पंजाब के डीजीपी एवं जालंधर पुलिस आयुक्त की होगी जांच, दिल्ली विधानसभा ने विशेषाधिकार समिति को सौंपा मामला
दिल्ली विधानसभा ने कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ पंजाब पुलिस की कार्रवाई को विशेषाधिकार समिति को सौंपा है। यह मामला जालंधर में दर्ज FIR और विधान ...और पढ़ें
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पंजाब पुलिस ने कपिल मिश्रा के खिलाफ दर्ज की है एफआईआर। फोटो: आर्काइव

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राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ जालंधर में हुई एफआईआर मामले में भेजे गए कई नोटिस का भी जवाब नहीं देने पर दिल्ली विधानसभा ने यह मामला जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया है। विधानसभा की विशेषाधिकार समिति अब पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और जालंधर के पुलिस आयुक्त की भूमिका की जांच करेगी।
गत जनवरी 2026 को दिल्ली विधान सभा के पटल पर नेता प्रतिपक्ष द्वारा दिए गए बयानों के संबंध में पंजाब पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़े मामले पर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने यह संज्ञान लिया है।
विधानसभा द्वारा भेजे गए नोटिसों पर पंजाब पुलिस द्वारा प्रस्तुत पत्र तथा दिल्ली कैबिनेट मंत्री मिश्रा से प्राप्त शिकायत पर विचार करने के उपरांत अध्यक्ष ने यह निष्कर्ष निकाला कि प्रथमदृष्टया सदन के विशेषाधिकार के उल्लंघन एवं सदन की अवमानना का मामला बनता है।
यह मामला तब उठा था, जब पंजाब पुलिस ने इकबाल सिंह की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की तथा यह सार्वजनिक रूप से कहा कि दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही से संबंधित एक वीडियो क्लिप को एडिट अथवा छेड़छाड़ कर प्रस्तुत किया गया है।
विधानसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चूंकि यह विषय सीधे तौर पर सदन की कार्यवाही से संबंधित है, जो विधायिका के विशेषाधिकार क्षेत्र में आती है।
इसलिए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पंजाब पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा था तथा यह सूचित किया था कि अध्यक्ष एवं सदन पहले से ही इस विषय पर संज्ञान ले चुके हैं और विधानसभा की कार्यवाही से संबंधित किसी भी शिकायत अथवा कार्रवाई से पूर्व अध्यक्ष के संज्ञान में लाया जाना आवश्यक था। मगर अभी तब पंजाब पुलिस ने कोई सपोर्ट नहीं किया है।
इन तथ्यों के मद्देनजर विशेषाधिकार समिति को निर्देशित किया गया है कि वह इकबाल सिंह, पंजाब के पुलिस महानिदेशक, जालंधर पुलिस आयुक्त, पंजाब सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) तथा इस प्रकरण से जुड़े अन्य संबंधित व्यक्तियों के आचरण एवं कार्रवाई की जांच कर नियमों के अनुसार अपनी रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत करें।