दिल्ली में सस्ते घर की तलाश? DDA की योजना का उठाएं लाभ, अभी भी मौजूद है खाली फ्लैटों का भारी स्टॉक
डीडीए ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 1,020 करोड़ रुपये की कमाई की, जो पिछले साल से 120% अधिक है, जिसमें नरेला के फ्लैटों की बिक्री का प्रमुख ...और पढ़ें

डीडीए ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 1,020 करोड़ रुपये की कमाई की। फाइल फोटो
HighLights
डीडीए की कमाई में 120% की शानदार वृद्धि दर्ज।
कुल बिक्री का 90% हिस्सा नरेला के फ्लैटों से।
पुराने खाली फ्लैट बेचने की चुनौती अभी भी बरकरार।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 1,020 करोड़ रुपये की कमाई की है, जो पिछले साल की इसी तिमाही (462 करोड़ रुपये) से 120 प्रतिशत ज्यादा है। इस दौरान कुल 1,284 फ्लैट बिके हैं। ऊपर से देखने में यह आंकड़े भले बड़े लगते हैं, लेकिन जमीन पर इसका मतलब कुछ और ही है।
महंगे फ्लैटों में प्राइवेट बिल्डर्स अब भी पहली पसंद
इस बार की पूरी बिक्री केवल एक ही इलाके के भरोसे रही है। कुल बिके फ्लैटों में से 90 प्रतिशत (1,153 फ्लैट) सिर्फ नरेला में बिके हैं। एक तरफ जहां यूईआर-II सड़क और मेट्रो के नए प्रोजेक्टों की उम्मीद में लोग यहां घर खरीद रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ यह भी साफ है कि पाश दिल्ली में नया स्टॉक न होने के कारण डीडीए की पूरी कमाई अब बाहरी दिल्ली के किफायती फ्लैटों पर टिक गई है। मध्यम वर्ग (एमआइजी) के 435 फ्लैट बिके हैं, जबकि उच्च वर्ग (एचआइजी) में सिर्फ 191 फ्लैट ही बिक पाए। इससे पता चलता है कि महंगे फ्लैटों के मामले में लोग अब भी प्राइवेट बिल्डरों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
पुराने स्टॉक निकालने की जद्दोजहद
नजरिये के तौर पर देखें तो यह बड़ी कमाई डीडीए की किसी नई सफलता से ज्यादा, उसकी एक मजबूरी को दिखाती है। डीडीए ने ''पहले आओ-पहले पाओ'' जैसी आनलाइन स्कीम शुरू करके और इसकी तारीख को 31 जुलाई, 2026 तक बढ़ाकर अपने उन पुराने फ्लैटों को निकालने की कोशिश की है जो सालों से खाली पड़े थे।
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'तुरंत कब्जा' से खरीदारों को राहत
हालांकि 'तुरंत कब्जा' और 'फ्रीहोल्ड' होने के कारण कम बजट वाले खरीदारों को एक सुरक्षित विकल्प जरूर मिल गया है, लेकिन डीडीए के पास खाली फ्लैटों का जो भारी स्टाक जमा है, उसे पूरी तरह बेचने में अभी लंबा समय लगेगा।