36 दिन, भूख हड़ताल और पुलिस की कार्रवाई... जंतर-मंतर पर सीजेपी के लिए कब-कब रहा महत्वपूर्ण दिन
नीट परीक्षा में गड़बड़ी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 36 दिवसीय आंदोलन देशव्यापी बन गया। जं ...और पढ़ें
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सीजेपी के 36 दिनों के प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।
HighLights
CJP का 36 दिवसीय नीट विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर से शुरू हुआ।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और 'चलो संसद' मार्च प्रमुख रहे।
आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नीट परीक्षा में गड़बड़ी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन एक देशव्यापी आंदोलन में बदल गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 36 दिनों तक चले इस आंदोलन में लाखों लोग शामिल हुए। यह प्रदर्शन देश के कई शहरों में हुए। आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।
बीते 36 दिनों में कई ऐसे मौके आए जब इस आंदोलन के लिए वह दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। आइए जानते हैं सीजेपी के लिए वह खास मौके कब-कब आए...

- 6 जून: आंदोलन की शुरुआत 6 जून को हुई, जब सीजेपी ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना पहला विरोध प्रदर्शन किया।
- 11 जून: पांच दिन बाद, 11 जून को सीजेपी ने एक पांच-सूत्रीय घोषणापत्र जारी किया, जिसमें भारत के शिक्षा क्षेत्र के लिए उनके प्रस्तावित सुधारों की रूपरेखा दी गई थी।
- 20 जून: मांगें पूरी न होने पर सीजेपी ने 20 जून को अपने विरोध को और तेज कर दिया और जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
- 28 जून: आंदोलन 28 जून को और तेज हो गया, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इस प्रदर्शन के समर्थन में विरोध स्थल पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी।
- 18 जुलाई: लगभग तीन सप्ताह की भूख हड़ताल के बाद 18 जुलाई को स्वास्थ्य बिगड़ने पर वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने कहा कि यह कदम कोर्ट के आदेशों के मद्देनजर उठाया गया।
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- 20 जुलाई: आंदोलन 20 जुलाई को अपने चरम पर पहुंच गया, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों प्रदर्शनकारियों ने 'चलो संसद' मार्च में भाग लिया। सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प होने से यह मार्च हिंसक हो गया, जिसके कारण अधिकारियों को 2001 के बाद पहली बार संसद के द्वार बंद करने पड़े। उसी दिन, सीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को दोहराने के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की।
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- 21–24 जुलाई:21 जुलाई को, वांगचुक को गुरुग्राम के एक निजी मेडिकल अस्पताल में स्थानांतरित होने की अनुमति दी गई। 21 से 23 जुलाई के बीच, विपक्षी राजनीतिक दलों और कई प्रमुख सार्वजनिक हस्तियों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा के इस्तेमाल की निंदा की।
- 23 और 24 जुलाई को, वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद गुरुग्राम के अस्पताल में अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
- लगभग उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश में देश के युवाओं को आश्वासन दिया कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव का वादा किया।
- यह आंदोलन दिल्ली के बाहर भी फैलता रहा। 24 जुलाई को सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में पटना, मुंबई और कई अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए।
- उसी दिन, सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों पर चर्चा करने के लिए फिर से केंद्रीय मंत्रियों नड्डा और सिंह से मुलाकात की, जबकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं।
- 25 जुलाई: 25 जुलाई को एक बड़ी सफलता हाथ लगी, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा दे दिया। यह इस आंदोलन की प्रमुख मांगों में से एक थी।
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