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    दिल्ली में 650 करोड़ के घोटाले में डॉक्टर का घरेलू कर्मचारी निकला कंपनी का डायरेक्टर, अदालत में रो पड़ीं डॉ. वत्सला

    Updated: Wed, 08 Jul 2026 04:50 PM (GMT+05:30)

    दिल्ली के 650 करोड़ के दवा एवं उपकरण खरीद घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है, जहां एक कंपनी का निदेशक स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर का घरेलू कर्मचारी निकला। पू ...और पढ़ें

    650 करोड़ के दवा एवं उपकरण खरीद घोटाले की जांच में वेंडर नेटवर्क का बड़ा खेल सामने आया है। एआई इमेज

     650 करोड़ के दवा एवं उपकरण खरीद घोटाले की जांच में वेंडर नेटवर्क का बड़ा खेल सामने आया है। एआई इमेज

    HighLights

    1. कंपनी निदेशक स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर का घरेलू कर्मचारी।

    2. 650 करोड़ के दवा खरीद घोटाले में बड़ा खुलासा।

    3. डॉ. वत्सला अग्रवाल अदालत में रो पड़ीं, न्यायिक हिरासत में।

    अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। 650 करोड़ के दवा एवं उपकरण खरीद घोटाले की जांच में वेंडर नेटवर्क का बड़ा खेल सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने अदालत को बताया कि जिन कंपनियों को करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके मिले, उनमें से एक कंपनी का निदेशक विभाग के ही एक डाॅक्टर का घरेलू कर्मचारी (नौकर) है, जबकि दूसरी कंपनी का पंजीकृत कार्यालय महज 20 वर्गमीटर के छोटे से भूखंड पर संचालित पाया गया। इसके बावजूद इन्हीं कंपनियों को करोड़ों रुपये के खरीद आदेश जारी किए गए और लगातार भुगतान भी होता रहा।

    बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं उजागर

    विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मामले की जांच कर रही एसीबी ने अदालत बताया कि इन कंपनियों का वास्तविक संचालन मुख्य आरोपित राजीव अरोड़ा उर्फ राजीव रंगीला करता था। जांच के दायरे में एफ-मेड डिवाइसेज, टेक्नोक्रेट्स, आशी सर्जिकल्स, राजश्री और एम. साहिब एंड संस सहित कई फर्में हैं। आरोप है कि इन्हीं कंपनियों के माध्यम से दवाओं, सर्जिकल सामग्री, पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों, ओआरएस, चादरों और अन्य चिकित्सा सामग्री की खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं।

    गायब फाइलों की तलाश हुई तेज

    स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इन कंपनियों के माध्यम से हुए 200 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं। कंपनियों के बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन, अर्जित चल-अचल संपत्तियों और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान की जा रही है। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि इन फर्मों के पीछे वास्तविक नियंत्रण किसका था और सरकारी धन का अंतिम लाभ किसे मिला। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब गायब फाइलों और इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

    घोटाले की आरोपित डाॅ. वत्सला अग्रवाल रो पड़ीं

    स्वास्थ्य विभाग में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष न्यायाधीश धीरज मोर की अदालत में पेशी पर आईं दिल्ली की पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डाॅ. वत्सला अग्रवाल अदालत में रो पड़ीं। उन्होंने अदालत से कहा कि ‘मैंने कोई गलत काम नहीं किया और सभी निर्णय नियमानुसार लिए गए। कहाकि जिन फाइलों का उल्लेख किया जा रहा है, वे उनके अवकाश के दौरान गायब हुई थीं।

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    मुख्य आरोपित राजीव रंगीला अभी फरार

    विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एसीबी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है तथा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय रिकाॅर्ड की जांच अभी बाकी है। मामले में पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डाॅ. वत्सला अग्रवाल, केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के पूर्व प्रमुख डाॅ. विनोद कुमार रंगा और पूर्व उप नियंत्रक लेखा नीरज चोपड़ा को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मुख्य आरोपित राजीव रंगीला अभी फरार है।

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