ब्रिक्स सम्मेलन: दिल्ली में लग्जरी कारों की किल्लत, दूसरे राज्यों से मंगाई जा रही 500 गाड़ियां
दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए विदेशी प्रतिनिधियों के लिए लग्जरी कारों की भारी कमी हो गई ...और पढ़ें

ब्रिक्स सम्मेलन से दिल्ली में लग्जरी टैक्सी कारों की किल्लत, दूसरे राज्यों से आ रही 500 कारें।
HighLights
ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिल्ली में लग्जरी कारों की कमी।
गति सीमा प्रतिबंधों के कारण स्थानीय गाड़ियां अनुपयुक्त।
500 से अधिक कारें अन्य राज्यों से मंगाई जा रही हैं।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। दिल्ली में आयोजित होने जा रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर सुरक्षा से लेकर परिवहन तक की तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, राजनयिकों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों और उनके सहयोगियों के काफिले के लिए दिल्ली में लग्जरी गाड़ियों की मांग में अप्रत्याशित उछाल आया है।
मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी, लैंड रोवर, रेंज रोवर और रोल्स रायस, जैसी सुपर-लग्जरी गाड़ियों के विभिन्न माडलों की मांग लगभग 500 का आंकड़ा पार कर चुकी है। विशेष कि दिल्ली में एक साथ इतनी लग्जरी टैक्सियां नहीं उपलब्ध है तो उसकी पूर्ति दूसरे राज्यों से की जा रही है।
इंडियन टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आइटीटीए) के अध्यक्ष सतीश सेहरावत के अनुसार, विभिन्न दूतावासों के माध्यम से लग्जरी कारों की मांग आ रही है। एक-एक एंबेसी से यह संख्या पांच से 10 तक है। इस भारी-भरकम मांग को पूरा करने में दिल्ली का स्थानीय टैक्सी बेड़ा पूरी तरह सक्षम साबित नहीं हो पा रहा है। इसलिए दूसरे राज्यों से ऐसी कारों को मंगाया जा रहा है। इसी तरह, इनोवा क्रिस्टा,फार्च्यूनर जैसी गाड़ियों की मांग अधिक है।
80 की गति से ऊपर नहीं चल सकती दिल्ली की लग्जरी टैक्सी कारें
सेहरावत के अनुसार, मांग को पूर्ति न कर पाने का सबसे बड़ा कारण दिल्ली में कामर्शियल टैक्सी व कैब गाड़ियों में स्पीड गवर्नर लगवाने की अनिवार्य है, जो गाड़ियों की अधिकतम गति सीमा को 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित कर देता है। उनके अनुसार, दूसरी ओर, वीवीआईपी और राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा फ्लीट के लिए काफिला आमतौर पर 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गति से गुजरता है।
गति सीमा सीमित होने के कारण दिल्ली की स्थानीय पंजीकृत लग्जरी टैक्सियां वीवीआइपी सुरक्षा फ्लीट के इन सख्त मापदंडों पर खरी नहीं उतर पा रही हैं। इसके अलावा, राजधानी में सुपर-लग्जरी सेगमेंट की गाड़ियों के व्यावसायिक रजिस्ट्रेशन को लेकर भी कई तकनीकी और प्रशासनिक शर्तें लागू हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर ऐसी गाड़ियों की उपलब्धता सीमित हो जाती है।
आगरा, जयपुर, चंडीगढ़ और देहरादून से बुलाई जा रही हैं गाड़ियां
मांग और आपूर्ति के इस अंतर को दूर करने के लिए टूर एंड ट्रैवल आपरेटर उत्तर भारत के प्रमुख पर्यटन केंद्रों से संपर्क साध रहे हैं। दिल्ली की कमी को पूरा करने के लिए पड़ोसी राज्यों के आगरा, जयपुर, देहरादून और चंडीगढ़ से लग्जरी गाड़ियों को दिल्ली मंगाया जा रहा है। आपरेटरों के अनुसार, इन राज्यों से रोल्स-रायस, रेंज रोवर और मर्सिडीज की हाई-एंड सीरीज की बुकिंग बेहद तेजी से की जा रही है, ताकि समय रहते राष्ट्राध्यक्षों और विदेशी प्रतिनिधियों के काफिलों को दुरुस्त किया जा सके।
चालकों के लिए सख्त गाइडलाइंस और पुलिस सत्यापन
वीवीआईपी मेहमानों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए सुरक्षा एजेंसियां और दिल्ली पुलिस कोई ढील नहीं बरत रही हैं। चालकों व वाहन के पुलिस सत्यापन के साथ साथ ही चालकों को विशेष हिदायद दी गई है कि वह विदेशी प्रतिनिधियों से कम से कम बातचीत करें। कोई भी जानकारी के लिए वह कोआर्डिनेटर से संपर्क करेंगे।
