दिल्ली सरकार और विश्व बैंक का बड़ा कदम, 8300 करोड़ से साफ होगी हवा, 7 वर्षीय एक्शन प्लान में क्या है खास?
विश्व बैंक के सहयोग से दिल्ली में 8300 करोड़ रुपये की 'स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली' परियोजना शुरू होगी। यह सात वर्षीय परियोजना वायु प्रदूषण कम करने, इले ...और पढ़ें

ईवी पॉलिसी लाकर दिल्ली सरकार ने प्रदूषण मुक्ति दिल्ली की ओर पहला कदम बढ़ाया है। फोटो: आर्काइव
HighLights
विश्व बैंक 8300 करोड़ की 'स्वच्छ हवा' परियोजना में सहयोग करेगा
सात वर्षीय परियोजना सितंबर से शुरू होकर 2033 तक चलेगी
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और प्रदूषण जांच प्रणाली होगी विकसित
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राजधानी की प्रदूषण मुक्त बनाने में दिल्ली सरकार के प्रयास को विश्व बैंक का सहयोग मिलेगा। इसके अंतर्गत प्रदूषण के कारणों की पहचान, रोकथाम और प्रभावी निगरानी प्रणाली स्थापित करने पर 8300 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
65% विश्व बैंक और 35% खर्च करेगी सरकार
जिसमें से 65 प्रतिशत वित्तीय सहायता विश्व बैंक उपलब्ध कराएगा। शेष 35 प्रतिशत राशि दिल्ली सरकार वहन करेगी। CM रेखा गुप्ता ने कहा कि सितंबर से 7 वर्षीय स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली परियोजना शुरू होगी। अगस्त, 2033 तक यह दिल्ली के सभी जिलों में लागू होगी।
इसका उद्देश्य दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करने के काम में तेजी लाना, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में योगदान देना है।

10 जुलाई को होने जा रही है वर्कशॉप
परियोजना की तैयारियों को अंतिम रूप देने और सभी हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए 10 जुलाई को कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
परियोजना दो स्तंभों पर आधारित होगा। पहला स्तंभ दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत बनाने पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत परियोजना के प्रभावी संचालन के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) बनाई जाएगी।
आधुनिक वायु गुणवत्ता निगरानी, डेटा एनालिटिक्स और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी।

पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर होगा काम
विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ ही पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर प्रदूषण नियंत्रण पर काम होगा। वैज्ञानिक योजना, जनजागरूकता, प्रशिक्षण और नई तकनीकों व नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा।
दूसरा स्तंभ प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा।
सार्वजनिक परिवहन को और बेहतर बनाया जाएगा तथा वाहनों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी के लिए अत्याधुनिक प्रदूषण जांच (पीयूसी) प्रणाली विकसित की जाएगी।
कई विभागों की होगी भूमिका
इस परियोजना में पर्यावरण विभाग, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड, दिल्ली परिवहन निगम, दिल्ली यातायात पुलिस, दिल्ली विकास प्राधिकरण, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, दिल्ली छावनी बोर्ड है।
इसके साथ ही दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम, दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम सहित अन्य संबंधित संस्थाएं शामिल होंगी। इसके अलावा भारत सरकार के आर्थिक कार्य विभाग और विश्व बैंक इस परियोजना के प्रमुख साझेदार होंगे।