अब 24 घंटे निगरानी में रहेंगी दिल्ली-NCR की फैक्ट्रियां; OCEMS से नहीं जुड़ने पर 462 उद्योगों पर होगा एक्शन
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने एनसीआर के उद्योगों को 10 अप्रैल तक ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) से जुड़ने का अंतिम अवसर ...और पढ़ें

अब उद्योगों की 24 घंटे मॉनिटनिंग की जाएगी। फोटो एआई जनरेटेड
HighLights
एनसीआर उद्योगों को OCEMS से जुड़ने की अंतिम तिथि 10 अप्रैल
462 औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई की तैयारी, क्लोजर नोटिस
प्रदूषण नियंत्रण हेतु 24 घंटे डिजिटल निगरानी, रियल-टाइम ट्रैकिंग
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण फैला रहीं औद्योगिक प्रदूषण पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अब अपनी तैयारी तेज कर दी है।
एनसीआर में शामिल सभी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में चल रही उद्योगों को सीपीसीबी के ''ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन माॅनिटरिंग सिस्टम'' (ओसीईएमएस) पोर्टल से जुड़ना ही होगा।
इसके जरिये सीपीसीबी का उद्देश्य एनसीआर के उद्योगों को 24 घंटे ''डिजिटल पहरे'' में रखना है ताकि उसी के अनुरूप कार्रवाई व नीति तय हो सके।
तारीख बढ़ी : उद्यमियों को मिली 10 अप्रैल तक की राहत
सीपीसीबी ने एनसीआर के उद्यमियों के लिए पोर्टल पर डेटा लिंक करने की समय सीमा बढ़ा दी है। पहले यह समय सीमा 31 मार्च तक थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 अप्रैल कर दिया गया है। यह उन इकाइयों के लिए बचाव का अंतिम अवसर है जो तकनीकी कारणों से अभी तक अपना सिस्टम सिंक नहीं कर पाए थे।
सख्त क्रियान्वयन के लिए नेटवर्क तैयार
अक्सर सवाल उठता है कि क्या सीपीसीबी सिर्फ नोटिस देकर ''इतिश्री'' कर लेता है? लेकिन इस बार स्थिति अलग है। बोर्ड अब नोटिस की औपचारिकता से आगे बढ़कर सख्त क्रियान्वयन की दिशा में काम कर रहा है:-
- रियल-टाइम ट्रैकिंग : जहां सिस्टम मजबूत हो चुका है, वहां अब प्रदूषण के आंकड़ों में हेरफेर की गुंजाइश खत्म हो गई है। सेंसर से सीधा डेटा सीपीसीबी के सर्वर पर पहुंच रहा है, जिससे अधिकारियों को मौके पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
- स्वचालित अलर्ट सिस्टम : यदि किसी फैक्ट्री की चिमनी से निर्धारित मानक से अधिक धुआं निकलता है, तो साफ्टवेयर तुरंत अलर्ट जेनरेट करता है।
- जवाबदेही तय : अब तक की मानिटरिंग के परिणाम बताते हैं कि जहां ओसीईएमएस सक्रिय है, वहां उद्योगों ने ''पेनल्टी'' के डर से खुद ही उत्सर्जन कम करने के उपाय कर लिए हैं। सीपीसीबी ने भी स्पष्ट कर दिया है कि पोर्टल पर न आने वाले उद्योगों के खिलाफ ''क्लोजर नोटिस'' और भारी पर्यावरण जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
462 इकाइयों पर कार्रवाई के लिए राज्यों को निर्देश
सीपीसीबी ने प्रदूषण की निगरानी के लिए ओसीईएमएस उपकरण लगाने में लापरवाही बरतने वाली एनसीआर में स्थित 462 फैक्टरियों की पहचान की है। यहां पर ओसीईएम सिस्टम निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं लगाए गए हैं। इसके चलते उनके प्रदूषण उत्सर्जन की सीधी निगरानी करना संभव नहीं हो पा रहा है।
इनमें तीन फैक्ट्रियां दिल्ली में चिह्नित की गई हैं। बाकी बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, भिवानी, फरीदाबाद, गुरुग्राम, झज्जर, जींद, करनाल, नूह, पलवल, पानीपत, रेवाड़ी, रोहतक, सोनीपत, अलवर, खैरथल-तिजारा, गाजियाबाद एवं हापुड़ में स्थित हैं।
क्या हुआ जमीन पर सुधार?
सीपीसीबी ने केवल डिजिटल सिस्टम ही नहीं बनाया, बल्कि इसके जरिए जमीनी स्तर पर भी बदलाव कराए हैं:-
- ईंधन बदला : मानिटरिंग के दबाव में ही एनसीआर के अधिकांश उद्योगों को पीएनजी या स्वच्छ ईंधन पर शिफ्ट होना पड़ा है।
- ओसीईएमएस से जुड़ने का सत्यापन : पोर्टल पर लिंक होने का मतलब केवल डेटा देना नहीं है, बल्कि सीपीसीबी की टीमें यह भी सुनिश्चित कर रही हैं कि लगाए गए सेंसर सही ढंग से प्रदूषकों की पहचान और गणना कर रहे हैं या नहीं।
- पारदर्शिता : यह पोर्टल भविष्य में डेटा को जनता और प्रशासन के बीच साझा करेगा, जिससे भ्रष्ट साठगांठ की संभावना कम होगी।
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