IB कर्मी अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन के लिए मांगी फांसी, 31 को आएगा सजा पर फैसला
2020 के दिल्ली दंगों में IB कर्मी अंकित शर्मा हत्याकांड के दोषियों की सजा पर कड़कड़डूमा कोर्ट में आज सुनवाई हुई। ...और पढ़ें
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कड़कड़डूमा कोर्ट।
HighLights
IB कर्मी अंकित शर्मा हत्याकांड मामले में आज सुनवाई हुई।
अभियोजन और बचाव पक्ष अपनी दलीलें अदालत में रखीं।
जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपितों की सजा पर सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट में सुनवाई हुई।
अदालत ने दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब 31 जुलाई को दोषियों पर सजा का एलान होगा
विशेष लोक अभियोजक ने कहा, 'मामले में विक्टिम्स की स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। अंकित के शरीर पर 51 घाव मिले थे। उन पर ब्रुटली हमला किया गया। जानवरों की तरह हमला हुआ, इसलिए उन्हें मैक्सिमम पनिशमेंट के तहत मौत की सजा दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा जिस तरह से योजना बनाकर अंकित की हत्या की थी वो कोल्ड ब्लडेड मर्डर और रेरेस्ट ऑफ द रेयर था।
नरमी बरतने की कोई गुंजाइश नहीं
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने कहा दोषियों ने कोर्ट में जो अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर जो हलफनामे दाखिल किए हैं, उसमें सजा कम करने या नरमी बरतने की कोई गुंजाइश नहीं है।
इस मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषी हैं। चार अन्य दोषी जावेद, अनस, कासिम और नाजिम हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का जिक्र किया
बचाव पक्ष के वकीलों ने अपनी दलीलों में कहा कि आईपीसी की धारा 149 के तहत ताहिर हुसैन के सभी आरोप सिद्ध हुए गईं। सिर्फ सर्कम्स्टेंस के सभी आरोपों में दोष सिद्ध हुआ है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के कई निर्णयों का भी जिक्र करते हुए कहा कि मामला रेरेस्ट ऑफ द रेयर का नहीं है।
बचाव पक्ष ने कहा कि आईपीसी 505 यानी अफवाह फैलाकर विद्रोह करने के आरोप में ताहिर हुसैन को रिहा किया है। सरकमस्टांशियल एविडेंस पर उन्हें दोषी पाया गया है। ऐसे में डेथ सेंटेंस नहीं बनती।
हत्या की कोई मंशा या योजना नहीं थी
ताहिर के वकील राजीव मोहन ने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जिन फैसलों में मृत्युदंड दिया गया, उनमें और ताहिर के केस में काफी अंतर है। जब ताहिर आईपीसी 120 बी यानी आपराधिक साजिश के आरोप से बरी हो चुका है तो इसका अर्थ है कि हत्या की कोई मंशा या योजना नहीं थी। उन्हें उस भीड़ का हिस्सा होने के लिए दोषी ठहराया गया है, जिसने अंकित की हत्या की थी।
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राजीव मोहन ने दलीलें समाप्त करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ जो दोष साबित हुए हैं, उन्हीं को देखते हुए सजा सुनाई जाए। ताहिर को एक बार सुधरने का मौका दिया जाए और सजा में नरमी बरती जाए।
बचाव पक्ष की अधिवक्ता तारा नरूला ने दोषियों की उम्र और बीमारियों के बारे में कम से कम सजा देने की अपील की। बचाव पक्ष के अन्य वकीलों ने दोषियों की कम उम्र, पारिवारिक स्थिति और आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कम से कम सजा की अपील की।
सुबह मामले की पुकार होने पर अदालत ने सुनवाई लंच के बाद करने की बात कही थी। सुबह सजा के मुद्दे पर कोई बहस नहीं हुई। अब मामले में दोपहर बाद सुनवाई होगी, जिसमें अभियोजन और बचाव पक्ष अपनी दलीलें रख सकते हैं।
इसके बाद अदालत दोषी ठहराए गए आरोपितों की सजा पर अपना फैसला सुना सकती है। पिछली तारीख पर सजा पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी थी, जिसके बाद अदालत ने आज की तारीख निर्धारित की थी।