Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    राव IAS हादसे में 3 छात्रों की मौत के जिम्मेदार कौन? CBI ने 3 अफसरों को ठहराया दोषी, 2 को क्लीनचिट

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 07:47 PM (IST)

    सीबीआई ने राव IAS कोचिंग सेंटर हादसे में तीन छात्रों की मौत के लिए नगर निगम के तीन अधिकारियों को ड्यूटी में लापरवाही का दोषी ठहराया है। अदालत में रिपो ...और पढ़ें

    सीबीआई की रिपोर्ट में दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिलने की बात कहते हुए उन्हें क्लीन चिट दी गई है।

    सीबीआई की रिपोर्ट में दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिलने की बात कहते हुए उन्हें क्लीन चिट दी गई है।

    HighLights

    1. CBI ने राव IAS हादसे में तीन अधिकारियों को दोषी माना।

    2. जूनियर इंजीनियर, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता पर लापरवाही का आरोप।

    3. दो वरिष्ठ अधिकारियों को आपराधिक लापरवाही के साक्ष्य न मिलने पर क्लीन चिट।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट की अदालत में सीबीआई ने ओल्ड राजेंद्र नगर में राव आइएएस कोचिंग सेंटर हादसे की जांच रिपोर्ट दाखिल करते हुए नगर निगम के भवन विभाग के तीन अधिकारियों को ड्यूटी में लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिलने की बात कहते हुए उन्हें क्लीन चिट दी गई है।

    कोई आपराधिक लापरवाही का साक्ष्य नहीं मिला

    प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट की अदालत में सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। अदालत के निर्देश पर हुई जांचमें एजेंसी ने तत्कालीन जूनियर इंजीनियर (भवन) अर्नव कुमार दत्ता, सहायक अभियंता राजीव कुमार जैन और अधिशासी अभियंता कुमार महेंद्रु की ड्यूटी में लापरवाही पाई है। वहीं तत्कालीन अधीक्षण अभियंता अजय नागपाल और तत्कालीन निगम उपायुक्त कुमार अभिषेक के खिलाफ कोई आपराधिक लापरवाही का साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही है।

    निरीक्षण रिपोर्ट में फर्नीचर स्टोरेज बताया

    सीबीआई ने रिपोर्ट में कहा कि 27 जुलाई 2024 को राव आइएएस कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भरने से यूपीएससी अभ्यर्थी नेविन डेल्विन, तान्या सोनी और श्रेया यादव की मौत हुई, उसका अवैध व्यावसायिक उपयोग लंबे समय से हो रहा था। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

    रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन जेई अर्नव कुमार दत्ता को पता था कि बेसमेंट का उपयोग परीक्षा हाल के रूप में हो रहा है, लेकिन उन्होंने निरीक्षण रिपोर्ट में इसे फर्नीचर स्टोरेज बताया और यह तथ्य अपने वरिष्ठ अधिकारियों से छिपाया।

    खबरें और भी

    सहायक अभियंता राजीव कुमार जैन पर दस्तावेज की ठीक से जांच और सत्यापन नहीं करने का आरोप लगाया गया है। वहीं अधिशासी अभियंता कुमार महेंद्रु पर लीज डीड में कोचिंग संचालन का स्पष्ट उल्लेख होने के बावजूद बेसमेंट के दुरुपयोग का पता नहीं लगाने की बात कही गई है।

    बेसमेंट के अवैध उपयोग की जानकारी नहीं दी

    सीबीआई ने अदालत को बताया कि तत्कालीन अधीक्षण अभियंता अजय नागपाल निरीक्षण या तथ्यात्मक सत्यापन की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थे और उनके सामने फाइल केवल दो बार आई थी। इसी तरह तत्कालीन उपायुक्त कुमार अभिषेक को अधीनस्थ अधिकारियों ने बेसमेंट के अवैध उपयोग की जानकारी नहीं दी थी। इसलिए उनके खिलाफ किसी तरह की लापरवाही का रिकाॅर्ड पर कोई साक्ष्य नहीं मिला।

    अधिकारियों ने फाइल नहीं चलाई 

    यह जांच मृतक छात्र नेविन डेल्विन के पिता जे. डेल्विन सुरेश की ओर से दायर विरोध याचिका पर अदालत के आदेश के बाद कराई गई थी। हालांकि, कीर्ति नगर में इसी तरह के लापरवाही के मामले में तत्कालीन निगमायुक्त अश्वनी कुमार ने तीनों लोगों को निलंबित कर दिया था।

    अभी तक तीनों निलंबित चल रहे हैं। यहां पर सीलिंग के लिए समय से इन अधिकारियों ने फाइल नहीं चलाई थी।

    उल्लेखनीय है कि अभिषेक मिश्रा का तबादला बाद में शाहदरा उत्तरी जोन के उपायुक्त के तौर पर हो गया था। जहां वह निगम कर्मचारी की बहाली के मामले में रिश्वत लेते सीबीआई द्वारा रंगे हाथ पकड़े गए थे। हालांकि, पिछले दिन मिश्रा को हाई कोर्ट से इस मामले में जमानत मिल गई है।