NCR में अब उड़ेंगी टैक्सियां, छतों से भरेंगे उड़ान! गुरुग्राम-दिल्ली-नोएडा में Air Taxi कॉरिडोर का प्लान
CII की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-NCR में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए एयर टैक्सी सेवा एक बड़ा समाधान हो सकती है। इमारतों की छतों को वर्टिपोर्ट के रूप ...और पढ़ें
-(1)-1770730227231-1770730256204_m.webp)
घंटों का सफर मिनटों में होगा पूरा, गुरुग्राम-दिल्ली-नोएडा में एयर टैक्सी कॉरिडोर से बदलेगा सफर। फोटो: एआई जनरेटेड

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में बढ़ते ट्रैफिक जाम और घंटों लंबी यात्रा से निजात दिलाने के लिए एयर टैक्सी सेवा को भविष्य का बड़ा समाधान माना जा रहा है।
उद्योग संगठन Confederation of Indian Industry (CII) की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इमारतों की छतों का इस्तेमाल एयर टैक्सी के टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए किया जाए, तो शहरी परिवहन की बड़ी बाधाएं दूर की जा सकती हैं और लोगों का ट्रैवल टाइम मिनटों में सिमट सकता है।
CII की रिपोर्ट ‘Navigating the Future of Advanced Air Mobility in India’ में दिल्ली-NCR को एयर टैक्सी के पायलट क्षेत्र के तौर पर पेश किया गया है। इसमें गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने वाले 65 से 75 किलोमीटर लंबे संभावित हवाई कॉरिडोर का मॉडल भी शामिल है।
प्रस्तावित रूट और प्रमुख स्टेशन
- DLF फेज-3
- Cyber Hub
- IGI एयरपोर्ट (एयरस्पेस का उपयोग नहीं)
- कनॉट प्लेस (सेंट्रल दिल्ली)
- नोएडा सेक्टर-18
- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, जहां इस रूट पर सड़क से सफर करने में पीक ट्रैफिक के दौरान 2 से 2.5 घंटे लग जाते हैं, वहीं एयर टैक्सी से यही दूरी 20 मिनट से भी कम समय में तय की जा सकती है।
एयर टैक्सी से यात्रा समय में बड़ी कटौती
गुरुग्राम से सेंट्रल दिल्ली
- सड़क मार्ग: 60–90 मिनट
- एयर टैक्सी: 12 मिनट से कम
कनॉट प्लेस से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
- सड़क मार्ग (पीक ट्रैफिक): 2–2.5 घंटे
- एयर टैक्सी: करीब 20 मिनट
eVTOL तकनीक से बदलेगा शहरी सफर
रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) तकनीक को भविष्य की शहरी परिवहन प्रणाली का अहम हिस्सा बताया गया है। ये एयर टैक्सियां पारंपरिक हेलिकॉप्टर की तुलना में कम शोर, कम प्रदूषण और बेहतर सुरक्षा के साथ उड़ान भरने में सक्षम होंगी। पूरी तरह इलेक्ट्रिक होने के कारण इन्हें पर्यावरण-अनुकूल भी माना जा रहा है।
खबरें और भी
-1770730465404.png)
छतें बन सकती हैं वर्टिपोर्ट
CII का सुझाव है कि दिल्ली-NCR में-
- अस्पतालों,
- टेक पार्कों,
- व्यावसायिक परिसरों
- और ऊंची रिहायशी इमारतों
की छतों को ‘वर्टिपोर्ट’ के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे जमीन अधिग्रहण की जरूरत नहीं पड़ेगी और इंफ्रास्ट्रक्चर जल्दी तैयार किया जा सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार, रूफटॉप वर्टिपोर्ट से परियोजना लागत में 30–50% तक की कमी आ सकती है। हालांकि, मौजूदा नियमों के तहत छतों से नियमित व्यावसायिक उड़ानों की अनुमति अभी स्पष्ट नहीं है, जिसके लिए नीतिगत बदलाव जरूरी होंगे।
-1770730487608.png)
क्लीन एनर्जी पर फोकस
- रूफटॉप सोलर पैनल
- बैटरी स्टोरेज सिस्टम
- ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन अनिवार्य
सुरक्षा और फायर नॉर्म्स
DGCA के अनुसार अनिवार्य मानक:
- स्ट्रक्चरल सेफ्टी
- फायर सेफ्टी
- इमरजेंसी इवैक्यूएशन प्रोटोकॉल
- बाधा-मुक्त क्लियरेंस
- शहरी एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से इंटीग्रेशन जरूरी
रिहायशी और संवेदनशील इलाकों में:
- अकॉस्टिक जोनिंग
- नाइट कर्फ्यू
- लगातार नॉइज मॉनिटरिंग
चरणबद्ध तरीके से लागू करने का सुझाव
रिपोर्ट में एयर टैक्सी सेवाओं को सीधे यात्री परिवहन से शुरू करने के बजाय चरणबद्ध रणनीति अपनाने की सिफारिश की गई है। पहले ड्रोन डिलीवरी, फिर मेडिकल लॉजिस्टिक्स, अंग परिवहन और एयर एंबुलेंस सेवाओं के जरिए तकनीक को परखा जाए। इसके बाद आम यात्रियों के लिए एयर टैक्सी सेवा शुरू की जा सकती है।
निवेश और नियमों पर भी जोर
CII ने एडवांस्ड एयर मोबिलिटी सेक्टर के लिए
- वेंचर लीजिंग सिस्टम,
- सेक्टर-विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर फंड,
- और नए एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट नियम
लाने की जरूरत बताई है। खासतौर पर शहरों में कम ऊंचाई पर उड़ान को सुरक्षित बनाने, चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग और मेंटेनेंस सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया गया है।
-1770730535677.png)
एयर टैक्सी की चुनौतियां भी कम नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-NCR में एयर टैक्सी सेवा की राह में कई अड़चनें भी हैं-
- छतों पर वर्टिपोर्ट के लिए स्पष्ट अनुमति का अभाव।
- नए एयरस्पेस और सुरक्षा नियमों की जरूरत।
- खराब मौसम और तेज हवाओं में उड़ान सुरक्षा।
- शुरुआती दौर में अधिक किराया होने की आशंका।
2028 तक उड़ान की उम्मीद
रिपोर्ट का अनुमान है कि भारत में 2028 तक एयर टैक्सी सेवाएं शुरू हो सकती हैं। दिल्ली-NCR, मुंबई और बेंगलुरु को इसके संभावित पायलट क्षेत्र माना जा रहा है। अगर दिल्ली-NCR में यह मॉडल सफल होता है, तो इसे देश के अन्य बड़े महानगरों में भी लागू किया जा सकता है।
एयर टैक्सी रूट इन क्षेत्रों से दूर रहेंगे
- IGI एयरपोर्ट एयरस्पेस
- दिल्ली कैंटोनमेंट
- लुटियंस जोन
- अन्य रेड जोन
नोट: डिटूर के कारण दूरी बढ़ सकती है, लेकिन यात्रा समय सड़क मार्ग से फिर भी कहीं कम रहेगा।
दिल्ली-NCR के लिए एयर टैक्सी कॉरिडोर सिर्फ एक तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि ट्रैफिक जाम से जूझ रहे महानगर के लिए घंटों की यात्रा को मिनटों में बदलने की बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें- दिल्ली-NCR में 157 मॉनिटरिंग स्टेशन पकड़ेंगे Pollution की जड़, प्रदूषण नियंत्रण के लिए CAQM का फ्यूचर प्लान