अजीत भारती ने SC/ST केस में गिरफ्तारी से बचने के लिए मांगी अग्रिम जमानत, कोर्ट का दिल्ली पुलिस को नोटिस
यूट्यूबर अजीत भारती ने जातिसूचक टिप्पणी मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। कोर्ट ...और पढ़ें

यूट्यूबर अजीत भारती ने दायल की अग्रिम जमानत की याचिका। फोटो: आर्काइव
HighLights
यूट्यूबर अजीत भारती ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की
कोर्ट ने पुलिस को नोटिस जारी कर जांच अधिकारी को तलब किया
मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की गई है
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। यूट्यूबर अजीत भारती ने जातिसूचक और आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में दर्ज मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है।
अजीत भारती की याचिका पर 25 अगस्त को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने पुलिस को नोटिस जारी करते हुए जांच अधिकारी को तलब किया है। मामले में अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।
भारती की ओर से अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई और प्रत्युष प्रसन्ना ने दलील दी कि FIR में लगाए गए आरोप प्रथमदृष्टया अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध के आवश्यक तत्व पूरे नहीं करते हैं।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि पुलिस ने अजय भारती को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 35(3) के तहत नोटिस नहीं दिया है।
अदालत ने कहा कि यदि जांच अधिकारी ऐसा नोटिस जारी करता है तो उसकी प्रति अदालत में भी पेश की जाए। इससे अदालत नोटिस जारी करने की तारीख और एससी-एसटी कानून के तहत अपराध के आवश्यक तत्वों को लेकर जांच अधिकारी की प्रथमदृष्टया संतुष्टि की स्थिति देख सकेगी।
यूट्यूब कार्यक्रम को लेकर दर्ज हुई FIR
मामला दिल्ली के नार्थ एवेन्यू थाने में दर्ज FIR से जुड़ा है। शिकायत आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध ने दी थी।
शिकायत में आरोप है कि 22 अगस्त को प्रसारित यूट्यूब कार्यक्रम में भारती ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद और डा. भीमराव आंबेडकर को लेकर जातिसूचक एवं आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। महिलाओं के संबंध में भी अश्लील टिप्पणी और धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के अनुसार कार्यक्रम में जाति, आरक्षण, विवाह और अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों को लेकर लगातार टिप्पणियां की गईं और जातिगत पहचान का कथित तौर पर अपमानजनक एवं अपमानित करने वाले संदर्भ में इस्तेमाल किया गया।
FIR में एससी-एसटी अधिनियम के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(सी) और 351(3) लगाई गई हैं।
भारती बोले, नहीं की जातिसूचक टिप्पणी
अजीत भारती ने जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोपों से इन्कार किया है। उनका कहना है कि उनकी टिप्पणियां उनकी मां और बहन के संबंध में की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के जवाब में थीं।
उन्होंने अदालत में कहा है कि चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कोई जातिसूचक गाली या टिप्पणी नहीं की गई, इसलिए एससी-एसटी अधिनियम के तहत मामला नहीं बनता।
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