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अब पूरे देश में GST रजिस्ट्रेशन के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य, जीएसटी फ्रॉड पर दिल्ली HC का बड़ा फैसला

Published: Thu, 10 Sep 2026 02:57 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने जीएसटी पंजीकरण में धोखाधड़ी रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। अब पूरे भारत में जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए बायोमेट्रिक आधारित सत्यापन अनिवार्य होगा।

अब जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए बायोमैट्रिक जांच अनिवार्य। फोटो: सांकेतिक

अब जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए बायोमैट्रिक जांच अनिवार्य। फोटो: सांकेतिक

HighLights

  1. दिल्ली हाई कोर्ट ने जीएसटी धोखाधड़ी रोकने के लिए दिया बड़ा आदेश

  2. पूरे भारत में जीएसटी पंजीकरण हेतु बायोमेट्रिक सत्यापन अब अनिवार्य होगा

  3. गृहिणी के पैन के गलत इस्तेमाल पर कोर्ट ने सुनवाई की

विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। जीएसटी पंजीकरण में फर्जीवाड़े और लोगों के पैन-आधार विवरण के दुरुपयोग के मामलों को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा अंतरिम निर्देश दिया है।

कोर्ट ने जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया में पूरे देश में बायोमेट्रिक आधारित सत्यापन अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। यह आदेश एक गृहिणी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया में पहचान की ठोस पुष्टि जरूरी है, ताकि किसी व्यक्ति की जानकारी का गलत इस्तेमाल कर उसके नाम पर फर्जी कारोबार या वित्तीय लेन-देन न किया जा सके।

पैन का गलत इस्तेमाल कर कराया रजिस्ट्रेशन

दिल्ली के रोहिणी निवासी नेहा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उनके पैन कार्ड की जानकारी का दुरुपयोग कर कर्नाटक में एक कंपनी का जीएसटी पंजीकरण कराया गया। इस कंपनी पर करोड़ों रुपये का जीएसटी बकाया था। बकाया वसूली की कार्रवाई में उनके बैंक खाते को भी निशाना बनाया गया।

नेहा के मुताबिक, एक दिन उनके मोबाइल पर बैंक से संदेश आया कि उनके खाते में करीब चार करोड़ रुपये की राशि आई है। इसके बाद उन्हें एक अन्य संदेश मिला कि खाते से तीन लाख रुपये काट लिए गए हैं। मामले की जानकारी लेने के लिए उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक से संपर्क किया।

बैंक की ओर से उन्हें बताया गया कि कर्नाटक में एक कंपनी ने वर्ष 2021 में उनके पैन कार्ड का इस्तेमाल कर जीएसटी पंजीकरण कराया था। उक्त कंपनी पर करीब 4.46 करोड़ रुपये का जीएसटी बकाया है।

बकाया वसूली में महिला का बैंक खाता सीज

नेहा का आरोप है कि बकाया जीएसटी की वसूली के लिए कर्नाटक जीएसटी विभाग ने कंपनी के पैन से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। इसी क्रम में उनके बैंक खाते को भी सीज कर दिया गया और खाते में मौजूद करीब तीन लाख रुपये काट लिए गए।

इसके बाद उनका बैंक खाता करीब 4.38 करोड़ रुपये के माइनस में दिखने लगा। नेहा का कहना है कि उनका किसी भी तरह के कारोबारी लेन-देन से कोई संबंध नहीं है और वह गृहिणी हैं।

लखनऊ में भी पैन का दुरुपयोग होने का आरोप

मामले की जांच करने पर नेहा को कथित तौर पर पता चला कि उनके पैन कार्ड का इस्तेमाल केवल कर्नाटक में ही नहीं, बल्कि लखनऊ की एक कंपनी के जीएसटी पंजीकरण के लिए भी किया गया था।

उन्होंने मार्च 2026 में संबंधित जीएसटी अधिकारियों के समक्ष शिकायतें दर्ज कराईं। याचिका के मुताबिक, शिकायतों पर न तो प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही अधिकारियों की ओर से कोई जवाब मिला।

पैन-आधार की चोरी की जानकारी से फर्जीवाड़ा

याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ मामलों में अज्ञात नागरिकों के चोरी किए गए या फ्रीज किए गए पैन कार्ड और आधार संबंधी जानकारी का इस्तेमाल कर फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराया जाता है। इसके जरिए वित्तीय धोखाधड़ी और फर्जी कारोबारी गतिविधियों को अंजाम दिए जाने की आशंका जताई गई।

नेहा ने संबंधित जीएसटी नोटिस को धोखाधड़ीपूर्ण बताते हुए कहा कि यह उनकी पहचान और वित्तीय जानकारी के कथित दुरुपयोग से जुड़ी बड़ी साजिश का हिस्सा है।

वित्त मंत्रालय को जांच के निर्देश देने की मांग

नेहा ने अधिवक्ता मनोज मित्तल के माध्यम से दायर याचिका में केंद्रीय वित्त मंत्रालय, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी), वाणिज्यिक कर विभाग, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर आयुक्त और दिल्ली पुलिस को मामले की जांच के निर्देश देने की मांग की।

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया में बायोमेट्रिक आधारित सत्यापन को पूरे भारत में अनिवार्य करने का अंतरिम निर्देश दिया। कोर्ट के इस निर्देश का उद्देश्य फर्जी पहचान के आधार पर जीएसटी पंजीकरण कराने और किसी तीसरे व्यक्ति के पैन-आधार विवरण के दुरुपयोग की आशंका को कम करना है।

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