद मोठ कैंपस में शिफ्ट कर उनकी क्षमता लगभग दोगुनी की गई।
दावा किया है कि एम्स में बिस्तरों की कमी के कारण मरीजों को कोई परेशानी नहीं हो रही है। बताया गया कि मुख्य परिसर में नवीनीकरण जारी है। फिलहाल 60–70 बेड की अस्थायी कमी है, लेकिन सेवाएं बेहतर हुई । जितने भी बेड उपलब्ध हैं सभी को पूरा इस्तेमाल किया जा रहा है।