CBSE ने स्कूलों को दिया निर्देश, क्लासरूम में PM e-Vidya के टीवी चैनल और ई-वीडियो का करें इस्तेमाल
सीबीएसई स्कूलों को क्लासरूम टीचिंग में PM e-Vidya प्लेटफॉर्म के डिजिटल कंटेंट, टीवी चैनल और ई-वीडियो लेसन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
-1773230863513_m.webp)
CBSE ने अपने से जुड़े स्कूलों को क्लासरूम टीचिंग में डिजिटल कंटेंट का ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया है। इमेज एआई
HighLights
CBSE स्कूलों को PM e-Vidya उपयोग करने को कह रहा है।
शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने का लक्ष्य, विशेषकर वंचितों के लिए।
शिक्षकों को लेसन प्लान में वीडियो शामिल करने की सलाह।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने अपने से जुड़े स्कूलों को क्लासरूम टीचिंग में डिजिटल कंटेंट का ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा दिया है। बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि वे PM e-Vidya प्लेटफॉर्म पर मौजूद टीवी चैनल और ई-वीडियो लेसन का एक्टिवली इस्तेमाल करें।
CBSE के मुताबिक, केंद्र सरकार का PM e-Vidya प्लेटफॉर्म करिकुलम से जुड़े रिकॉर्डेड लेसन देता है, जिन्हें स्टूडेंट अपनी स्पीड से दोबारा देख सकते हैं। इन लेसन का इस्तेमाल सप्लीमेंट्री एकेडमिक सपोर्ट, सब्जेक्ट एनरिचमेंट और टीचर ट्रेनिंग के लिए भी किया जा सकता है।
बोर्ड की तरफ से जारी एक ऑर्डर में खास तौर पर PM e-Vidya के CBSE-15 टीवी चैनल के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया गया है। यह चैनल 2024 में 200 DTH एजुकेशनल टीवी चैनल लॉन्च करने की पहल का हिस्सा है, जिसका मकसद एजुकेशनल रिसोर्स तक पहुंच बढ़ाना है। CBSE के एक अधिकारी के मुताबिक, इन चैनलों में करिकुलम से जुड़े प्रोग्राम होते हैं, जिनमें टीचिंग मेथड, क्लासरूम मैनेजमेंट, असेसमेंट मेथड और सब्जेक्ट-स्पेसिफिक लर्निंग से जुड़े टॉपिक शामिल होते हैं।
इसका मकसद क्वालिटी एजुकेशनल रिसोर्स तक सभी की बराबर पहुंच पक्का करना है, खासकर उन स्टूडेंट के लिए जिन्हें डिजिटल टूल्स तक पहुंचने में ज्योग्राफिकल या सोशियो-इकोनॉमिक रुकावटों का सामना करना पड़ता है।
अभी, इन चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 67 एजुकेशनल ई-वीडियो उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें ग्रेड 9 के लिए रियल नंबर्स और कोऑर्डिनेट ज्योमेट्री जैसे सब्जेक्ट्स के लेसन के साथ-साथ आर्ट-इंटीग्रेटेड लर्निंग, टीचिंग में स्टोरीटेलिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को समझना, मैथमेटिक्स टीचिंग प्लानिंग, कोऑपरेटिव लर्निंग और यूनिवर्सल डिजाइन ऑफ लर्निंग जैसे मॉड्यूल शामिल हैं। न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 और साइंस, मैथमेटिक्स और सोशल साइंस पढ़ाने की स्ट्रेटेजी पर भी सेशन उपलब्ध हैं।
ऑर्डर में टीचर्स को सलाह दी गई है कि वे इन वीडियो को लेसन प्लान और क्लासरूम एक्टिविटीज़ में शामिल करें, जबकि स्टूडेंट्स इनका इस्तेमाल कॉन्सेप्ट्स को समझने और सेल्फ-स्टडी के लिए कर सकते हैं। स्कूल प्रिंसिपल्स को भी ज़रूरी टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने और स्टूडेंट्स और टीचर्स तक कंटेंट पहुंचाने के लिए कहा गया है।
हालांकि कुछ एजुकेटर्स का कहना है कि यह पहल डिजिटल और स्किल-बेस्ड लर्निंग को मजबूत कर सकती है, लेकिन सीमित टेक्नोलॉजिकल रिसोर्स वाले स्कूलों को इंफ्रास्ट्रक्चर और टीचर ट्रेनिंग से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
यह भी पढ़ें: दिल्ली फायर डिपार्टमेंट में अफसरों का गंभीर संकट, 90 में से सिर्फ 18 अधिकारी तैनात
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।