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    द्वारका में टूटे सीवर ढक्कन बने जानलेवा खतरा, प्रशासन की लापरवाही से बढ़ रहा हादसों का डर

    Updated: Fri, 12 Jun 2026 10:01 PM (IST)

    द्वारका की दो व्यस्त सड़कों पर पिछले दो दिनों से सीवर के ढक्कन टूटे पड़े हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों ...और पढ़ें

    द्वारका की दो व्यस्त सड़कों पर पिछले दो दिनों से सीवर के ढक्कन टूटे पड़े।

    द्वारका की दो व्यस्त सड़कों पर पिछले दो दिनों से सीवर के ढक्कन टूटे पड़े।

    HighLights

    1. द्वारका में दो व्यस्त सड़कों पर सीवर ढक्कन टूटे।

    2. राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा, हादसे का डर।

    3. स्थानीय लोगों ने बचाव के लिए खुले सीवरों में डालियां डालीं।

    जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। द्वारका के दो अलग-अलग बेहद व्यस्त मुख्य मार्गों पर पिछले दो दिनों से सीवर के ढक्कन बीच सड़क पर पूरी तरह टूटे पड़े हैं। भारी वाहनों के गुजरने की वजह से चकनाचूर हुए ये खुले सीवर यहां निकलने वाले हजारों राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा बना हुआ है।

    प्रशासन की इस खतरनाक लापरवाही को देखते हुए स्थानीय लोगों ने खुद ही नागरिक जिम्मेदारी निभाई और हादसों से बचाव के लिए दोनों खुले सीवरों के भीतर पेड़ की बड़ी-बड़ी डालियां तोड़कर डाल दी हैं, ताकि दूर से ही चालकों को खतरे का अंदाजा हो सके।

    यह समस्या जिन दो स्थानों पर बनी है, वे दोनों ही इलाके के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त यातायात मार्ग हैं। पहला सीवर सेक्टर-14 स्थित भारत विहार और राधिका अपार्टमेंट के पास खुला है, जहां से रोज़ाना हजारों स्थानीय निवासियों की आवाजाही होती है और यहां प्रसिद्ध संडे बाजार भी लगता है।

    निजी वाहनों, कमर्शियल गाड़ियों और ई-रिक्शा का भारी दबाव

    दूसरा खुला सीवर सेक्टर-7, पालम और राजनगर की ओर से आकर व्यस्त डाबड़ी-गुरुग्राम मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली सड़क पर , ठीक रेड लाइट के पास है, जहां पालम की ओर से आने वाली गाडियां रुकती है। ये दोनों ही सड़कें द्वारका की लाइफलाइन मानी जाती हैं, जहां चौबीसों घंटे निजी वाहनों, कमर्शियल गाड़ियों और ई-रिक्शा का भारी दबाव रहता है।

    पीक आवर्स के दौरान यहां पैर रखने तक की जगह नहीं होती। ऐसे में व्यस्त सड़क के बीचों-बीच अचानक सामने झाड़ी देखकर तेज रफ्तार वाहन चालक नियंत्रण खो सकते हैं, जिससे दोपहिया वाहनों के फिसलने या आपस में टकराने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

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    दो दिनों में कई बाइक सवार यहां गिरते-गिरते बचे

    अंधेरा होते ही इन सड़कों पर खतरा दोगुना हो जाता है क्योंकि स्ट्रीट लाइट की रोशनी कम होने पर दूर से यह गड्ढा दिखाई नहीं देता। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि दो दिनों में कई बाइक सवार यहां गिरते-गिरते बचे हैं।

    निवासियों ने नगर निगम और दिल्ली जल बोर्ड से मांग की है कि वीकेंड की भारी भीड़ और संडे बाजार शुरू होने से पहले, आपातकालीन स्थिति के तहत दोनों जगहों पर तुरंत नए और मजबूत ढक्कन लगवाए जाएं ताकि किसी आम राहगीर की जान पर न जाए।

    संडे बाजार के कारण यहां भारी भीड़ रहती है, रात के अंधेरे में खुला सीवर किसी बड़ी अनहोनी को न्योता दे रहा है। - चरणजीत सिंह मजिठिया, स्थानीय राहगीर

    डाबड़ी-गुरुगांव मार्ग पर गाड़ियों की रफ्तार तेज होती है, बीच सड़क पर टूटा ढक्कन जानलेवा साबित हो सकता है, इसे तुरंत बदलने की जरूरत है।- शशि रावत, स्थानीय निवासी

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