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    रेलवे विद्युतीकरण के 100 साल पूर्ण, रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने जारी किया 100 रुपए का स्मारक सिक्का

    Updated: Sat, 10 Jan 2026 05:30 AM (GMT+05:30)

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेल के विद्युतीकरण के 100 वर्ष पूरे होने पर 100 रुपये का स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। यह समारोह द्वारका के ...और पढ़ें

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जारी किया 100 का सिक्का। फोटो-एक्स

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जारी किया 100 का सिक्का। फोटो-एक्स

    HighLights

    1. रेल विद्युतीकरण के 100 वर्ष पूरे होने पर सिक्का जारी।

    2. अश्विनी वैष्णव ने डाक टिकट और पुरस्कार भी प्रदान किए।

    3. 100 रुपये का स्मारक सिक्का कोलकाता टकसाल में बना।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। रेलवे, सूचना और प्रसारण तथा इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेल में विद्युतीकरण के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार को 100 रुपये का रंगीन स्मारक सिक्का और एक डाक टिकट जारी किया।

    द्वारका स्थित इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर (यशोभूमि) में आयोजित समारोह में उन्होंने चयनित रेलकर्मियों को 70वां अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार भी प्रदान किया। प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री सुधीर लुणावत के अनुसार, इस सिक्के का निर्माण कोलकता टकसाल में किया गया है।

    इसका कुल वजन 35 ग्राम है, जिसमें 50 फीसदी चांदी शामिल है। इस सिक्के की बुकिंग जल्द ही भारत सरकार टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट पर शुरू होगी।

    समारोह में रेलवे एवं जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, रेलवे एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ सतीश कुमार, रेलवे बोर्ड के सदस्य तथा विभिन्न रेलवे जोन और उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधक उपस्थित रहे।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक पार्टियों को राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय पार्टी के तौर पर मान्यता देने को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश की हिंदी साम्राज्य पार्टी की याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका में चुनाव चिह्न (आरक्षण व आवंटन) आदेश-1968 को रद करने की मांग गई थी।

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    न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांब्रे व न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों में कवर किया गया है। याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि निर्वाचन आयोग के पास चुनाव चिह्न (आरक्षण व आवंटन) आदेश-1968 बनाने का कोई अधिकार या क्षेत्राधिकार नहीं है। इसमें आयोग को आदेश के प्रविधानों लागू करने से रोकने की भी मांग की गई थी।

    2019 में दायर याचिका में तर्क दिया गया था कि उक्त आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता का उल्लंघन करता है। वहीं, निर्वाचन आयोग ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि चुनाव आदेश के तहत उसके द्वारा पारित आदेशों को सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट्स ने लगातार बरकरार रखा है