CBSE 12th Exam: कहीं दूसरे छात्र की कॉपी अपलोड, तो कहीं सही जवाब पर भी मिला शून्य अंक; गड़बड़ी से संकट में रिजल्ट
सीबीएसई 12वीं के नतीजों में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के कारण गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिससे छात्रों को गलत उत्तर पुस्तिकाएं मिलने, धु ...और पढ़ें
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सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल।
HighLights
ओएसएम प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में गंभीर त्रुटियां।
सही जवाबों पर शून्य अंक, गलत कॉपियां अपलोड होने की शिकायतें।
आईआईटी पात्रता मानदंड से बाहर हुए कई छात्र, करियर दांव पर।
रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। अगर अपलोड हुई कॉपी मेरी है ही नहीं है, तो आखिर जांच किसकी हुई? अगर स्कैन कॉपी पूरी तरह से धुंधली दिख रही है कि जिसे पढ़ा तक नहीं जा रहा तो जांचा कैसा गया? अगर पूछे गए सवाल का जवाब सही और सटीक दिया तो शून्य अंक क्यों?
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं बोर्ड परीक्षा के बाद यह सवाल अब हजारों छात्रों और अभिभावकों की बेचैनी बन चुका है। बोर्ड की नई ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर देशभर से ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जिन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कहीं छात्रों को ऐसी उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं, जिन्हें वह अपनी मानने से इन्कार कर रहे हैं, कहीं धुंधली कापियों के आधार पर जांच हुई, कहीं पूरे लिखे हुए पन्नों को खाली मान लिया गया, तो कहीं सही जवाबों पर भी बेहद कम अंक दिए गए।
इससे अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि अगर कॉपी ही अलग है, तो जांच आखिर किसकी हुई और नंबर किसे दे दिए गए। छात्रों ने डिजिटल मूल्यांकन में गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। कई अभिभावकों ने आरोप लगाया कि फीस जमा करने के बाद भी उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं।
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सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ा है, जिन्होंने जेईई मुख्य परीक्षा पास कर ली थी और अब आईआईटी में दाखिले का सपना देख रहे थे। ऐसे छात्र, जिन्होंने जेईई मुख्य परीक्षा पास कर ली थी और एडवांस की तैयारी में जुटे थे, वह अब बोर्ड के अंकों के कारण संकट में फंस गए हैं।
आईआईटी के 75 प्रतिशत पात्रता मानदंड से बाहर
कई छात्रों के भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित में इतने कम अंक आए कि वह आईआईटी के 75 प्रतिशत पात्रता मानदंड से बाहर हो गए। कुछ छात्रों को अब कंपार्टमेंट परीक्षा तक देने की नौबत आ गई है। अभिभावकों का कहना है कि जो छात्र राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षा पास कर सकता है, वह बोर्ड परीक्षा में अचानक इतना कमजोर कैसे हो गया।
छात्रों का कहना है कि काउंसलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, सीटें भरती जा रही हैं और वे अभी तक यह साबित करने में लगे हैं कि उनकी कापी सही जांची भी गई थी या नहीं। कई छात्रों ने इसे एक साल नहीं, पूरा करियर दांव पर लगना बताया है।
बी कॉपियों की ऑफलाइन जांच हो रही, बढ़ सकते हैं छात्रों के नंबर
अभी तक छात्र सीबीएसई पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ियां की शिकायत कर रहे थे, जिसमें भुगतान फेल होने, कॉपी डाउनलोड न होने और पोर्टल पर गलत शुल्क दिखने जैसी शिकायतें भी कीं। लेकिन अब कापी जांच रहे परीक्षकों ने जो गड़बड़ियां बताई हैं वो इससे भी अलग है।
परीक्षकों ने बताया कि अभी वो बहुत से छात्रों की ऑफलाइन माध्यम से बी कापियों की जांच कर रहे हैं। उनके मुताबिक ये वो कापियां है जो स्कैन ही नहीं हुई और छात्रों की इन कॉपियों का बिना मूल्यांकन ही परिणाम जारी कर दिया गया। परीक्षकों ने बताया कि बी कापी जांचने के बाद छात्रों को 15 से 25 नंबर तक बढ़े हैं।
समयबद्ध तरीके से शिकायतों का होगा समाधान: सीबीएसई
सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 12वीं के 3.87 से अधिक छात्रों ने लगभग 11 लाख स्कैन कापियों के लिए आवेदन किया। जिसमें से 7.36 लाख कापियां भेज दी गई है। लगभग चार लाख कापियों को भेजने की प्रक्रिया चल रही है। अभी तक इस तरह की लगभग एक हजार शिकायतें सामने आई हैं, जिनका निपटारा किया जाएगा। जो बी कापियों को नहीं जांचने की शिकायत है तो उनको आफलाइन तरीके से चेक कराया जा रहा है। ओएसएम में किसी तरह की गड़बडी नहीं है। प्रणाली पूरी तरह से ठीक है।