अब गलत इलाज का खतरा नहीं: AIIMS ने खोजी नई तकनीक, आंतों की टीबी और क्रोहन डिजीज की होगी सटीक पहचान
एम्स दिल्ली ने 'इम्यूनोलॉजिकल सिग्नेचर' तकनीक विकसित की है, जो आंतों की टीबी और क्रोहन रोग के बीच सटीक पहचान में मदद करती है। इससे गलत निदान का खतरा क ...और पढ़ें

AIIMS दिल्ली ने नई तकनीक विकसित की है। फोटो: आर्काइव
HighLights
एम्स ने 'इम्यूनोलॉजिकल सिग्नेचर' तकनीक विकसित की है
यह आंतों की टीबी और क्रोहन रोग में सटीक अंतर बताएगी
गलत निदान का खतरा कम होगा, सही उपचार सुनिश्चित होगा
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली के शोध ने आंतों की टीबी और क्रोहन डिजीज की अलग पहचान और अंतर को आसान कर दिया है।
सकी ‘इम्यूनोलाजिकल सिग्नेचर’ आधारित तकनीक ने अब जहां गलत पहचान का खतरा कम हुआ है, वहीं सही उपचार की उम्मीद जाग्रत हुई है। विशेषज्ञों ने इसे क्लिनिकल डायग्नोसिस में उपयोगी बताया गया है।
विश्व इम्यूनोलाजी दिवस पर एम्स नई दिल्ली के गैस्ट्रोएंटेरोलाजी विभाग के प्रोफेसर विनीत आहूजा ने बताया कि दोनों बीमारियों के लक्षण अक्सर एक जैसे होते हैं, जिससे सही पहचान में दिक्कत आती है।
इम्यून सिग्नेचर तकनीक शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया के पैटर्न को समझकर बीमारी की सटीक पहचान में मदद करती है, जिससे मरीजों को सही इलाज जल्दी मिल सकता है।
बायोकेमिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कल्पना लुथरा ने बताया कि संस्थान लंबे समय से इम्यूनोलाजी रिसर्च में अग्रणी रहा है और हाइब्रिडोमा तकनीक जैसी उपलब्धियों ने आधुनिक चिकित्सा को मजबूत आधार दिया है। अतिरिक्त प्रोफेसर प्रज्ञान आचार्य ने लिवर रोगों में इम्यून सिस्टम की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
टीबी बनाम क्रोहन
आंतों की टीबी
- कारण: बैक्टीरिया (टीबी इंफेक्शन)
- उपचार: एंटी-टीबी दवा
- फैलाव: संक्रामक
क्रोहन
- कारण: इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी
- इलाज: इम्यूनो-सप्रेसिव दवा
- फैलाव: संक्रामक नहीं
क्यों जरूरी सही पहचान?
- गलत पहचान = गलत दवा
- टीबी को क्रोहन समझना - इंफेक्शन बढ़ा सकता है
- क्रोहन को टीबी समझा - लंबा इलाज
क्या होता क्रोहन?
क्रोहन डिजीज आंतों की सूजन संबंधी बीमारी है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम पाचन तंत्र (खासकर छोटी और बड़ी आंत) पर हमला कर देता है। इससे आंतों में सूजन, दर्द, दस्त, वजन कम होना और कभी-कभी खून आना जैसी समस्याएं होती हैं।