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    पॉलिसी रिन्यूअल की बढ़ी हुई समय-सीमा में हुआ हादसा, फिर भी इंश्योरेंस कंपनी ने खारिज किया क्लेम; कोर्ट पहुंचा परिवार

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 04:22 AM (IST)

    बारामती विमान दुर्घटना में मारे गए पायलट सुमित कपूर के परिवार ने 85.6 लाख रुपये के बीमा दावे के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ...और पढ़ें

    दिल्ली हाई कोर्ट ने IRDAI समेत अन्य को नोटिस भेजा।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने IRDAI समेत अन्य को नोटिस भेजा।

    HighLights

    1. पायलट सुमित कपूर के परिवार ने 85.6 लाख का बीमा मांगा।

    2. न्यू इंडिया एश्योरेंस ने बीमा दावा खारिज कर दिया था।

    3. दिल्ली हाई कोर्ट ने IRDAI समेत अन्य को नोटिस भेजा।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बारामती विमान दुर्घटना में मारे गए पायलट कैप्टन सुमित कमल कपूर की पत्नी व बच्चों ने 85.6 लाख का इंश्योरेंस क्लेम दिलाने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है।

    न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने याचिका पर इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथारिटी अाफ इंडिया (आइआरडीएआइ), न्यू इंडिया एश्योरेंस, हाउडेन इंश्योरेंस ब्रोकर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और फेडरेशन आफ इंडियन पायलट्स को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

    मामले पर अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी। इस विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की भी मौत हो गई थी।

    सुमित कपूर की पत्नी अंजू कपूर और उनके बच्चों ने याचिका दायर कर न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को लास ऑफ लाइसेंस इंश्योरेंस पालिसी के तहत क्लेम की रकम जारी करने का निर्देश देने की मांग की गई है। कैप्टन कपूर ने फेडरेशन आफ इंडियन पायलट्स के जरिए यह पालिसी ली थी।

    28 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। न्यू इंडिया एश्योरेंस ने 25 जून को भेजे गए एक पत्राचार के जरिए परिवार के इंश्योरेंस क्लेम को खारिज कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने याचिका दायर कर कहा कि न्यू इंडिया एश्योरेंस ने खुद ही पालिसी के तहत रिन्यूअल और नए एनरोलमेंट की समय-सीमा 31 जनवरी, 2026 तक बढ़ा दी थी।

    चूंकि, विमान दुर्घअना इस बढ़ाई गई समय-सीमा के दौरान 28 जनवरी 2026 को हुआ था, इसलिए इंश्योरेंस कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए इंश्योरेंस अधिनियम-1938 की धारा 64वीबी (जो प्रीमियम भुगतान से संबंधित है) का हवाला नहीं दे सकती। याचिका में इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथारिटी अाफ इंडिया (आइआरडीएआइ) को एक विस्तृत जांच करने और एक एक्सपर्ट कमेटी या स्पेशल रिव्यू कमेटी बनाने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

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