मिडिल ईस्ट संकट की दिल्ली पर मार: आईजीआई एयरपोर्ट पर 100 से ज्यादा फ्लाइट्स रद, हजारों यात्री फंसे
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण 1 मार्च को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान संचालन बुरी तरह प्र ...और पढ़ें

दिल्ली एयरपोर्ट पर उड़ानें प्रभावित होने से यात्री परेशान। फाइल फोटो
HighLights
मध्य पूर्व संघर्ष के कारण दिल्ली हवाई अड्डे पर संचालन बाधित।
11 देशों का एयरस्पेस बंद, 100 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द।
हजारों यात्री फंसे, डीजीसीए ने एडवाइजरी जारी की।
जागरण संवाददता, नई दिल्ली। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में गहराते संघर्ष और व्यापक हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण रविवार, 1 मार्च को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईजीआई) पर विमानों का संचालन पूरी तरह चरमरा गया।
ईरान, इराक, इजरायल और सऊदी अरब समेत 11 देशों के एयरस्पेस बंद होने का सीधा असर दिल्ली से यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों को जोड़ने वाली उड़ानों पर पड़ा है। रविवार को ही दिल्ली एयरपोर्ट से करीब 100 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद कर दी गईं, जिससे हजारों यात्री टर्मिनल पर फंस गए।
विशेष एडवाइजरी जारी
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय एयरलाइंस के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। इसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि तनावग्रस्त क्षेत्रों के हवाई क्षेत्र का उपयोग न किया जाए। यह एडवाइजरी फिलहाल 2 मार्च तक प्रभावी है, जिसके कारण एयरलाइंस को या तो अपनी उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं या फिर बेहद लंबे वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
आईजीआई एयरपोर्ट से कुल 100 उड़ानें रद रहीं, जिनमें 60 प्रस्थान और 40 आगमन वाली उड़ानें शामिल थीं। आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में लगभग 444 उड़ानें प्रभावित हुई हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हब होने के कारण दिल्ली सबसे ज्यादा मार झेल रहा है। दिन चढ़ने के साथ ही रद्द होने वाली उड़ानों की संख्या में और इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है।
वेस्टबाउंड रूट्स पर पड़ा सबसे बुरा असर
हवाई क्षेत्र बंद होने का सबसे ज्यादा असर पश्चिम की ओर जाने वाले मार्गों (वेस्टबाउंड रूट्स) पर पड़ा है। इसमें दुबई, दोहा, रियाद और कुवैत सिटी जैसे खाड़ी के प्रमुख रूट शामिल हैं। वहीं, यूरोप और उत्तर अमेरिका जाने वाली उड़ानों, जैसे लंदन, पेरिस, न्यूयार्क और शिकागो के रूट पर भी भारी व्यवधान देखा गया। कई लंबी दूरी की उड़ानों को रद्द करना पड़ा क्योंकि उनके लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं था।
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जो उड़ानें रद्द नहीं हुई हैं, उन्हें मध्य एशिया या दक्षिण-पूर्व एशिया के रास्ते मोड़ा जा रहा है। इस रीरूटिंग के कारण उड़ानों का समय 2 से 4 घंटे तक बढ़ गया है। विमानों को लंबा रास्ता तय करने के कारण न केवल ईंधन की खपत बढ़ी है, बल्कि ईंधन की लागत में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है। औसत देरी 1 से 3 घंटे के बीच बनी हुई है, जिससे हवाई अड्डे पर यात्रियों की भारी भीड़ और अव्यवस्था का माहौल देखा जा रहा है।
एयर इंडिया और इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइंस प्रभावित
इस संकट से सबसे ज्यादा एयर इंडिया और इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइंस प्रभावित हुई हैं। एयर इंडिया ने अपने मिडिल ईस्ट रूट्स को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है, जबकि इंडिगो की दुबई और दोहा की उड़ानों में बड़े पैमाने पर कटौती की गई है।
एयरलाइंस ने फंसे हुए यात्रियों के लिए मुफ्त रीबुकिंग, रिफंड और वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है। डीजीसीए ने सभी एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि वे यात्रियों को पल-पल की जानकारी दें और उनके ठहरने व खाने-पीने का उचित प्रबंध करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में जारी यह तनाव यदि जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले 2-3 दिनों तक हवाई यातायात इसी तरह प्रभावित रह सकता है। यात्रियों को एयरलाइंस की ओर से अपने आधिकारिक इंटरनेट मीडिया पर सलाह दी गई है कि वे एयरपोर्ट निकलने से पहले अपनी एयरलाइन की वेबसाइट या ऐप पर फ्लाइट स्टेटस जरूर जांच लें।